कोरोना की तीसरी लहर के लिए कितने तैयार हम? Omicron से बढ़ी दुनिया की परेशानी
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कोरोना की तीसरी लहर के लिए कितने तैयार हम? Omicron से बढ़ी दुनिया की परेशानी

अभी तक आप डेल्टा को भूले नहीं होंगे. इसलिए आज हम आपको Omicron से सावधान रहने के तरीके बताएंगे. इस बीच भारत ने High Risk देशों की एक सूची तैयार की है, जहां से आने वाले लोगों पर सख्त नियम लागू होंगे. तो अगर आप Omicron से बचना चाहते हैं तो आपको ये खबर जरूर पढ़नी चाहिए.

कोरोना की तीसरी लहर के लिए कितने तैयार हम? Omicron से बढ़ी दुनिया की परेशानी

पॉडकास्ट सुनें:

  1. Omicron से परेशान है पूरी दुनिया
  2. तीसरी लहर के लिए कितने तैयार हम?
  3. बदला हुआ कोरोना क्या फिर लेगा बदला?

नई दिल्ली: आज हम सबसे पहले आपको कोरोना वायरस के नए रूप से मिलवाएंगे. अब कोरोना वायरस पूरी दुनिया में अपने नए वैरिएंट यानी अपने नए रूप में फैल रहा है और उसका नाम है Omicron. ये वायरस पहली बार साउथ अफ्रीका में मिला है और तेजी से पूरी दुनिया में फैल रहा है. अब तक इसकी एंट्री 16 देशों में हो चुकी है. 

डेल्टा से कितना खतरनाक नया वैरिएंट?

डॉक्टरों का कहना है कि ये कोरोना वायरस के पिछले वैरिएंट Delta से 7 गुना ज्यादा घातक है और ये कई गुना ज्यादा तेजी से फैलता है. अभी तक आप डेल्टा को भूले नहीं होंगे. इसलिए आज हम आपको Omicron से सावधान रहने के तरीके बताएंगे. इस बीच भारत ने High Risk देशों की एक सूची तैयार की है, जहां से आने वाले लोगों पर सख्त नियम लागू होंगे. तो अगर आप Omicron से बचना चाहते हैं तो आपको ये खबर जरूर पढ़नी चाहिए.

एक ताजा अध्ययन के मुताबिक कोरोना का डेल्टा वैरिएंट जितना 100 दिनों में फैला था, उतना ये सिर्फ 15 दिनों में फैल चुका है. इस वैरिएंट में अब तक 32 Mutation हो चुके हैं. जब कोई वायरस तेजी से Mutate होता है यानी अपना रूप बदलता है तो उससे लड़ना काफी मुश्किल हो जाता है.

इस वजह से बढ़ी दुनिया की चिंता

कोरोना के नए वैरिएंट की पहली तस्वीर को इटली की State University of Milan द्वारा प्रकाशित किया गया है. इसमें जो लाल रंग के निशान हैं, वो ये बता रहे हैं कि इस वायरस में कहां Mutation हुआ है और जो Grey एरिया है, वो ये बता रहा है कि किस जगह इस वैरिएंट ने रूप नहीं बदला है. किसी भी वायरस में Mutation की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है. लेकिन इस वैरिएंट में Mutation असमान्य तरीके से हुआ है, जिसकी वजह से पूरी दुनिया चिंता में है.

अब तक कुल 16 देशों में ये वायरस पहुंच चुका है. इनमें अफ्रीकी देश हैं, यूरोप के कुछ देश हैं. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इजरायल और Hong Kong में भी इस वैरिएंट से लोग पॉजिटिव हुए हैं. भारत में कुछ लोगों को संदिग्ध मानते हुए उनकी जांच की जा रही है. लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक इस वैरिएंट के एक भी मामले की पुष्टि नहीं की है.

वायरस का DNA या RNA क्या है?

किसी भी वायरस में बदलाव होते रहते हैं. ये एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. मान लीजिए जैसे कोरोना वायरस किसी एक गेंद की तरह गोल आकार का है और इस पर जो ये कांटे लगे हुए हैं, उन्हें Spikes कहते हैं, जिनमें Genetic Material होता है. Genetic Material का मतलब ये है कि उस वायरस का DNA या RNA क्या है. कोरोना वायरस का Genetic Material RNA है.

आपको ये सब बहुत जटिल लग रहा होगा. इसलिए इसे आप ऐसे समझिए कि RNA इस वायरस के घर का पता है. अब समस्या ये है कि इस वायरस के घर का पता लगातार बदलता रहता है. यानी वायरस में लगातार बदलाव होते रहते हैं और इसे ही Mutation कहा जाता है. वायरस जब अपने घर का पता बदलता है यानी Mutate होता है तो वो कई बार नए स्ट्रेन का रूप ले लेता है. अपनी एक अलग पहचान बना लेता है. इसे हम नया Variant या नया स्ट्रेन कहते हैं और Omicron भी इन्हीं में से एक है.

