मुजफ्फरपुर के एक दर्जन गांवों में 6 महीने नाव का सहारा, बरसात में घाट-चचरी पुल के साथ बही लोगों की उम्मीद

Muzaffarpur Samachar: बागमती परियोजना उत्तरी व दक्षिणी बांध के बीच अवस्थित एक दर्जन गांव के लोगों को आवागमन के लिए साल के 6 महीने नाव का ही सहारा है.

मुजफ्फरपुर के एक दर्जन गांवों में 6 महीने नाव का सहारा, बरसात में घाट-चचरी पुल के साथ बही लोगों की उम्मीद
मुजफ्फरपुर के एक दर्जन गांवों में 6 महीने नाव का सहारा.

Muzaffarpur: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के औराई इलाके में बागमती परियोजना उत्तरी व दक्षिणी बांध के बीच अवस्थित एक दर्जन गांव के लोगों को आवागमन के लिए साल के 6 महीने नाव का ही सहारा है. शेष 6 महीने यहां के लोग चचरी होकर सफर तय करते हैं. प्रखंड के बेनीपुर, मधुबन प्रताप, पटोरी टोला, बारा बुजुर्ग, बारा खुर्द, बभनगामा पश्चिमी, हरनी टोला, भरथुआ दक्षिण टोला, चहुंटा दक्षिण टोला, चैनपुर, राघोपुर, तरबन्ना समेत एक दर्जन गांव के लोगों को बाढ़ के समय आवागमन के लिए नाव का ही सहारा रहता है.

जलस्तर कम रहने की स्थिति में औराई दक्षिणी क्षेत्र के लोग नाव के सहारे ही प्रखंड मुख्यालय जाते हैं. दूसरी ओर औराई प्रखंड के दक्षिणी हिस्से जो बागमती बांध के बाहर बसे हैं, ये 10 पंचायतों के लोग भी अतरार एवं मधुबन घाट पुल पर चचरी रहने पर इसी के सहारे प्रखंड मुख्यालय जाते हैं. बाकी बाढ़ और बरसात के दिनों में चचरी बह जाने पर एनएच-77 होकर सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर होकर लगभग 30 से 35 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर प्रखंड मुख्यालय जाते हैं.

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अतरार घाट पर दशकों से बहुप्रतीक्षित पूल एवं सड़क बनने की योजना महज डीपीआर बनने के साथ हीं ठंडे बस्ते में डाल दी गई. हर चुनावी वर्ष में गरहां हथौड़ी अतरार औराई पथ सभी पार्टियों के चुनावी वादे होते हैं. वर्तमान विधायक सह मंत्री रामसूरत कुमार ने भी हथौड़ी अतरार औराई सड़क जो पुरानी ऐतिहासिक जनकपुर रोड के नाम से जाना जाता है, बनाने का वादा किया था.

इस बरसात में भी औराई के मधुबन घाट और अतरार स्थित चचरी पुल के साथ लोगों की उम्मीद बह चुकी है, सहारा है तो बस नाव का जो औराई के लोगों की सदियों से लाइफलाइन रही है.

(इनपुट- मनोज कुमार)