घटने लगे COVID-19 के मामले, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय को सता रही ये चिंता

देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले धीरे-धीरे कम होने लगे हैं. लेकिन त्योहारों के बीच बिहार विधान सभा चुनाव और कुछ राज्यों में उपचुनाव को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने एकदम से कोरोना केसों में बढ़ोतरी की चिंता जाहिर की है. 

घटने लगे COVID-19 के मामले, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय को सता रही ये चिंता

नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के मामले धीरे-धीरे कम होने लगे हैं. लेकिन त्योहारों के बीच बिहार विधान सभा चुनाव और कुछ राज्यों में उपचुनाव को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने एकदम से कोरोना केसों में बढ़ोतरी की चिंता जाहिर की है. इसी के चलते हेल्थ मिनिस्ट्री ने अपनी तरफ से एक टीम बिहार के लिए रवाना कर दी है.

केंद्र सरकार की यह टीम राज्य में सुनिश्चित करेगी कि चुनाव प्रचार, उम्मीदवारों के नॉमिनेशन और वोटिंग समेत पूरी चुनावी प्रक्रिया में कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन हो. इसके लिए केंद्र की टीम राज्य सरकार की मदद करेगी.  स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा है कि केंद्र की टीमें पहले ही 6 राज्यों में भेजी जा चुकी हैं, जहां कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी हो रही थी.

आपको बता दें कि बिहार में लगातार इस तरह की तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिसमें कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है. यही वजह है कि स्वास्थ्य मंत्रालय की चिंता बढ़ गई है और फौरी तौर पर केंद्र की एक टीम बिहार भेजी जा रही है. केंद्र सरकार के विशेषज्ञों की ये टीम नासिक राज्य सरकार को सलाह देगी ताकि सही तरह से कोरोना प्रोटोकॉल को लागू कराया जाए. बल्कि इस बात की निगरानी भी करेगी कि चुनाव के दौरान कोविड प्रोटोकोल का पूरी तरह से पालन हो.

67 लाख कोरोना मरीज हुए ठीक
स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने आगे कहा है कि अभी तक 67 लाख से ज्यादा कोरोना के मरीज रिकवर हो चुके हैं. जो विश्व में सबसे ज्यादा हैं. यही नहीं भारत में अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा कोरोना के टेस्ट किए गए हैं, जिनकी संख्या 10 करोड़ तक पहुंचने वाली है. आज की तारीख में 9.6 करोड़ से ज्यादा कोरोना संक्रमण के टेस्ट किए जा चुके हैं. बीते सप्ताह के अवसर को देखा जाए तो हर दिन 10 लाख 34 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमण के टेस्ट किए जा रहे हैं.

इन राज्यों में कोरोना के केस सबसे अधिक
स्वास्थ्य सचिव के मुताबिक भारत में प्रति मिलियन आबादी पर संक्रमण के मामले देखें तो भारत में 310 प्रति मिलियन है. जबकि फ्रांस में सबसे ज्यादा 2457 प्रति मिलियन हैं. उन्होंने बताया कि 83 डेथ प्रति मिलियन भारत में हैं जो विश्व के अधिकतर देशो में इससे कही ज्यादा है. 84 दिन बाद ये समय आया है जब संक्रमण के केस जो प्रतिदिन आते है 50 हजार से नीचे आ गए हैं. 6 राज्यों में 64 फीसदी एक्टिव केसेस हैं और 50 फीसदी एक्टिव केस सिर्फ तीन राज्यो में महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल में हैं. 

वेंटीलेटर और ऑक्सीजन की भरपूर मात्रा में उपलब्ध
स्वास्थ्य सचिव के मुताबिक, 1 सितंबर को 43,022 मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे. बीच मे संख्या बढ़ी और आज की तारीख में 57,356 लोग ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं. देश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है. 9 सिंतबर से 15 सिंतबर के बीच सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी. अब धीरे-धीरे ऑक्सीजन की जरूरत कम हो रही है.

Zee News के सवाल पर दिया ये जवाब
कोरोना संक्रमण के इलाज पर भारी भरकम खर्च के चलते किस तरह से आम आदमी पर असर पड़ रहा है किस तरह से वह कंगाल हो रहा है Zee News के इस सवाल पर स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि 'कोरोना के इलाज पर खर्च को लेकर कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लाई गई हैं. कोर्ट ने इससे संबंधित निर्देश राज्यों को और हमें दिए हैं, जिनका हम पालन कर रहे हैं.'

कोरोना की वैक्सीन की तैयारियां पूरी
सरकार की तरफ से वैक्सीनेशन को लेकर भी पूरी तैयारियां की जा रही हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, आज की तारीख में दो करोड़ हेल्थ वर्कर और
एक करोड़ डॉक्टर को तत्काल प्रभाव से वैक्सीन देने की स्थिति में हैं. इसके लिए सिरिंज कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था है. यानी भारत सरकार की तरफ से बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं. सबको इंतजार है कि वैक्सीन के जो परीक्षण चल रहे हैं वह प्रयोग कब सफल होते हैं और कब वैक्सीन तैयार होती है. और जब तक वैक्सीन तैयार नहीं होती, तब तक हम सभी को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना बेहद जरूरी है.

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