नरगिस के इस एक फैसले से Padmini पर जा टिकी थी राज कपूर की नजर

आज अभिनेत्री पद्मिनी (Padmini) के पुण्यतिथि पर आइए जानते हैं पद्मिनी से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Sep 24, 2020, 11:01 AM IST

नई दिल्ली: आज ही के दिन साल 2006 में बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री पद्मिनी (Padmini) का निधन हो गया था. आज उनके पुण्यतिथि पर आइए जानते हैं पद्मिनी से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी. राज कपूर (Raj Kapoor) और नरगिस के लिए 1957 का साल बहुत ही बड़े फैसले वाला था. आरके कैम्प में आने के बाद वो सालों से बाहर की फिल्में नहीं कर रही थीं, लेकिन ‘मदर इंडिया’ का अपना रोल उन्हें इतना भाया कि किसी भी सूरत में वो मूवी छोड़ने को तैयार नहीं थीं. राज कपूर ने समझाया भी कि एक बार आरके कैम्प छोड़ने के बाद दोबारा एंट्री नहीं मिलेगी, लेकिन नरगिस तय कर चुकी थीं. ऐसे में राज कपूर अंदर से काफी दुखी थे. उन्हीं दिनों उन्होंने रूस जाने का फैसला किया, जहां उनकी फिल्में काफी पसंद की जाती थीं, वहां के मॉस्को यूथ फेस्टिवल से उन्हें न्योता मिला था. गम भुलाने के लिए वो वहां चले गए और जिस लडकी को वहां ‘बेस्ट क्लासिकल डांसर का अवॉर्ड’ मिला था, उसकी डांस परफॉर्मेंस देखकर वो दंग रह गए, उनको लगा यही तो वो लड़की है, जिसकी उन्हें तलाश थी.

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एक फिल्म प्रोडयूसर के परिवार से थीं पद्मिनी

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वो लड़की भारतीय थी. कभी स्टेट ऑफ त्रावनकोर कहे जाने वाले त्रिवेन्द्रम की उस लड़की का नाम था पद्मिनी. पद्मिनी एक फिल्म प्रोडयूसर के परिवार से थीं. उनकी बड़ी और उनसे छोटी बहन भी एक्ट्रेस थीं. पद्मिनी भी कई मूवीज में काम कर चुकी थीं. तीनों को ‘ट्रावनकोर सिस्टर्स’ कहा जाता था. बाद में राज कपूर को पता चला कि वो जिस होटल में रुके हैं, उसी में पद्मिनी भी रुकी हैं और उससे भी ज्यादा हैरत की बात उनके लिए ये थी कि उसी साल यानी 1957 में जो रूस-इंडिया ज्वॉइंट प्रोडक्शन की मूवी ‘जरनी बियोंड थ्री सीज’, बन रही थी, उसमें उनके पापा पृथ्वीराज कपूर के साथ पद्मिनी भी काम कर रही थीं, जो हिंदी में ‘परदेसी’ के नाम से उसी साल रिलीज हुई थी. एक और दिलचस्प बात थी, उस मूवी में नरगिस ने भी काम किया था.

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नरगिस की जगह पद्मिनी की एंट्री

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वो कई दिन तक मॉस्को में रुके. इस दौरान राज कपूर की तबीयत भी खराब हुई, तो पद्मिनी ने उनका काफी ख्याल रखा. राज कपूर ने तय कर लिया कि जो प्रोजेक्ट चल रहे हैं, उनके बाद नरगिस की जगह पद्मिनी को एंट्री दी जाएगी. पहली मूवी आई 1960 में नाम था ‘जिस देश में गंगा बहती है’. इस मूवी का अगर आपने ‘हो मैंने प्यार किया’ गाना देखा ना हो तो जरूर देखें, क्योंकि इस गाने में राज कपूर ने अपनी हीरोइन के साथ कुछ प्रयोग किए. पहाड़ियों से घिरे एक तालाब में साड़ी में काफी बोल्ड अंदाज में पद्मिनी पर ये गाना फिल्माया गया, जो काम वो नरगिस के साथ नहीं कर पाए थे, वो उन्होंने पद्मिनी के साथ किया. यहां तक बॉलीवुड में शायद ये पहली बार था जब अंडर वाटर कैमरा लगाकर कोई सीन शूट किया गया था. जानकार मानते हैं कि इसके बाद अपनी हीरोइन को साड़ी में बिंदास अंदाज में दिखाना राज कपूर की आदत सी हो गई.

