पिया ने निभाया दुल्हन के शहीद भाई का वादा; बारात बैलगाड़ियों से लेकर आया, US में करता है जॉब
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पिया ने निभाया दुल्हन के शहीद भाई का वादा; बारात बैलगाड़ियों से लेकर आया, US में करता है जॉब

राजनांदगांव जिले के जंगलपुरा गांव में अनोखी शादी हुई. यहां अमेरिका में नौकरी करने वाला दूल्हा अपनी बारात 11 बैलगाड़ियों से लेकर पहुंचा. जिसने भी इस बारात को देखा बस उसे निहाराता ही रह गया. 

पिया ने निभाया दुल्हन के शहीद भाई का वादा; बारात बैलगाड़ियों से लेकर आया, US में करता है जॉब

राजनांदगांवः अब तक आपने अक्सर हेलिकॉप्टर से दूल्हे की बारात ले जाने के कई मामले खूब सुने और देखे होंगे. लेकिन आज हम आपको एक अनोखा मामला बताने जा रहे हैं. जहां अमेरिका में जॉब करने वाला दूल्हा अपनी बारात आधुनिकता के इस दौर में भी बैलगाड़ी से लेकर पहुंचा. राजनांदगांव जिले के अर्जुनी से जंगलपुर गांव तक 11 बैलगाड़ियों में पहुंची इस बारात को जिसने भी देखा बस देखता ही रह गया. 

भाई की इच्छा को बहन ने किया पूरा 
दरअसल, मामला राजनांदगांव जिले के जंगलपुरा गांव से जुड़ा हुआ है. यहां रहने वाले पूर्णानंद साहू आर्मी में थे. लेकिन 2019 में नक्सलियों से लड़ते हुए वे शदीद हो गए. पूर्णानंद साहू का सपना था कि वह अपनी बारात पुरानी छत्तीसगढ़ी परंपरा के तहत बैलगाड़ी से लेकर जाएंगे. लेकिन शादी के पहले ही उन्हें शहादत मिली. लिहाजा पूर्णानंद साहू की बहन ओनिशा ने अपने भाई के सपने को साकार करने का मन बना लिया. पिछले महीने ओनिशा की शादी अर्जुनी के रहने वाले शैलेंद्र साहू के साथ तय गयी. शैलेंद्र अमेरिका में जॉब करता था. ओनिशा ने शैलेंद्र सिंह कहा कि वह अपनी बारात बैलगाड़ी से लेकर उसके घर पहुंचे क्योंकि यह उसके भाई की इच्छा थी. जिसे शैलेंद्र ने भी मान लिया. 

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11 बैलगाड़ियों के साथ पहुंची बारात 
9 दिसंबर को शैलेंद्र अपने घर से 11 बैलगाड़ियों से अपनी बारात लेकर ओनिशा के घर पहुंचा. आधुनिकता विलासता और वैभव  के इस दौर में बैलगाड़ी से निकली इस बारात जिसने भी देखा बस निहाराता ही रहा. दोनों की शादी भी छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुसार ही हुई. जहां कोई बड़ा ताम झाम नहीं दिखा. बल्कि दोनों बड़े सादे अंदाज में शादी की सभी रस्मे पूरी की. 

इस विवाह में खास बात यह भी रही कि दूल्हा शैलेंद्र अमेरिका में जॉब करता. इसके बाद भी उसने अपनी दुल्हन ओनिशा की हर बात मानी और अपनी बारात किसी आलीशान गाड़ी में नहीं बल्कि बैल गाड़ियों में निकाली. बैल गाड़ियों पर निकली इस बारात ने बुजूर्गों को पुराने जमाने की याद दिला दी. शहीद पूर्णानंद के दादा का कहना था कि उनके पौत्र ने अपनी बारात बैलगाड़ी में ले जाने की इच्छा जाहिर की थी. आज उसकी बहन ने उसकी यह इच्छा पूरी कर दी. 

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