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नई दिल्ली: दो दिन पहले आपने दिल्ली की वो तस्वीरें देखी होंगी जिनमें सड़कों पर झरने बह रहे थे और नाव चल रही थीं. इसके बाद अमेरिका के न्यूयॉर्क (New York) में भी उससे भी भयानक मंजर दिखा कि उसे देखने वाले यकीनन दिल्ली की बाढ़ भूल गए होंगे. न्यूयॉर्क सिटी का हाल देख दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) जरूर खुश हुए होंगे. शहर का आलम ये है फिलहाल वहां रिवर राफ्टिंग कर सकते हैं. वाटर स्पोर्ट्स का एडवेंचर का आनंद ले सकते हैं, मेट्रो स्टेशन में झरने देख सकते हैं और ऐसे फ्लाईओवर भी पहली बार देख सकते हैं, जिन्होंने शायद शर्मिंदा होकर जल समाधि ले ली है.
ये हाल उस न्यूयॉर्क का है जहां 10 लाख से ज़्यादा ऊंची और आलीशान इमारते हैं और जहां हमारे देश के कई लोग कम से कम एक बार जाने का सपना जरूर देखते हैं. हमें लगता है कि हमारे शहर और राज्य में बहुत कमियां हैं, लेकिन इस सच्चाई को आपको भी स्वीकार करना होगा कि कैसे न्यूयॉर्क के एक मेट्रो स्टेशन के ट्रैक पर इतना पानी भर गया कि वहां ट्रेन की जगह नाव चलाई जा सकती है. इसी मेट्रो स्टेशन में आप सीढ़ियों पर झरना बहते हुए भी देख सकते हैं.
आपको बता दें कि न्यूयॉर्क की ये हालात IDA (इडा) नाम के उस तूफान ने की जिसने अमेरिका के दक्षिणी और उत्तरी राज्यों में नुकसान पहुंचाया. 250 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आए इस तूफान ने न्यू जर्सी से लेकर न्यूयॉर्क तक सड़कों को नदियों में तब्दील कर दिया. इन रोड पर खड़ी गाड़ियां नदियों में नावों की तरह तैरती नजर आईं.
दुनिया भले इन तस्वीरों से अमेरिकी की सुपर पावर (Super Power) वाली छवि को जज कर रही हो, लेकिन अमेरिका के लोग न्यू यॉर्क की सड़कों पर बने तालाब में एक तैरते बेड (Floating Bed) पर हुक्का पीते हुए नजर आए.
न्यूजर्सी के इंटरनेशनल एयरपोर्ट (International Airport) की तस्वीरों को देख कर कोई भी उसे Amusement Park समझने की गलती कर सकता है. रनवे पर इतना पानी था कि वहां खड़ी गाड़ियां तैरती नजर आईं. अमेरिका में अब तक इस बाढ़ और तूफ़ान से 50 लोगों की मौत हो चुकी हैं. एक अनुमान के मुताबिक इस तूफान से अमेरिका को 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा. देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) का कुल बजट 69 हजार करोड़ रुपये हैं, यानी अमेरिका को इस बाढ़ से जितना नुकसान हुआ है, उतने में दिल्ली का आठ साल का बजट निकल सकता है.
अमेरिका इन हालात के लिए केवल तूफान को जिम्मेदार नहीं बता सकता. अमेरिका खुद को दुनिया की सबसे बड़ी सुपर पावर बताता है. लेकिन सच ये है कि वो ना तो आतंकवाद को रोक पाता है, ना कोरोना का रोक पाता है और ना ही बाढ़ को रोक पाता है और ये हाल तब है, जब इन तीनों मुद्दों पर पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च वो खुद करता है.