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पद्मिनी से राज कपूर की अफेयर की खबरें

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इस मूवी ने अच्छी खासी कमाई की. लोगों ने मान लिया कि राज कपूर नरगिस का भी विकल्प ढूंढ सकते हैं. उनकी पद्मिनी से भी अफेयर की खबरें उड़ने लगीं. इधर पद्मिनी ने अमेरिकी डॉक्टर राम चंद्रन से शादी कर ली. उसका नुकसान राज कपूर को ये हुआ कि उनकी पद्मिनी के साथ अगली मूवी ‘आशिक’ को लेकर लोगों का एक्साइटमेंट कम हो गया, हालांकि राज कपूर ने नंदा को भी इस मूवी में लिया, लेकिन मूवी उतना अच्छा नहीं कर पाई. सो राज कपूर को पद्मिनी को भूलना ही पड़ा. इधर, पद्मिनी अमेरिका में ही जाकर रहने लगीं. पूरी तरह से अपने परिवार को वक्त देने लगीं.

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पद्मिनी स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स

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लेकिन, वो राज कपूर के सम्पर्क में बनी रहीं, जब 1970 में राज कपूर ‘मेरा नाम जोकर’ बना रहे थे, तो पद्मिनी तब तक फिर से मूवीज में काम करने का मूड बना चुकी थीं. राज कपूर ने सिमी ग्रेवाल और एक रूसी एक्ट्रेस के साथ उनको भी अपनी इस मूवी में एक रोल दिया. मीनू नाम के इस किरदार में वो एक लड़के के तौर पर रहती हैं, जिससे राज कपूर की दोस्ती हो जाती है, लेकिन जब उसका भेद खुलता है, तो सब दंग रह जाते हैं. इस मूवी में भी राज कपूर पद्मिनी के साथ एक बोल्ड सीन करना नहीं भूले. बाद में पद्मिनी ने अमेरिका में एक डांस स्कूल पद्मिनी स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स खोल लिया. उन्हीं की राह पर बाद में मीनाक्षी शेषाद्रि चली गई थीं.

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दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन

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24 सितंबर 2006 को वो डीएमके के नेता करुणानिधि के साथ एक मीटिंग में थीं, मीटिंग के दौरान ही उन्हें एक बड़ा दिल का दौरा पड़ा और उन्हें बचाया नहीं जा सका. पद्मिनी ऐसी शायद अकेली एक्ट्रेस थीं जो तमिल, तेलुगू, हिंदी, मलयालम और कन्नड़ पांच भाषाएं बोल सकती थीं और उन्होंने इन सब भाषाओं की मूवीज के अलावा रूसी भाषा की मूवीज में भी काम किया था. वो भरतनाट्यम में दक्ष थीं, इसलिए बैजयंती माला की प्रतिद्वंदी के तौर पर उनकी तमाम कहानियां छपती रहीं. सबसे दिलचस्प बात है ‘मेरा नाम जोकर’ का आइडिया भी राज कपूर को बैजयंती माला की मूवी ‘बहरूपिया’ से मिला था. राज कपूर और बैजयंती माला की ये मूवी थोड़ा सा शूट होकर डब्बा बंद हो गई थी. उस मूवी में राज कपूर एक जोकर बने थे. राज कपूर ने यहीं से आइडिया लेकर ‘मेरा नाम जोकर’ बनाई और बैजयंती माला की जगह पद्मिनी को साइन कर लिया.