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RBI Credit Policy: क्या ब्याज दरों में होगा बदलाव, कल पॉलिसी में होगा ऐलान

रिजर्व बैंक इस साल ब्याज दरों (Repo rate) में 115 बेसिस प्वाइंट यानि 1.15 परसेंट तक की कटौती कर चुका है. इस कटौती के साथ ही रेपो रेट साल 2000 के बाद 4 परसेंट पर है, जो कि सबसे निचला स्तर है. ऐसे में क्या RBI ब्याज दरों में और कटौती करेगा. इसके कई फैक्टर्स हैं. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Dec 03, 2020, 09:40 AM IST

नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की (MPC) की बैठक का आज दूसरा दिन है. कल क्रेडिट पॉलिसी का ऐलान होगा. सवाल वही है कि क्या रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कोई राहत देगा और आपकी EMI में कोई फर्क पड़ेगा. इकोनॉमी आधिकारिक रूप से अब मंदी में जा चुकी है, अक्टूबर में रीटेल महंगाई दर भी 7.61 परसेंट पर पहुंच गई है. 

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क्या ब्याज दरों में कोई बदलाव होगा?

Will RBI change repo rate

हमारे सहयोगी चैनल ज़ी बिज़नेस ने हर बार की तरह इस बार भी एनालिस्ट और इकोनॉमिस्ट्स से बात कर एक महाोपल किया है. सभी ने कहा कि रिजर्व बैंक की Creit Policy एक नॉन-इवेंट होगा, यानि पॉलिसी में किसी तरह का कोई बदलाव होते हुए नहीं दिखेगा. ज़ी बिज़नेस महापोल में सबसे पहले यही पूछा गया कि क्या ब्याज दरों में किसी तरह का कोई बदलाव देखने को मिलेगा. सभी ऐनालिस्ट और इकोनॉमिस्ट का यही मानना था कि ब्याज दरों में कोई बदलाव होने की उम्मीद नहीं है. 

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RBI का रुख क्या होगा?

RBI Stance in Credit policy

इस बार रिजर्व बैंक का रुख (Stance) रहने वाला है, इस पर सभी का कहना है कि RBI का रुख अकोमोडेटिव ही रहने वाला है, जैसा कि पिछले कई बार से रिजर्व बैंक ने अपना रखा है 

 

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क्या आगे महंगाई दर में गिरावट होगी?

What will be inflation projection

इस बार क्या महंगाई दरों को लेकर कोई गिरावट के संकेत मिलेंगे, क्या रिजर्व बैंक महंगाई को लेकर कोई रिजर्व बैंक के लक्ष्य में कोई बदलाव होगा. इस पर 80 परसेंट एनालिस्ट का यही कहना है कि महंगाई को लेकर रिजर्व बैंक के रुख में कोई बदलाव नहीं होने वाला है. हालांकि 20 परसेंट एनालिस्ट का मानना है कि महंगाई के अनुमान में हल्के बदलाव देखने को मिल सकते हैं . यानि महंगाई दर में गिरावट आती हुई दिख सकती है. 

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पॉलिसी में फोकस कहां रहेगा

RBI focus on policy

ज़ी बिज़नेस के महापोल में जब एनालिस्ट से ये पूछा गया कि रिजर्व बैंक पॉलिसी का फोकस कहां रहने वाला है तो वित्त वर्ष 21 और वित्त वर्ष 22 के लिए जीडीपी अनुमान को लेकर चर्चा की जा सकती है. साथ ही महंगाई दर पर क्या आउटलुक बनता है, इस पर भी नजर रहेगी. रिजर्व बैंक वित्तीय घाटे को लेकर कुछ बयान दे सकता है, इस पर भी सभी का ध्यान रहेगा. सिस्टम में लिक्विडिटी लेवल को लेकर भी चर्चा हो सकती है. रिजर्व बैंक के ओर से दरें घटाने के बाद बैंकों ने इसे ग्राहकों तक कितना पहुंचाया है, इस ट्रांसमिशन पर भी रिजर्व बैंक कुछ बयान दे सकता है.