आरसीईपी ने भारत को ऑब्जर्वर के तौर पर किया आमंत्रित, जानें-क्यों भारत ने बनाई थी दूरी

रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप-RCEP ने भारत को ऑब्जर्वर मेंबर के तौर पर  आमंत्रित किया है, साथ ही भविष्य में पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर शामील होने के लिए जगह भी छोड़ी है.

आरसीईपी ने भारत को ऑब्जर्वर के तौर पर किया आमंत्रित, जानें-क्यों भारत ने बनाई थी दूरी
आरसीईपी की बैठक

नई दिल्ली: रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप-RCEP ने भारत को ऑब्जर्वर मेंबर के तौर पर  आमंत्रित किया है, साथ ही भविष्य में पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर शामील होने के लिए जगह भी छोड़ी है. हाल ही में आसियान के दस देशों और पांच अन्य देशों ने रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप-RCEP  के तहत फ्री ट्रेड पैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं.

साझा बयान जारी
आरसीईपी की तरफ से साझा बयान जारी किया गया, जिसमें भारत के बारे में विशेष टिप्पणी की गई. ये बयान आरसीईपी का मेगा पैक्ट साइन करने के बाद जारी किया गया. इसमें कहा गया, 'इस एग्रीमेंट पर सिग्नेचर के बाद भारत आरसीईपी में कभी भी ऑब्जर्वर मेंबर के तौर पर शामिल हो सकता है.  इसके तहत भारत आरसीईपी मेगा पैक्ट साइन करने वाले देशों के साथ आर्थिक गतिविधियां भी कर सकता है.

आरसीईपी में शामिल था भारत, लेकिन
भारत आरसीईपी की नींव डालने वाले 16 देशों में शामिल था, लेकिन पिछले साल भारत ने इससे खुद को अलग कर लिया. इसकी वजह भारत ने बढ़ते व्यापार घाटे को बताया था और कहा था कि आरसीईपी में शामिल होने का मतलब है भारत के बाजारों में चीनी सामानों की भरमार. इससे भारत की आंतरिक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता.

क्या है RCEP?
आरसीईपी एक ट्रेड अग्रीमेंट है जो सदस्य देशों को एक दूसरे के साथ व्यापार में सहूलियत देता है. इस एग्रीमेंट पर आसियान के 10 देशों के साथ-साथ पांच अन्य देश ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं. आरसीईपी के तहत दुनिया की कुल जीडीपी का 30 प्रतिशत हिस्सा आता है, लेकिन इसमें चीन का आधिपत्य है. आसियान के दस देशों में इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया है.

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