7 साल बाद फिर बीजेपी में अरविंदर सिंह लवली, आखिर क्यों छोड़ दिया हाथ का साथ?
Advertisement
trendingNow12234397

7 साल बाद फिर बीजेपी में अरविंदर सिंह लवली, आखिर क्यों छोड़ दिया हाथ का साथ?

Loksabha Chunav: लवली ने अपने इस्तीफे में लिखा था कि वह लाचार महसूस कर रहे थे क्योंकि दिल्ली इकाई के वरिष्ठ नेताओं के सभी फैसलों पर AICC के दिल्ली प्रभारी दीपक बाबरिया रोक लगा रहे थे. इसके अलावा उन्होंने कई कारण खुद गिनाए थे.

7 साल बाद फिर बीजेपी में अरविंदर सिंह लवली, आखिर क्यों छोड़ दिया हाथ का साथ?

Arvinder Singh Lovely News: आखिरकार वही हुआ जिसके अंदेशा था. दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली बीजेपी में शामिल हो गए हैं. लवली ने कुछ ही दिन पहले कांग्रेस का हाथ छोड़ा था. उन्होंने दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में बीजेपी की सदस्यता ली है. लेकिन वे कौन से कारण रहे हैं जिसके चलते अरविंदर सिंह लवली इधर से उधर हो गए हैं. वे पहले भी बीजेपी में शामिल हुए थे लेकिन कुछ ही समय में उनका बीजेपी से मोहभंग हो गया था. असल में अरविंदर सिंह लवली शुरू से ही आम आदमी पार्टी से कांग्रेस के गठबंधन के खिलाफ थे. 

यहां तक कि अरविंदर सिंह लवली ने अपने इस्तीफे में यह भी लिखा है कि वह लाचार महसूस कर रहे थे क्योंकि दिल्ली इकाई के वरिष्ठ नेताओं के सभी फैसलों पर AICC के दिल्ली प्रभारी दीपक बाबरिया रोक लगा रहे थे. मीडिया से बातचीत में लवली ने यह भी कह दिया था कि मैं दिल्ली में कांग्रेस का अध्यक्ष हूं. इससे ऊपर तो पद मिल नहीं सकता मुझे पार्टी में. मैंने अपने लिए नहीं बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए इस्तीफा दिया है. जो खत मैंने भेजा था उसमें मैंने कारण गिनाए थे.

क्यों छोड़ गए थे कांग्रेस.. 
यह बात सही है कि अरविंदर सिंह लवली ने चार पन्नों के लेटर में दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) से हुए गठबंधन को अपने इस्तीफा का कारण बताया है. लवली का कहना है कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस पर इल्जाम लगाकर बनी थी, फिर उससे अलायंस कैसे हो सकता है. लेकिन इसके अलावा भी कई कारण थे. लवली ने DPCC में किसी सीनियर नियुक्ति करने की इजाजत नहीं दी है. 

लवली के मुताबिक अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के बाद से, AICC महासचिव (दिल्ली प्रभारी) ने उन्हें DPCC में कोई भी वरिष्ठ नियुक्ति करने की इजाजत नहीं दी है. डीपीसीसी के मीडिया चीफ के रूप में जिस नेता की नियुक्ति का आवेदन उन्होंने किया था, उसे अस्वीकार कर दिया गया. AICC सेक्रेटरी (दिल्ली प्रभारी) ने डीपीसीसी को सभी ब्लॉक प्रमुखों की नियुक्ति करने की इजाजत नहीं दी.

बाबरिया से भी नाराज थे लवली.. 
इस्तीफे के बाद लवली से पूछा गया कि दिल्ली कांग्रेस प्रभारी महासचिव दीपक बावरिया ने यह कहा है कि आप पर दबाव है? लवली ने इस पर कहा था कि वो उनकी राजनीतिक समझ है. उनको मालूम होना चाहिए कि मैं साल 2017 में बीजेपी में गया था. अगर कोई दबाव होता तो वापस ही क्यों आता. उनको दिल्ली की राजनीति के बारे में ज्यादा समझ नहीं है. मैंने जो खत भेजा था 14 पॉइंट का, उसे लेकर मेरी मंशा यही थी कि उस पर पार्टी आलाकमान सोचे.

वर्कर्स से बात नहीं करती कांग्रेस.. 
इसके अलावा लवली ने यह भी कहा था कि जो वर्कर नाराज हैं उन्हें मनाना चाहिए, वह कहते हैं कि उसे निकाल देना चाहिए. मैं कहता हूं कि अगर आप पार्टी के कैंडिडेट हमारे लीडर्स की तस्वीर नहीं लगा रहे तो हमको कम से कम अपने कैंडिडेट्स को तो कहना चाहिए कि हमारे लीडर का फोटो लगाएं. अगर दोनों पार्टियों के नेता केजरीवाल का फोटो लगाएंगे तो हम अपनी दुकान बंद ही कर दें. यही सब प्रमुख कारण थे जिसके चलते लवली ने कांग्रेस छोड़ी है. 

Trending news