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मिलिए 70 साल के जवान से, इनके किस्से आपकी बॉडी में भर देंगे जान

सूर्योदय के साथ घर से निकले योग के ये ऐसे खिलाड़ी हैं जो 'करो योग और रहो निरोग' का संदेश जमाने को दे रहे हैं. वाकई सत्तर साल का ये नौजवान उम्र के आगे हरने को तैयार नहीं है. ये उम्र की परेशानियों को सीधी चुनोती दे रहा है. हम बात कर रहे हैं नरसिंहपुर जिले की करेली तहसील के इस शख्स प्रकाश पेठिया की. जिन्हें कोई रबरमेन कहता तो कोई योगी. 

मिलिए 70 साल के जवान से, इनके किस्से आपकी बॉडी में भर देंगे जान
70 वर्षीय प्रकाश पेठिया, जिन्हें अगर आप योग करते देख लें तो दंग रह जाएंगे.

नरसिंहपुर: जिस उम्र की ढलान पर लोग आराम करते हैं या स्वास्थ्य लाभ लेते हैं उस दौर में भी जब एक 71 साल का शख्स ऐसे करतब करे जिसे करना युवाओं के लिए भी आसान न हो तो इसे अजब-गज़ब ही कहेंगे. योग दिवस (International Yoga day 2019) के मौके पर आइये आखिर हम मिलते हैं ऐसी शख्स से नरसिंहपुर से हमारी इस ख़ास खबर में.

सूर्योदय के साथ घर से निकले योग के ये ऐसे खिलाड़ी हैं जो 'करो योग और रहो निरोग' का संदेश जमाने को दे रहे हैं. वाकई सत्तर साल का ये नौजवान उम्र के आगे हरने को तैयार नहीं है. ये उम्र की परेशानियों को सीधी चुनोती दे रहा है. हम बात कर रहे हैं नरसिंहपुर जिले की करेली तहसील के इस शख्स प्रकाश पेठिया की. जिन्हें कोई रबरमेन कहता तो कोई योगी. 

सुबह होते ही शहर की सड़कों पर इनके साइक्लिंग के कुछ नज़ारे हर किसी को अचरज में डाल देते हैं. सूर्योदय हुआ नहीं की करेली शहर की सड़कों पर करतब दिखता  गुनगुनाता झूमता झुमाता बस निकल पड़ता है. जिस तरह साइकिल से हाथ छोड़कर ये साइकिल पर व्यायाम करते हैं वह किसी अजूबे से कम नहीं, जो पहचानते हैं वे इन्हें झुककर सलाम करते और जो नहीं जानते वे इन्हें जानने की जिज्ञासा करते. 

शहरवासी उन दिनों को भी याद करते हैं जब शहर की सडकें गड्डों से भरी हुई हुआ करतीं थीं पर उन सड़कों पर भी पेठिया का यही अंदाज़ लोगों का दिल जीत लिया करता था. ख़ुद योगाचार्य भी उनकी इस जीवन जीने की कला के मुरीद हैं.

सत्तर साल की उम्र और दिल की धड़कन रोक देने वाले अंदाज़. सड़कों पर दोनों हाथ छोड़ साइकिल चलते प्रकाश पेठिया अपने ही अंदाज में लोगों को योग का पाठ पढ़ा रहे हैं. वे कोई करतब नहीं बताते, बल्कि साइकिल चलाने के दौरान शारीरिक संतुलन और योग का अदभुत नज़ारा पेश करते हैं. साइकिल पर उनकी दिलकश और मस्ताना अंदाज लोगों को प्रेरणा देती है. यही जिन्दादिली है, जिसकी वजह से ये कभी अपने को उम्रदराज ही नहीं मानते. साइक्लिंग के दौरान लोगों के तरह-तरह के ताने इन्हें सुनने भी मिलते, लेकिन इनसे इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. इनका साफ़ कहना है कि मस्ती में जीने का अपना ही मज़ा है. 70 की उम्र रबरमैंन पेठिया का हौसला बाकई काबिले तारीफ है.

पत्नी भी पति के इस अंदाज से खुश है. उनके चमकते दमकते चहरे ये बताते है कि जिंदगी की मुश्किलों को वे पास भी फटकने नहीं देती. इस तरह से साइक्लिंग से पहले डरती रहने वाली उनकी पत्नी अब इसे उनकी पहचान बता रहीं हैं.

इस 70 साल के युवा को देखकर लगता है कि उम्र कभी जीवन जीने की उमंग के आड़े नहीं आती. जिंदादिली से जीवन को जीने की कला  के कारण ही योग के इस करिश्माई अंदाज के बादशाह प्रकाश पेठिया रबरमेन के जजवे को सलाम करने को जी चाहता है.