जिसने लिखे फिल्मों के सबसे मकबूल गाने, उस 'पल दो पल के शायर' साहिर की कुछ खास बातें

जिसने लिखे फिल्मों के सबसे मकबूल गाने, उस 'पल दो पल के शायर' साहिर की कुछ खास बातें

साहिर लुधियानी की शख्सियत को कुछ लफ्जों में लिखना तो ना मुमकिन है. कहा जाता है कि साहिर अपनी शर्तों पर काम किया करते थे यहां तक कि साहिर के गीतों पर गानों की धुन बना करती थी.

Mar 8, 2021, 04:59 PM IST
46 साल बाद शायर बशीर बद्र को AMU से मिली PHD की डिग्री, बच्चों की तरह लगा लिया गले

46 साल बाद शायर बशीर बद्र को AMU से मिली PHD की डिग्री, बच्चों की तरह लगा लिया गले

जैसे ही बशीर बद्र सहाब को डिग्री मिली उसके बाद उनका चेहरा मासूमिसत से सराबोर था. उन्होंने फौरन डिग्री को गले से लगा लिया.

Jan 6, 2021, 03:22 PM IST
मुनफरिद लबो लहजे के मालिक अनवर जलालपुरी के यौमे वफात पर खास

मुनफरिद लबो लहजे के मालिक अनवर जलालपुरी के यौमे वफात पर खास

ये कहना भी बेजा नहीं होगा कि अनवर साहब जदीदियत के शायर थे. उनकी जबान उतनी सादा और सस्ता थी कि एक आम इंसान को भी आसानी से समझ में आ जाती थी.

Jan 2, 2021, 06:36 PM IST
Mirza Ghalib Birth Anniversary: ग़ालिब की शायरी और जवानी पेंशन के मुक़दमें में उलझ कर रह गई

Mirza Ghalib Birth Anniversary: ग़ालिब की शायरी और जवानी पेंशन के मुक़दमें में उलझ कर रह गई

अठारहवीं सदी के आख़िर में मिर्जा गालिब के चचा मिर्जा नसरुल्लाह बेग की बहादुरी और वफ़ादारी से ख़ुश होकर अंग्रेज़ों ने उन्हें 400 घुड़सवार फौजियों के दस्ते का अफ़सर मुक़र्रर किया था.

Dec 27, 2020, 12:03 PM IST
"अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है..." ख्वातीन की आवाज़ "परवीन शाकिर" के यौमे वफात पर खास

"अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है..." ख्वातीन की आवाज़ "परवीन शाकिर" के यौमे वफात पर खास

परवीन शाकिर की शायरी ख्वातीन के दिलों के काफी नज़दीक है. उनकी शायरी में वो दर्द और कर्ब है जो हर किसी को अपनी जानिब माइल करता हैं. 

Dec 26, 2020, 02:25 PM IST
"बड़े शौक से सुन रहा था ज़माना, तुम्हीं सो गए दास्तां कहते-कहते"

"बड़े शौक से सुन रहा था ज़माना, तुम्हीं सो गए दास्तां कहते-कहते"

फारुकी आलमी शोहरत याफ्ता तजज़ियाकार और नज़रियानिगार और शायर थे. उन्होंने दास्तान गोई को दुबारा ज़िंदा करने में बुनियादी किरदार अदा किया

Dec 25, 2020, 01:59 PM IST

VIDEO: "टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी..." अटल बिहारी की वे कविताएं जो देती हैं हिम्मत

पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आज 96वीं जयंती है. बीजेपी सरकार अटल बिहारी के जन्मदिवस को सुशासन दिवस के रूप में मनाती है. अटल बिहारी बाजपेयी फक्कड़पन के नए तराने लिखने के लिए जाने जाते थे. उनकी कविताएं देश प्रेम से प्रेरित होती थी. तो आइए आपको सुनाते उनकी कुछ कविताएं.

Dec 25, 2020, 12:07 PM IST
Birthday Special: "ये है जब्र इत्तेफ़ाक़ नहीं, जौन होना कोई मज़ाक़ नहीं"

Birthday Special: "ये है जब्र इत्तेफ़ाक़ नहीं, जौन होना कोई मज़ाक़ नहीं"

उनके कमरे की किताबें इनकार की तालीम देती थीं. इसी कमरे में बैठकर वो बग़ावत के जज़्बात को काग़ज़ पर उतार दिया करते थे.

Dec 14, 2020, 12:46 PM IST
उर्दू की चाशनी में घुली कान्हा के लिए मीरा की मोहब्बत

उर्दू की चाशनी में घुली कान्हा के लिए मीरा की मोहब्बत

मीरा की मोहब्बत और इबादत की शायरी को तहज़ीब के लिए पहचानी जाने वाली भाषा उर्दू में ढालने का कारनामा शायर हाशिम रज़ा जलालपुरी ने कर किया है.

