सिंघु बॉर्डर पर निर्मम हत्या के मामले में निहंग सरवजीत गिरफ्तार, आज होगी कोर्ट में पेशी
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सिंघु बॉर्डर पर निर्मम हत्या के मामले में निहंग सरवजीत गिरफ्तार, आज होगी कोर्ट में पेशी

सिंघु बॉर्डर पर दलित शख्स की निर्मम हत्या करने के मामले में निहंग सरवजीत सिंह को हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. शनिवार को उसे अदालत में पेश किया जाएगा.

सिंघु बॉर्डर पर निर्मम हत्या के मामले में निहंग सरवजीत गिरफ्तार, आज होगी कोर्ट में पेशी

नई दिल्ली: सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर एक शख्स की बेरहमी से हत्या करने के मामले में निहंग सरबजीत सिंह (Nihang Sarabjit Singh) को हरियाणा पुलिस (Haryana Police) ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया. इस वक्त हरियाणा पुलिस सरबजीत का मेडिकल करवा रही है. शनिवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा.

निहंग ने काट दिए थे शख्स के हाथ!

दरअसल, सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनकारियों के मंच के पास से शुक्रवार सुबह एक शख्स का शव मिला था. आरोप है कि सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ का अपमान करने पर निहंगों ने पहले पंजाब के तरन-तारन जिले के चीमा खुर्द गांव का रहने वाले दलित शख्स के हाथ कांटे और फिर उसे बैरिकेड्स पर लटका दिया था. जब पुलिस वहां पहुंची तब तक उस शख्स की मौत हो चुकी थी. सिविल हॉस्पिटल में मृतक का पोस्टमार्टम कराया गया. जिसके बाद पुलिस ने IPC की धारा 302 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की थी.

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निहंग समूह ने ली हत्या की जिम्मेदारी

सिंघु बॉर्डर पर हुए इस मर्डर के बाद आंदोलन में शामिल किसान संगठन और निहंग सिख आमने-सामने दिख रहे हैं. बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के संयुक्त किसान मोर्चा ने इस हत्या से पल्ला झाड़ लिया है. मोर्च के पदाधिकारी और किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि मृतक और निहंग दोनों से ही उसका कोई संबंध नहीं है. SKM ने दावा किया है कि इस हत्या की जिम्मेदारी निहंग समूह निर्वेर खालसा-उड़ना दल ने ली है. निहंग समूह ने एक वीडियो जारी कर बताया कि उन्होंने ही 35 साल के दलित शख्स की हत्या कर दी क्योंकि उसने धार्मिक ग्रंथ का अपमान किया था. 

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11 महीने से जारी है किसानों का प्रदर्शन

देश के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान पिछले साल नवंबर से दिल्ली की तमाम सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन (Farmers Protest) कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं, जिसको लेकर उन्हें डर है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को खत्म कर दिया जाएगा और उन्हें बड़े कॉर्पोरेट की दया पर छोड़ दिया जाएगा. हालांकि, सरकार तीन कानूनों को प्रमुख कृषि सुधारों के रूप में पेश कर रही है. सरकार और किसान संगठनों के बीच 10 दौर से अधिक की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है.

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