सेंट्रल जेल में दीक्षांत समारोह: डिप्लोमा व डिग्री लेकर निकलेंगे 220 कैदी, इनमें 30 महिलाएं

जेल एडीजी ने बताया कि प्रशासन का फोकस बंदी गृह के साथ ही सुधारात्मक गृहों पर भी है. इसी के चलते कैदियों को शिक्षा के साथ ही रोजगार की स्किल भी सिखाई जा रही है.

सेंट्रल जेल में दीक्षांत समारोह: डिप्लोमा व डिग्री लेकर निकलेंगे 220 कैदी, इनमें 30 महिलाएं
नेताजी सुभाषचंद्र बोस सेंट्रल जेल, जबलपुर.

जबलपुरः मध्य प्रदेश के नेताजी सुभाषचंद्र बोस सेंट्रल जेल, जबलपुर में बंद कैदी यहां पढ़ाई कर रहे हैं, उनकी परीक्षाएं होती हैं और डिप्लोमा व​ डिग्री लेकर रिहा हो रहे हैं. इस केंद्रीय कारागार में 11 साल पहले शिक्षा केंद्र खुला था. इस बार यहां से कुल 220 कैदी अलग-अलग पाठ्यक्रमों की पढ़ाई पूरी करेंगे. वर्तमान में जेल में बंद कैदियों की परीक्षाएं चल रही हैं, जो 13 मार्च तक समाप्त होंगी. 

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अब तक 1800 कैदी पूरी कर चुके हैं पढ़ाई
जबलपुर सेंट्रल जेल के जेलर गोपाल ताम्रकार ने बताया कि 20 जनवरी 2010 को यहां पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर ओपन यूनिवर्सिटी सेंटर खोला गया था. अब तक 1800 कैदी इस यूनिवर्सिटी से डिग्री और डिप्लोमा प्राप्त कर चुके हैं. इस बार परीक्षा दे रहे 220 कैदियों में 190 पुरुषों के अलावा 30 महिलाएं भी शामिल हैं. वहीं जेल एडीजी ने कहा है कि प्रदेश की अन्य जेलों में भी इस तरह के सेंटर खोले जाएंगे.

8 फरवरी से शुरू हुई परीक्षाएं 13 मार्च तक चलेंगी
इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी सेंट्रल जेल जबलपुर में 2020-21 शैक्षणिक सत्र के लिए 220 कैदियों ने के अलग-अलग पाठ्यक्रमों में एडमिशन लिया था. यहां 8 फरवरी से परीक्षाएं शुरू हुई थीं और 12 फरवरी तक हिंदी, भारत में मानव अधिकार, भोजन एवं पोषण समेत कई विषयों में डिप्लोमा के लिए परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं. इसी तरह के विषयों में डिग्री और बचे हुए डिप्लोमा कोर्स की परीक्षाएं 13 मार्च तक होंगी.

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स्कूल से लेकर कॉलेज लेवल के पाठ्यक्रम की पढाई जारी
जेल अधीक्षक गोपाल ताम्रकर ने बताया कि इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी में स्कूल से लेकर कॉलेज लेवल के पाठ्यक्रम की हैं. कैदियों को रोजगार के लिए स्किल सिखाने के साथ ही बिजनेस की कला भी यहां सिखाई जाती है. साल 2010 में यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई थी. जबलपुर सेंट्रल जेल के इतिहास में 3 अप्रैल 2019 को पहली बार दीक्षांत समारोह (Convocation Ceremony) भी मनाया गया था. तब से ही जेल में दीक्षांत समोराह मनाने की परंपरा जारी है.

बंदीगृह के साथ सुधारात्मक गृहों की ओर रहेगा फोकस
सेंट्रल जेल में आयोजित परीक्षाओं का निरीक्षण करने पहुंचे जेल एडीजी आशुतोष राय का मानना है कि जेलों में इस तरह के शिक्षा केंद्र और भी खोले जाएंगे. मध्य प्रदेश जेल प्रशासन इस वक्त बंदीगृह के साथ ही सुधारात्मक गृहों पर भी फोकस बनाए हुए है. यहां कैदियों को शारीरिक, मानसिक, व्यवसायिक और सामाजिक ट्रेनिंग मिलेगी. जबलपुर सेंट्रल जेल भी अपने कैदियों को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के साथ मिलकर इलेक्ट्रीशियन, रिपेयरिंग, बेकरी जैसे कामों की ट्रेनिंग भी दे रहा है.

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