इस मंदिर में आता है 70 लाख का मासिक चढावा; ट्रस्ट ने कहा- इससे नहीं चल रहा मंदिर का खर्चा

पद्मनाभस्वामी मंदिर की प्रशासनिक समिति ने न्यास की लेखा परीक्षा का अनुरोध करते हुए शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि मंदिर बहुत मुश्किल समय से जूझ रहा है और वहां चढ़ाया जाने वाला दान इसके खर्चों को पूरा करने के लिए काफी नहीं है.   

इस मंदिर में आता है 70 लाख का मासिक चढावा; ट्रस्ट ने कहा- इससे नहीं चल रहा मंदिर का खर्चा
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर

नई दिल्लीः केरल में श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की प्रशासनिक समिति ने न्यास की लेखा परीक्षा का अनुरोध करते हुए शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि मंदिर बहुत मुश्किल समय से जूझ रहा है और वहां चढ़ाया जाने वाला दान इसके खर्चों को पूरा करने के लिए काफी नहीं है. समिति की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने न्यायमूर्ति यू यू ललित, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की बेंच से कहा कि केरल के सभी मंदिर बंद हैं. उन्होंने कहा कि मासिक खर्च 1.25 करोड़ रुपये है, जबकि हमें मुश्किल से 60-70 लाख रुपये मिल पाते हैं इसलिए हमने कुछ दिशा-निर्देशों का अनुरोध किया है.

न्यास को मंदिर के खर्चे में योगदान देना चाहिए
बसंत ने पीठ से कहा कि न्यायालय के आदेश पर एक न्यास का गठन किया गया है और उसे मंदिर में योगदान देना चाहिए. न्यास की जानिब से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने दलील दी कि यह शाही परिवार द्वारा बनाया गया एक सार्वजनिक न्यास है और इसकी प्रशासन में कोई भूमिका नहीं है और यह न्यास याचिका में पक्षकार नहीं है. न्यास के खातों की लेखा-परीक्षा किए जाने की न्यायमित्र की मांग के बाद ही यह उच्चतम न्यायालय के समक्ष इसका जिक्र किया गया. दातार ने कहा कि इसकी लेखा-परीक्षा की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह मंदिर से अलग है.

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा था केरल हाईकोर्ट का फैसला 
न्यायालय ने श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर न्यास को 25 साल का लेखा परीक्षा कराने के पिछले साल के आदेश से छूट के लिए दायर अर्जी पर सुनवाई पूरी करके अपना आदेश सुरक्षित रखा था. इससे पहले, शीर्ष अदालत ने केरल उच्च न्यायालय के 2011 के उस फैसले को दरकिनार कर दिया था, जिसमें ऐतिहासिक मंदिर के प्रबंधन और सम्पत्तियों का नियंत्रण लेने के लिए एक न्यास गठित किए जाने का राज्य सरकार को आदेश दिया गया था.

कोर्ट ने दिया था मंदिर के आमदनी और खर्चे के हिसाब का आदेश 
शीर्ष अदालत ने देश में सबसे अमीर समझे जाने वाले मंदिरों में शामिल इस मंदिर के प्रशासन में त्रावणकोर शाही परिवार के अधिकार बरकरार रखे थे. न्याय मित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम के सुझाव के मुताबिक, न्यायालय ने प्रशासनिक समिति को पिछले 25 वर्षों से मंदिर की आमदनी और खर्च का लेखा-परीक्षा का हुक्म दिया था.  

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