क्या न्योता मिलने पर इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में जाएंगे PM नरेंद्र मोदी?

इमरान खान 11 अगस्‍त को पाकिस्‍तान के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे.

क्या न्योता मिलने पर इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में जाएंगे PM नरेंद्र मोदी?
2014 में पीएम मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्‍तान के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ समेत सार्क नेताओं को आमंत्रित किया था.(फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: सीमापार पड़ोसी देश पाकिस्‍तान से खबर आ रही है कि इमरान खान अपने शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित कर सकते हैं. इस खबर के साथ ही कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्‍या पीएम मोदी पाकिस्‍तान जाएंगे? ऐसा इसलिए क्‍योंकि 2014 में पीएम मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्‍तान के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ समेत सार्क नेताओं को आमंत्रित किया था. नवाज शरीफ आए भी थे. उसी पृष्‍ठभूमि में सवाल उठ रहा है कि क्‍या पीएम मोदी पाकिस्‍तान जाएंगे?

हालांकि इससे पहले पीएम मोदी ने सत्‍ता में आने के बाद पाकिस्‍तान से संबंध सुधारने की कोशिश की थी. उस कड़ी में वह अचानक पाकिस्‍तान गए थे. रूस के ऊफा में पीएम मोदी और नवाज शरीफ की मुलाकात हुई थी. उसके बाद 2016 में पाकिस्तान के संगठनों द्वारा किये गये आतंकी हमलों और उड़ी आतंकी हमले की पृष्‍ठभूमि में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारत के लक्षित हमलों (सर्जिकल स्‍ट्राइक) के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में इस कदर तनाव पैदा हो गया कि उसके बाद से दोनों पक्षों के बीच कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है.

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ऐसे में चुनाव जीतने के बाद इमरान खान ने अपने विजयी भाषण में भारत के साथ संबंध सुधारने की बात जरूर कही लेकिन इसके साथ 'कश्‍मीर' का राग भी अलापा. उनके भाषण में देशों की वरीयता सूची में चीन का नाम सबसे ऊपर और भारत का नाम सबसे नीचे था. ऐसे में भारत के साथ 'दोस्‍ती' की उनकी मंशा पर सवाल उठना लाजिमी है. इसके पीछे बहुत बड़ी वजह यह भी है कि पाकिस्‍तान सेना के बारे में कहा जाता है कि वह नवाज शरीफ के पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने के फैसले के खिलाफ थी.

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सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान खान को चुनाव जीतने की बधाई दी.(फाइल फोटो)

यह भी कहा जाता है कि जब नवाज शरीफ यहां आए थे तो उससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री के आमंत्रण को स्‍वीकार करने में उनको कई दिन लग गए थे. माना जाता है कि पाकिस्‍तान सेना इस आमंत्रण को स्‍वीकार करने के खिलाफ थी. लेकिन नवाज शरीफ नहीं माने. यह भी कहा जाता है कि इस एपिसोड के बाद उनके सेना के साथ रिश्‍ते असहज होने शुरू हो गए. माना जाता रहा है कि नवाज शरीफ, भारत के साथ संबंध सुधारने के इच्‍छुक थे लेकिन अपनी सेना के कारण वह ऐसा नहीं कर सके. यह भी कहा जाता है कि भारत के साथ दोस्‍ती की चाह के कारण ही उनको सत्‍ता से बेदखल होना पड़ा. इस पृष्‍ठभूमि में ही पीएम मोदी निमंत्रण मिलने की स्थिति में वहां जाने के बारे में फैसला करेंगे क्‍योंकि इससे पहले पाकिस्‍तान की 'नीयत' को समझना बेहद जरूरी है.

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उल्‍लेखनीय है कि 25 जुलाई को पाकिस्‍तान में हुए आम चुनावों में इमरान खान की पार्टी सबसे बड़ा दल बनकर उभरी है. 'नया पाकिस्‍तान' और 'चेंज' का नारा देने वाले इमरान खान ने इसके बाद सोमवार को घोषणा करते हुए कहा था कि वह 11 अगस्‍त को पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे.

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इस तारीख के ऐलान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को इमरान खान से बात की और उम्मीद जताई कि पड़ोसी देश में लोकतंत्र अपनी जड़ें गहरी करेगा. उसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किए गए एक बयान के अनुसार मोदी ने पाकिस्तान में लोकतंत्र के जड़े गहरी होने की उम्मीद जताई. बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने पूरे क्षेत्र में शांति एवं विकास का अपना विजन भी दोहराया. इस बीच, इस्लामाबाद में खान की पार्टी ने एक बयान में कहा कि खान ने प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाओं को लेकर उनका शुक्रिया अदा किया है.

बयान में इमरान खान के हवाले से कहा गया है, ‘‘संघर्षों का समाधान वार्ता के जरिए निकाला जाना चाहिए.’’ इमरान खान ने पीएम मोदी के साथ अपनी बातचीत में यह सुझाव भी दिया कि पाकिस्तान और भारत की सरकारों को अपने-अपने लोगों को गरीबी के जाल से मुक्त कराने के लिए एक संयुक्त रणनीति बनानी चाहिए. उन्होंने कहा कि संघर्षों का हल करने की बजाय युद्ध और खूनखराबा त्रासदियों को जन्म देंगे.