DNA ANALYSIS: पश्चिम बंगाल चुनाव में 8 चरणों में वोटिंग का गणित, समझिए किसे होगा इसका फायदा?

West Bengal Assembly Election 2021: ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ये आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने BJP के हिसाब से चुनाव की तारीखों का ऐलान किया है. उन्होंने आठ चरणों में वोटिंग कराने के फ़ैसले का भी विरोध किया. ममता बनर्जी भले चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठा रही हैं लेकिन आज हम आपको ये बताएंगे कि पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में चुनाव होने से क्या होगा? 

DNA ANALYSIS: पश्चिम बंगाल चुनाव में 8 चरणों में वोटिंग का गणित, समझिए किसे होगा इसका फायदा?

नई दिल्ली: आज हम सबसे पहले भारत की शुद्ध देसी राजनीति का विश्लेषण करेंगे और ये राजनीति है चुनावों की. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, तामिलनाड़ु, केरल, असम और केन्द्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में विधान सभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया और इन सभी चुनावों के परिणाम एक साथ 2 मई को आएंगे और हमारा देश इसके लिए पूरी तरह तैयार है. 

भारत की शुद्ध देसी राजनीति 

भारत को अक्सर त्‍योहारों का देश कहा जाता है क्योंकि, यहां हर वर्ष एक हज़ार से भी ज़्यादा त्योहार मनाए जाते हैं.  यानी हर दिन भारत के लोग तीन त्योहार सेलिब्रिट करते हैं और चुनाव भी इन्हीं में से एक है. भारत में हर साल औसतन 5 से 7 विधान सभा चुनाव होते हैं. यानी हर चार महीने में हमारे देश के लोग अपने राज्यों में सरकार बनाने के लिए अपना वोट देकर इस चुनावी त्योहार को सेलिब्रेट करते हैं और इसीलिए हम इसे भारत की शुद्ध देसी राजनीति कह हैं क्योंकि, ये राजनीति चुनावों से जुड़ी है. आज चुनाव आयोग ने जिन राज्यों में इलेक्शन की तारीख़ों का ऐलान किया है, उनमें सबसे महत्वपूर्ण है पश्चिम बंगाल क्योंकि, यहां इस समय ममता बनर्जी की सरकार है और BJP उन्हें सीधी टक्कर दे रही है. इस सीधी टक्कर से देश की राजनीति में कौन सा नया मोड़ आएगा.

साथ ही आज हम आपके उस सवाल का जवाब भी देंगे, जिसका आपको बेसब्री से इंतज़ार रहता है और ये सवाल है कि इन राज्यों में कौन जीत रहा है. तो इस सवाल का जवाब भी आज हमने आपके लिए तैयार किया. लेकिन इसके बारे में बताने से पहले हम आपको इन राज्यों की चुनावी डेटशीट की जानकारी देते हैं.

-पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर आठ चरणों में वोटिंग होगी. पहला चरण 27 मार्च, दूसरा चरण 1 अप्रैल, फिर 6 अप्रैल, 10 अप्रैल, 17 अप्रैल, 22 अप्रैल, 26 अप्रैल और अंतिम चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी.

-असम की 126 सीटों पर तीन चरणों में वोट डाले जाएंगे. पहला चरण 27 मार्च, दूसरा 1 अप्रैल और आख़िरी चरण 6 अप्रैल को होगा. 

-केरल, तमिलनाडु और केन्द्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में 6 अप्रैल को सभी सीटों पर वोटिंग होगी और इन सभी चुनावों के नतीजे 2 मई को आएंगे. 

-इन चार राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेश पुदुचेरी की कुल आबादी को जोड़ दें तो ये संख्या क़रीब 25 करोड़ है. यानी देश की कुल आबादी के लगभग 19 प्रतिशत लोग इन राज्यों में रहते हैं और यहां कुल वोटर्स की संख्या भी 18 करोड़ से ज़्यादा है.

-इनमें पश्चिम बंगाल में TMC की सरकार है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं.

-असम में BJP की सरकार है और मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल हैं.

-पुदुचेरी में कांग्रेस की सरकार थी लेकिन सरकार के अल्पमत में आने के बाद वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है.

-तमिलनाडु में इस समय AIADMK की सरकार है.

-और केरल में लेफ़्ट की सरकार है.