Oct 22, 2020, 04:45 PM IST
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अब किसी और सलीके से सताए दुनिया...जी बदलने लगा असबाब-ए-परेशानी से

उर्दू शायरी के खज़ाने से मुंतखब किए हुए 10 बेहतरीन

Oct 13, 2020, 05:24 PM IST
उर्दू के मारुफ़ शायर डॉ. अज़ीम अमरोहवी का इंतेक़ाल, अदबी हलक़ों में ग़म की लहर

उर्दू के मारुफ़ शायर डॉ. अज़ीम अमरोहवी का इंतेक़ाल, अदबी हलक़ों में ग़म की लहर

अज़ीम साहब के तारीख़ी शऊर और मंतिख़ि ज़ेहन ने उर्दू शायरी के तमाम असनाफ़ पर अपने तख़य्युलात और अफ़कार के आबशार बरसाए

Oct 10, 2020, 04:23 PM IST

Video: उर्दू के मशहूर शायर अज़ीम अमरोहवी का इंतेकाल

उर्दू के मशहूर शायर अज़ीम अमरोहवी का आज इंतेकाल हो गया है. उन्होंने दिल्ली के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली. अज़ीम अमरोहवी 50 से ज्यादा किताबों के मुसन्निफ थे. वो इंटरनेशनल मरसिया फोरम के चेयरमैन के ओहदे पर भी तैनात थे.अज़ीम अमरोहवी ने एक लंबे अरसे तक उर्दू दुनिया और कौम व मिल्लत की खिदमत की है.

Oct 10, 2020, 04:07 PM IST
राहत को चुकानी पड़ी थी अपनी बेबाकी की कीमत, बरसों तक नहीं मिली थी लालकिला मुशायरे की दावत

राहत को चुकानी पड़ी थी अपनी बेबाकी की कीमत, बरसों तक नहीं मिली थी लालकिला मुशायरे की दावत

कई बरसों के बाद जब दिल्ली में हुकूमत बदली और दिल्ली उर्दू अकादमी में नए वाइस चेयरमैन माजिद देवबंदी आए तो उन्होंने राहत इंदौरी को लाल किले के मुशायरे में आने की दावत दी. 

Aug 12, 2020, 01:07 PM IST
"हां भाई बना दो हमारी तस्वीर, क्योंकि हम रुख्सत होने वाले हैं..."

"हां भाई बना दो हमारी तस्वीर, क्योंकि हम रुख्सत होने वाले हैं..."

...उस वक्त मैंने वहां पर मौजूद एक फोटोग्राफर से कहा कि अरे भाई हमारी खुशनसीबी है कि हम राहत साहब के पास बैठे हैं, तो हमारी एक तस्वीर ही बना दो.

Aug 12, 2020, 11:09 AM IST
'जनाज़े पर मिरे लिख देना यारो, मोहब्बत करने वाला जा रहा है'

'जनाज़े पर मिरे लिख देना यारो, मोहब्बत करने वाला जा रहा है'

राहत इंदौरी एक नहीं सैंकड़ों ऐसे शेर और गज़ले हैं जो हालात हाज़रा की तरजुमानी करते हों. उन्हीं सैंकड़ों गज़लों में से एक गज़ल हम आपके लिए पेश कर रहे हैं.

Aug 11, 2020, 07:25 PM IST
जानिए इंदौर के 'कामिल' ने राहत इंदौरी बनकर शायरी की दुनिया पर कैसे किया राज

जानिए इंदौर के 'कामिल' ने राहत इंदौरी बनकर शायरी की दुनिया पर कैसे किया राज

राहत इंदौरी की यौमे पैदाईश 1 जनवरी 1950 को हुई थी. उनका बचपन का नाम कामिल था जो बाद में राहतउल्ला कुरैशी हुआ लेकिन दुनिया में पहचान डॉ. राहत इंदौरी के नाम मिली.

Aug 11, 2020, 06:46 PM IST
बुलाती है मगर जाने का नहीं, पढ़ें राहत इंदौरी की एक ऐसी गज़ल जो हर बच्चे की ज़बान पर है

बुलाती है मगर जाने का नहीं, पढ़ें राहत इंदौरी की एक ऐसी गज़ल जो हर बच्चे की ज़बान पर है

राहत इंदौरी कोशिश किया करते कि उनकी शायरी को हर कोई समझ सके, इसके लिए वो बेहद आसान लफ्ज़ों का इस्तेमाल करते थे. यही वजह है कि उनकी गज़लें नौजवानों ही नहीं बूढ़े, बच्चों की ज़बानों पर भी रवां रहती हैं.

Aug 11, 2020, 06:12 PM IST
...ऐ मौत तूने मुझको ज़मीदार कर दिया.. पढ़िए राहत इंदौरी के 20 बेहतरीन शेर

...ऐ मौत तूने मुझको ज़मीदार कर दिया.. पढ़िए राहत इंदौरी के 20 बेहतरीन शेर

राहत इंदौरी की मौत अदबी दुनिया के कभी न भरने वाला ज़ख्म साबित होगा. राहत इंदौरी अपने बेबाक अदांज़ और बेहतरीन शायरी के लिए जाने जाते रहे हैं. 

Aug 11, 2020, 05:40 PM IST
हाए क्या दौर-ए-ज़िंदगी गुज़रा..वाक़िए हो गए कहानी से, गुलज़ार देहलवी के इंतेकाल पर खास

हाए क्या दौर-ए-ज़िंदगी गुज़रा..वाक़िए हो गए कहानी से, गुलज़ार देहलवी के इंतेकाल पर खास

मेरा मक़सद किसी शायर पर न तो तनक़ीद करना है...न ही कोई नया तनाज़ा पैदा करना है...दौरे हाज़िर में जो शायर हैं वो अच्छी शायरी कर रहे हैं...उर्दू अदब उन्हे याद रखेगा...लेकिन.......

Jun 13, 2020, 08:14 PM IST

भर दो झोली मेरी या मुहम्मद लौट कर मैं ना जाउंगा खाली | रंग तरंग एक नई आवाज़

सुनिए "भर दो झोली मेरी या मुहम्मद" इंज़माम ख़ान निज़ामी की आवाज़ में

Feb 20, 2020, 08:00 PM IST