नए वैरिएंट से तबाही का खतरा

पिछले एक साल में WHO कोरोना के पांच वैरिएंट को Variant of Concern की सूची में रख चुका है. इनमें Delta Variant भी था, जिसकी वजह से भारत में कोरोना की दूसरी लहर आई थी. इस लहर में लगभग ढाई से तीन लाख लोगों की मौतें हुई थीं. अब सोचिए, डेल्टा वैरिएंट जब इतनी तबाही लाया था तो ये नया वैरिएंट कितना खतरनाक साबित होगा. वैसे अब तक दुनिया को इस नए वैरिएंट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है.

वैज्ञानिकों को ये तो पता है कि ये वैरिएंट ज्यादा से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर सकता है. लेकिन उन्हें ये नहीं पता कि इससे संक्रमित होने के बाद कितने मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है. इसकी जानकारी तभी हो सकती है, जब सभी देशों में वायरस की लगातार Genome Sequencing की जाए.

मान लीजिए कि किसी देश में एक दिन में कोरोना के 100 नए मामले मिले. अगर इनकी Genome Sequencing नहीं हुई तो ये नहीं पता चल पाएगा कि उस देश में लोग नए वैरिएंट से संक्रमित हुए हैं या पुराने से और ये वायरस कितना खतरनाक है.

उदाहरण के लिए भारत में कोरोना के एक प्रतिशत मामलों की भी Genome Sequencing नहीं हो रही, जिससे ये पता लगाया जा सके कि हमारे देश में ये वैरिएंट पहुंचा है या नहीं और ये कितना खतरनाक है. हालांकि कुछ लोगों को संदिग्ध मानते हुए उनके सैम्पल्स की जांच जरूर की जा रही है.

हाई रिस्क लिस्ट में ये देश शामिल

इसके अलावा भारत ने खतरे को देखते हुए कई देशों को हाई रिस्क की सूची में रखा है. मतलब इन देशों से जो लोग भारत आ रहे हैं, उन्हें कड़ी निगरानी में रखा जाएगा और उनके लिए कोरोना प्रोटोकॉल भी काफी सख़्त होंगे. इन देशों में ब्रिटेन है और यूरोप के सभी 44 देश हैं. अफ्रीकी देश हैं, चीन, Hong Kong, इजरायल, सिंगापुर, Mauritius, न्यूजीलैंड और बांग्लादेश को भी इस सूची में रखा गया है. इन देशों से आने वाले यात्रियों के लिए भारत सरकार ने नई Guidelines बनाई हैं, जो 1 दिसम्बर से लागू होंगी.

इसके तहत विदेशी यात्रियों को भारत में अनिवार्य रूप से खुद के खर्च पर कोरोना का RT-PCR टेस्ट कराना होगा और जांच रिपोर्ट आने तक एयरपोर्ट पर ही रुकना होगा. रिपोर्ट Negative आने पर होम क्वारंटीन के 7 Plus 7 फॉर्मूले का पालन करना होगा. इसमें एयरपोर्ट पर हुए टेस्ट की रिपोर्ट Negative आने पर 7 दिनों के लिए Home Quarantine में रहना होगा. आठवें दिन फिर से कोरोना का RT-PCR टेस्ट कराना होगा और अगर जांच रिपोर्ट इस बार भी Negative आती है, तब भी 7 दिन का और Home Quarantine अनिवार्य होगा. यानी इस हिसाब से Negative रहने पर भी Home Quarantine 14 दिन का होगा.

सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन

अगर एयरपोर्ट पहुंचने पर किसी यात्री की RT-PCR रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उसके Samples को Genome Sequencing के लिए भेजा जाएगा, ताकि ये पता चल सके कि वो व्यक्ति कोरोना के नए वैरिएंट से संक्रमित है कि नहीं. संक्रमित व्यक्ति की Contact Tracing भी जरूरी होगी. इसके लिए मरीज के साथ बैठे व्यक्ति, आगे-पीछे की तीन पंक्तियों के यात्री और Cabin Crew की भी कोरोना जांच होगी.

सबसे अहम सभी विदेशी यात्रियों को Air Suvidha Portal पर यात्रा से 14 दिन पहले की विस्तृत ट्रैवल हिस्ट्री बतानी होगी और फ्लाइट से पहले 72 घंटे के अन्दर कोरोना की जांच भी करानी होगी. जिन देशों को High Risk की श्रेणी में नहीं रखा गया है, वहां से आने वाले कुल यात्रियों में से 5 प्रतिशत की भी Random Testing होगी. इसका खर्च केन्द्र सरकार खुद उठाएगी. इन यात्रियों के लिए भी 14 दिन का Home Isolation अनिवार्य होगा. समुद्री मार्ग से आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्री भी इस प्रोटोकॉल का पालन करेंगे.

क्या वैक्सीन भी है बेअसर?

कुछ अध्ययन में इस बात की आशंका जताई गई है कि कोरोना का ये नया वैरिएंट इसकी Vaccines को भी बेअसर कर सकता है. दिल्ली के AIIMS अस्पताल के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि इस वैरिएंट के सभी Mutation या बदलाव इस वायरस के Spike प्रोटीन क्षेत्र में हुए हैं. जिससे ये वैरिएंट ऐसी क्षमता विकसित कर सकता है, जिसमें वो शरीर के Immunity System से बच सकता है.