ये राज्‍य BJP के लिए Virgin Islands 

तो ये इन राज्यों की मौजूदा स्थिति है.  यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि 2016 के विधान सभा चुनाव में BJP को इन पांच राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेश में से चार में 3 या उससे कम सीटें मिली थीं. इनमें पुदुचेरी और तमिलनाडु में BJP शून्य पर सिमट गई थी.  इन राज्यों को आप BJP के लिए Virgin Islands भी कह सकते हैं, जहां उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है. 

अगर BJP इन राज्यों में जीत दर्ज करती है तो इससे पार्टी का पूर्वी और दक्षिणी भारत में विस्तार होगा और 2024 के लोक सभा चुनाव में ये राज्य उसके लिए गेम चेंजर बन जाएंगे क्योंकि, इन राज्यों में लोक सभा की कुल 116 सीटें हैं. 

सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि ये सभी राज्य गैर हिन्दी भाषी हैं और BJP को हिन्दी बेल्ट की पार्टी कहा जाता है. अब अगर वो इन राज्यों में अपना वर्चस्व स्थापित कर लेती है तो इससे दो बड़े परिवर्तन आएंगे. 

पहला भारत में BJP का विस्तार उत्तर दक्षिण, पूर्व, पश्चिम यानी चारों दिशाओं में हो जाएगा

और दूसरा परिर्वतन ये कि राष्ट्रीय राजनीति के साथ क्षेत्रीय राजनीति में भी BJP की जड़ें और मज़बूत हो जाएंगी.

यहां एक और बात ये है कि इन चुनावों में अगर नतीजे BJP के पक्ष में आए तो 2024 के आम चुनाव में इन राज्यों की भूमिका अहम हो जाएगी. 

इन चुनावों में कौन जीत रहा है?

आज बहुत से लोगों के मन में ये सवाल भी होगा कि इन चुनावों में कौन जीत रहा है? तो आज हमने इसका जवाब भी आपके लिए तैयार किया है. 

पश्चिम बंगाल में BJP और TMC के बीच सीधी टक्कर है. 2016 के चुनाव में BJP को बंगाल की 294 सीटों में से केवल तीन सीटें मिली थी लेकिन तीन वर्षों के बाद ही ये तस्वीर बदल गई और 2019 के लोक सभा चुनाव में BJP को 42 लोक सभा सीटों में से 18 सीटों पर जीत मिली और उसका वोट प्रतिशत बढ़ कर 40.64 हो गया था। ये TMC को मिले वोट से मात्र 3 प्रतिशत कम है। यानी BJP, TMC के काफी क़रीब पहुंच चुकी है और यही वजह है कि पश्चिम बंगाल में इस बार ममता बनर्जी और BJP के बीच सीधी टक्कर है

असम में इस समय BJP की सरकार है और यहां उसका कांग्रेस से मुक़ाबला है. यानी इन दोनों पार्टियों के बीच असली लड़ाई है. 

तमिलनाडु में इस बार समीकरण काफ़ी उलझे हुए हैं और वहां की राजनीति के दो प्रमुख चेहरे जयललिता और एम करुणानिधि आज हमारे बीच मौजूद नहीं हैं. 5 दिसम्बर 2016 को जयललिता का निधन हो गया था और 2018 में लम्बे समय तक बीमार रहने के बाद एम करुणानिधि की मौत हो गई थी.

यही वजह है कि तमिलनाडु के चुनाव में इस बार कोई बड़ा चेहरा नहीं है और समीकरण काफ़ी उलझे हुए हैं. इस समय राज्य में AIADMK की सरकार है और लोक सभा चुनाव में उसे DMK से बड़े अंतर से हार मिली थी. ऐसे में मुक़ाबला इन दोनों पार्टियों के बीच ही होगा. हालांकि BJP भी इस बार तमिलनाडु में अपना खाता खोल सकती है और उसे भी कुछ सीटें मिल सकती हैं.

केरल में LDF यानी लेफ़्ट की सरकार है और यहां त्रिकोणीय मुक़ाबला होगा. LDF, UDF और BJP के बीच यहां कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी.

बंगाल की पिच पर ममता बनर्जी

अगर बात सिर्फ़ पश्चिम बंगाल की करें तो इस राज्य के चुनाव राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करेंगे और इसकी सबसे बड़ी वजह हैं, ममता बनर्जी.

