जानिए श्राद्ध का असली अर्थ, पितृ दोष से ऐसे भी मुक्त हो सकते हैं बिहार के लोग

Pitru Dosh pitru paksha 2021: ज्योतिष में पितृ दोष सबसे बड़ा दोष माना गया है. जिस जातक की कुंडली में यह दोष होता है उसे धन अभाव से लेकर मानसिक क्लेश तक का सामना करना पड़ता है. जनकल्याण के कार्य, पौधे लगाना, गायों के लिए पेयजल की व्यवस्था करने से इस दोष से मुक्ति मिल सकती है.  

जानिए श्राद्ध का असली अर्थ, पितृ दोष से ऐसे भी मुक्त हो सकते हैं बिहार के लोग
जानिए श्राद्ध का असली अर्थ. (फाइल फोटो)

Patna: श्राद्ध, यानी श्रद्धा से अर्पण करना. आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रथमा तिथि से अमावस्या तिथि तक के 15 दिन श्राद्ध पक्ष कहलाते हैं. इसमें एक दिन बीते महीने की पूर्णिमा यानी भाद्रपद पूर्णिमा का भी जुड़ा होता है. इस तरह श्राद्ध के 16 दिन नियत हैं. 16 दिन मनुष्य जीवन में होने वाले 16 संस्कारों के प्रतीक हैं और एक तरह से संकेत हैं कि मृत आत्माएं भी संस्कारों से शुद्ध होकर मोक्ष के मार्ग पर बढ़ती हैं. बिहार के लोगों

मनुष्य पर हैं तीन ऋण
प्रत्येक मनुष्य का जीवन शुरू होने के साथ उस पर तीन ऋण चढ़ जाते हैं. यह तीन हैं देव ऋण, ऋषि ऋण व पितृ ऋण. इनमें से देव ऋण भगवान विष्णु के निमित्त, ऋषि ऋण महादेव शिव के प्रति और पितृ ऋण माता-पिता व पूर्वजों का ऋण होता है. इसमें भी पितृ ऋण सिर्फ पितरों की सेवा से ही उतारा जा सकता है. यह न उतरे तो दोष लगता है.

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महाभारत की कथा
महाराज पांडु को जब संतान न उत्पन्न करने का श्राप मिला तो वह वन में पत्नियों (कुंती व माद्री) के साथ निवास करने लगे. एक दिन उन्होंने स्वप्न में देखा कि वह आकाश मार्ग से ऋषियों के साथ देवलोक की ओर जा रहे हैं. कुछ दूर चलने के बाद ऋषिगण पीछे मुड़े और कहने लगे कि राजन आप आगे नहीं जा सकते, क्योंकि आपने अभी तक पितृ ऋण से मुक्ति नहीं पाई है. इतना कहकर ऋषिगण ब्रह्म लोक को चले गए.

परेशान हो गए पांडु
इसके बाद राजन का सपना टूटा तो उन्होंने कुलगुरु से पितृ ऋण से उबरने का उपाय पूछा. कुलगुरु ने बताया कि पितृ ऋण पूरा न किए जाने के कारण मनुष्य पितृ दोष का भागी बनता है. इसके अलावा माता-पिता वृद्ध जनों की सेवा न करना, उनकी इच्छा न पूरी करना, अवज्ञा करना, हरे वृक्ष काटना, पीपल-बरगद काटना, नदियों में मल-मूत्र त्याग, गो हत्या, पितरों को भूल जाना, ठीक ढंग से श्राद्ध न होना अथवा अंतिम संस्कार न होने से भी पितृ दोष लगता है. आप का कर्तव्य है आप प्रजा की रक्षा करें, लेकिन अब आप वनवास ले चुके हैं, इसलिए प्रजा को उसका भविष्य देकर ही आप पितृ ऋण से मुक्त हो पाएंगे.

ऐसे मिलेगी पितृ दोष से मुक्ति
ज्योतिष में पितृ दोष सबसे बड़ा दोष माना गया है. जिस जातक की कुंडली में यह दोष होता है उसे धन अभाव से लेकर मानसिक क्लेश तक का सामना करना पड़ता है. पितृदोष से पीड़ित जातक की उन्नति में बाधा रहती है. अपने पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने से तो पितृदोष से मुक्त हो सकते हैं. इसके अलावा जनकल्याण के कार्य, पौधे लगाना, गायों के लिए पेयजल की व्यवस्था करना व उन्हें हरी घास व गुण खिलाएं. घर के मुखिया पहला ग्रास कौओं के लिए निकालकर उन्हें खिला दें.

श्राद्ध पक्ष में भागवत सुनने से भी पितृ दोष का नाश होता है. ब्राह्मणों-कन्याओं को भोजन कराएं और हनुमान बाहुक का पाठ करके हुनुमान जी का ध्यान करें. इससे भी पितृ दोष का प्रभाव कम होता है.

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ये उपाय भी कर सकते हैं बिहार के लोग
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में बीते 10 सालों में पेड़ों की कटान में अंधाधुंध बढ़ोतरी हुई है. राजधानी पटना में इसी साल सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हजारों पेड़ काटे गए हैं. इसके अलावा वन तस्कर हर दिन पर्यावरण सुरक्षा अभियान को पलीता लगा रहे हैं. महर्षि वेदव्यास के मुताबिक हरे पेड़ काटे जाने से पितृदोष लगता है, लेकिन इसी के उलट पौध रोपड़ करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. ऐसे में राज्य के निवासी अगर पितृ दोष से मुक्त होना चाहते हैं तो श्राद्ध पक्ष में पौधे लगाने का संकल्प लें. पुराणों के अनुसार पंच पेड़ लगाने से कई यज्ञों का पुण्य भी मिलता है. श्राद्ध पक्ष में ये उपाय भी किया जा सकता है.