यानी हो सकता है कि वैक्सीन या दूसरी वजहों से पैदा हुई शरीर की प्रतिरोधी क्षमता का उस वायरस पर कम असर या बिल्कुल भी असर नहीं हो. हालांकि ये आंकलन बहुत शुरुआती है और आने वाले दिनों में ही इस पर सही जानकारी मिलेगी. लेकिन एक चीज हम आपको बता सकते हैं और वो हैं इसके लक्षण.

डेल्टा से कैसे अलग हैं लक्षण?

दक्षिण अफ्रीका में 100 लोगों पर हुई एक स्टडी में पता चला कि जो लोग Omicron वैरिएंट से संक्रमित हुए, उन्हें हल्के बुखार और थकान की शिकायत हुई है. Delta Variant में लोगों की सूंघने की क्षमता चली जाती थी और उन्हें खाने का भी स्वाद नहीं आता था. लेकिन इस वैरिएंट में ऐसे लक्षण अब तक नहीं देखे गए हैं. दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने ये भी दावा किया है कि ये वैरिएंट संक्रामक जरूर है लेकिन ज्यादा खतरनाक नहीं है. 

इस वैरिएंट का चीन के साथ भी एक कनेक्शन है. WHO कोरोना के नए Variants को Greek Alphabet के Letters के मुताबिक नाम देता है. Omicron...Greek Alphabet का 15वां लेटर है. इस वैरिएंट के मिलने से पहले WHO इसके 12 Letters का इस्तेमाल कर चुका था और इस हिसाब से उसे नए वैरिएंट को Greek Alphabet के 13वें Letter का नाम देना था. ये 13वां Letter.. NU (नू) था. WHO को लगा कि अगर इस वैरिएंट को ये नाम दिया गया तो इससे Confusion पैदा होगी और लोग इस वैरिएंट के नाम को NU (नू) की जगह New समझ लेंगे.

चीन से क्यों डर गया WHO?

इसलिए इस अक्षर को छोड़ दिया गया. अब ऐसा होने पर उसे इस वैरिएंट का नाम Greek Alphabet के 14वें Letter पर रखना था. लेकिन उसने ऐसा करने से भी मना कर दिया. क्योंकि 14वां अक्षर XI (शी) था. WHO को लगा कि अगर इस नए वैरिएंट को शी नाम दिया गया तो इसे दुनिया चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से जोड़ कर देखेगी और ये बात चीन को नाराज भी कर सकती है. इसी वजह से वैरिएंट के नामकरण के लिए 15वां अक्षर चुना गया, जिसे Omicron कहते हैं. अब सवाल उठता है कि अगर WHO चीन से इतना डरता है, तो एक भयानक महामारी के समय दुनिया इस स्वास्थ्य एजेंसी पर कैसे भरोसा कर सकती है?

WHO के Double Standards को आप एक और उदाहरण से समझ सकते हैं. WHO की तरफ से अब तक जिन वैरिएंट्स को Variant of Concern की सूची में रखा गया है, वो सभी चीन में नहीं मिले हैं. क्योंकि चीन ने कभी ईमानदारी से WHO को ये बताया ही नहीं कि उसके यहां कोरोना का नया वैरिएंट मिला है. WHO ने भी कभी उससे इस बारे में ज्यादा जानकारी हासिल नहीं की. पिछले साल जब Alpha वैरिएंट ब्रिटेन में मिला था, तो ब्रिटेन ने ईमानदारी से इसके बारे में WHO को सूचित किया था. ऐसी ही ईमानदारी भारत ने भी दिखाई, जब यहां Delta वैरिएंट की पहचान हुई. दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने भी सच स्वीकारते हुए ये बताया है कि Omicron का मामला उसके यहां मिला है. इससे आप चीन और इन देशों में अंतर कर सकते हैं और WHO की कार्यशैली को भी जान सकते हैं.

देश में कोरोना का असर हुआ कम

हालांकि एक अच्छी खबर ये है कि भारत में पिछले कुछ दिनों से कोरोना के प्रति दिन मामले औसतन 8 हजार रहे हैं. 28 नवम्बर को पूरे देश में कोरोना से लगभग 8 हजार 300 लोग संक्रमित हुए थे. हालांकि आपको यहां ये समझना होगा कि ये वायरस इंसानों की परीक्षा लेना जानता है. ये वायरस कमजोर पड़ने पर या हारने की स्थिति में अपना स्वभाव बदल लेता है और फिर से खतरनाक हो जाता है. जबकि इंसानों को अपना स्वभाव बदलने में पूरा जन्म लग जाता है और कई मामले में तो लोग अपनी मृत्यु तक भी अपना स्वभाव नहीं बदल पाते.

इस ख़बर से जुड़ा एक लेटेस्ट अपडेट ये है कि भारत सरकार ने मुश्किल की इस घड़ी में South Africa की मदद का फैसला किया है. सरकार वैक्सीन, टेस्ट किट, PPE किट और वेंटिलेटर साउथ अफ्रीका और दूसरे अफ्रीकी देशों में भेजने के लिए तैयार है.

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