ममता बनर्जी बंगाल की पिच पर पिछले 10 वर्षों से बैटिंग कर रही हैं और सत्ता में हैं और विपक्ष को भी उनसे काफ़ी उम्मीद है. आप कह सकते हैं कि विपक्ष के पास ममता बनर्जी के रूप में एक बड़ा विकेट अब भी बचा हुआ है क्योंकि, ममता बनर्जी की राजनीति BJP के ख़िलाफ़ ही है. 

ऐसे में अगर चुनाव में ममता बनर्जी हार गईं तो विपक्ष उनके रूप में एक बहुत बड़ा विकेट खो देगा. ऐसी स्थिति में पहले से कमज़ोर हो चुके विपक्ष के पास ज़्यादा खिलाड़ी नहीं बचेंगे और 2024 के आम चुनाव के लिए उसकी राह और भी कठिन हो जाएगी.

2019 के लोक सभा चुनाव में BJP के शानदार प्रदर्शन के बाद से ही विपक्ष इस बात को समझ रहा है और शायद यही वजह है कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस और लेफ़्ट दोनों ही ममता बनर्जी को लेकर नरम रुख़ अपना रहे हैं और हमें लगता है कि ऐसा करना उनकी एक बड़ी मज़बूरी है. हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात ये भी है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जड़ें मज़बूत हैं और ग्रामीण इलाक़ों में TMC का संगठन अब भी शक्तिशाली माना जाता है. ऐसे में BJP के लिए पश्चिम बंगाल में लड़ाई आसान नहीं होगी.

मोदी मैजिक का परीक्षण 

इस समय देश के 17 राज्यों में BJP के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन की सरकार है और अगर इन चार राज्यों में भी BJP जीत जाती है तो ये संख्या 21 हो जाएगी. इन चुनावों के नतीजे ये भी तय करेंगे कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ज़ोर कम हुआ है या फिर ये और तेज़ी से बढ़ रहा है क्योंकि, मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कई ऐसे बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं, जिन पर इन राज्यों की राय अब तक बंटी हुई नज़र आई है.

इनमें सबसे बड़ा उदाहरण है, नागरिकता संशोधन क़ानून, जिसे ममता बनर्जी ने बंगाल में लागू करने से इनकार कर दिया है और BJP इस मुद्दे को चुनाव में भी उठा रही है क्योंकि, इस क़ानून का सबसे ज़्यादा फायदा बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल आए हिन्दू परिवारों को मिलेगा और ममता बनर्जी इस बात को बखूबी समझ रही हैं. यानी मोदी मैजिक का तो परीक्षण होगा ही, साथ ही इस क़ानून का भी ये चुनाव टेस्ट करेंगे.

कृषि कानून पर लोगों की राय को और स्‍पष्‍ट कर देंगे नतीजे 

इसके अलावा इन चुनावों के नतीजों से ये भी तय होगा कि कृषि क़ानून के मुद्दे पर इन राज्यों के लोग क्या सोचते हैं. अब तक किसानों का आन्दोलन एक दो राज्यों तक ही सीमित नज़र आया है और दूसरे राज्यों के किसानों ने इसके ख़िलाफ़ अपना मत नहीं दिया है. इसलिए आप चाहें तो ये कह सकते हैं कि इस चुनाव के नतीजे कृषि कानून पर लोगों की राय को और स्पष्ट कर देंगे.

चुनाव दो विचारधाराओंं के बीच भी

अब आप ये समझिए कि कैसे ये चुनाव असल में दो विचारधाराओं के बीच का भी है. ये राष्ट्रवाद vs उदारवाद की लड़ाई है. एक तरफ BJP है और दूसरी तरफ़ लेफ्ट पार्टियां, ममता बनर्जी और कांग्रेस है. इलेक्शन में 18 करोड़ मतदाता इन दो विचारधाराओं में से एक विचारधारा का सेलेक्शन करेंगे और ये देश के लिए बहुत अहम साबित होने वाला है क्योंकि, इसी से तय होगा कि भारत अब किस ओर बढ़ रहा है और हमारे देश का मूड क्या है. 

8 चरणों में वोटिंग का गणित 

चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ एक नई राजनीतिक परम्परा की भी शुरुआत हुई और ये परम्परा है. इलेक्शन के नतीजों से पहले ही चुनाव आयोग पर सवाल खड़े करना. अब तक हमारे देश के नेता चुनाव में हार के बाद इसके लिए चुनाव आयोग को ज़िम्मेदार ठहराते थे और इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन इनके लिए एक अच्छा बहाना बन जाती थी. लेकिन अब ये परम्परा बदल गई है और इसे बदला है, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने. 

ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ये आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने BJP के हिसाब से चुनाव की तारीखों का ऐलान किया है. उन्होंने आठ चरणों में वोटिंग कराने के फ़ैसले का भी विरोध किया.

ममता बनर्जी की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पूरे देश में चुनाव आयोग पर हमले तेज़ हो गए और कुछ ही घंटों में ये मुद्दा ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा. 

ममता बनर्जी भले चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठा रही हैं लेकिन आज हम आपको ये भी बताना चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में चुनाव होने से क्या होगा? इसे आप संक्षेप में समझिए

2016 में बंगाल में 6 चरणों में चुनाव हुए थे लेकिन नक्सल प्रभावित इलाकों में ख़तरों को देखते हुए तब एक चरण को दो तारीखों में बांट दिया गया था और इस तरह वोटिंग सात चरणों में पूरी हुई थी, लेकिन तब ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर कोई सवाल नहीं उठाया और अब उन्हें इसके पीछे BJP की साजिश नजर आ रही है.

अब आप ये समझिए कि लंबा चुनाव होता है, तो किसे फायदा होगा और छोटा चुनाव होगा तो किसे फायदा होगा?

आठ चरणों में अगर ये चुनाव होता है, तो धीरे-धीरे एक महीने में ये चुनाव होगा और बीजेपी जैसा कि आप जानते हैं कि चुनाव लड़ने वाली मशीन यानी 'वेल ऑयल्‍ड मशीनरी' की तरह काम करती है, चुनाव जितना लंबा खिंचेगा, बीजेपी को उतना ही फायदा होगा. बीजेपी एक बहुत सक्षम चैलेंजर के तौर पर उभर कर सामने आ रही है और बीजेपी की जो रणनीति होगी, वो ये कि पार्टी हर फेज के लिए एक अलग रणनीति लेकर सामने आएगी. जैसे अगर 8 चरण हैं, तो हर फेज के लिए बीजेपी के पास अलग रणनीति होगी. 

इसके साथ ही बीजेपी की रणनीति ये रहेगी कि पश्चिम बंगाल का जो माहौल है, वो धीरे-धीरे करके उबलता चला जाए. पहले चरण में ये उबलना शुरू होगा और 8वें चरण तक इतना उबाल ले लेगा कि बीजेपी को इससे फायदा होने लगेगा. बीजेपी के लिए खास बात ये है भी कि अगर पहले, दूसरे या तीसरे चरण में उनसे कोई गलती होती है, चुनाव ठीक से नहीं लड़ पाते हैं, तो उन्‍हें बीच में ये पता भी लग जाएगा कि कहीं न कहीं चुनाव में उनकी रणनीति गलत जा रही है और पार्टी को इस रणनीति को ठीक करने का मौका बीच में ही मिल जाएगा. इसलिए ये जो लंबा चुनाव है, इसका फायदा बीजेपी को ही मिलेगा. 

अब हम आपको जल्दी से पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताते हैं. 

-इन राज्यों में सबसे ज़्यादा बेरोज़गारी दर केरल में है. ये 9 प्रतिशत है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में 3.9 प्रतिशत, असम में 6.7 प्रतिशत और तमिल नाडु में बेरोज़ागरी दर 6.6 प्रतिशत है. 

-इन चार राज्यों और पुदुचेरी में कुल विधान सभा सीटों की संख्या 824 है जबकि लोक सभा सीटें 116 हैं. 

-पश्चिम बंगाल की कुल आबादी लगभग 10 करोड़ है और सबसे ज़्यादा आबादी के मामले में ये उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार के बाद चौथे स्थान पर है.

-पश्चिम बंगाल में वर्ष 2019 में 12 हत्याओं का कारण राजनीतिक था. इसके अलावा केरल में भी 2019 में राजनीतिक वजहों से चार हत्याएं हुईं थी और यहां अहम बात ये है कि पिछले 6 वर्षों में ये आंकड़ा सबसे ज़्यादा है. 

-और इन राज्यों में पश्चिम बंगाल में 15 से 24 वर्ष के युवाओं की संख्या सबसे ज़्यादा है, ये संख्या 17 लाख है.

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