मध्यप्रदेश के हॉटस्पॉट शहरों में संस्कारधानी का हाल, जानिए जिला प्रशासन की तैयारियों की हकीकत

संस्कारधानी जबलपुर में संक्रमण अपने तेजी से पांव पसार रहा है. हालत यह है कि मध्य प्रदेश के संक्रमित शहरों में जबलपुर हॉटस्पॉट में तब्दील हो चुका है. 

मध्यप्रदेश के हॉटस्पॉट शहरों में संस्कारधानी का हाल, जानिए जिला प्रशासन की तैयारियों की हकीकत

कर्ण मिश्रा/जबलपुर: संस्कारधानी जबलपुर में संक्रमण अपने तेजी से पांव पसार रहा है. हालत यह है कि मध्य प्रदेश के संक्रमित शहरों में जबलपुर हॉटस्पॉट में तब्दील हो चुका है. हर रोज सामने आ रहे संक्रमित मामलों ने जिला प्रशासन की नींद उड़ाई हुई है तो वहीं संक्रमण से लड़ने की व्यवस्थाओं में भी एकाएक तेजी देखी जा रही है. यही वजह है कि वर्तमान में जिले के अंदर 28,282 लोग अभी तक संक्रमित हो चुके हैं, तो वहीं 22,945 लोग अभी तक इस संक्रमण से जंग जीत कर डिस्चार्ज भी किए जा चुके हैं.

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लेकिन बता दें कि 24 घंटे के अंदर सामने आ रहे संक्रमण के मामलों के बाद रिकवरी रेट में गिरावट दर्ज की गई है, जो अब 81.12% पर आ गई है. वहीं इस बीच अभी तक इस संक्रमण ने 338 लोगों की जिंदगी छीन ली हैं. लिहाजा 5820 एक्टिव ऐसे हैं जो संक्रमण से जंग लड़ रहे हैं जिनमें से 2492 पॉजिटिव मरीज ऐसे भी हैं जो होम आइसोलेशन में रहकर अपना इलाज करा रहे हैं. वहीं प्रशासन कई स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा कर रहा है लेकिन हकीकत कुछ औऱ ही निकल कर आ रही है, जानिए...

4000 बेड उपलब्ध (दावा)
बात यदि प्रशासन की व्यवस्थाओं की करें तो दावा किया जा रहा है कि वर्तमान में जिले के अंदर 4000 के लगभग बेड उपलब्ध कराए गए हैं. इसके साथ ही नए कोविड केयर सेंटर भी शुरू किए गए हैं, अभी तक 50 के लगभग हॉस्पिटल कोरोना की जंग में लगातार 24 घंटे सेवा दे रहे हैं. जिनमें शासकीय और निजी अस्पताल शामिल है.

हकीकत
वर्तमान में जिले के अंदर बेड क्षमता तो चार हजार के करीब पहुंचा दी गई है लेकिन हकीकत यह है कि क्षमता आवश्यकता को पूरा नहीं करती है. लोग निजी अस्पताल से लेकर सरकारी अस्पताल की दस्तक दे रहे हैं. कई मरीज सरकारी अस्पताल के बाहर बेड उपलब्धता न होने के चलते दम तोड़ रहे हैं, क्योंकि निजी अस्पताल मोटी रकम मांगते हैं तो वहीं शासकीय अस्पताल में व्यवस्था ही नहीं है.
 
हर रोज 2000 सिलेंडर तैयार हो रहे (दावा)
बात यदि ऑक्सीजन कि की जाए तो शहर के रिछाई स्थित संजीवनी एयर प्रोडक्ट ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो चुका है. जो हर रोज 2000 सिलेंडर तैयार कर रहा है. यहां 25 अप्रैल के बाद कंप्रेसर प्लांट भी शुरू हो जाएगा, जो सीधे खुले आसमान से ऑक्सीजन के सिलेंडर तैयार करेगा. जिसके बाद इस प्लांट की क्षमता 2800 सिलेंडर प्रति दिन हो जाएगी. इसके अतिरिक्त प्रदेश के मुखिया सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा शेष ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए राउरकेला के प्लांट का शहर के आदित्य ऑक्सीजन प्लांट के साथ अनुबंध कराया है. जिसके बाद 10 टन लिक्विड ऑक्सीजन प्रतिदिन शहर को उपलब्ध हो सकेगी. ऐसे में शहर के अंदर ही नहीं बल्कि संपूर्ण महाकौशल में ऑक्सीजन की कमी को दूर किया जा सकेगा.

हकीकत
शहर में हुई ऑक्सीजन की कमी के चलते मौत के बाद सियासी खींचतान देखने को मिली है. ऑक्सीजन के प्लांट आनन-फानन में तैयार किए गए है. लिक्विड ऑक्सीजन भी मंगवाई गई लेकिन ऑक्सीजन वितरण के लिए आवश्यक सिलेंडरों की पूर्ति जिला प्रशासन के पास उपलब्ध ही नहीं है. मरीज के परिजन खुद खाली सिलेंडर को रिफिल करवाने प्लांट पर पहुंच रहे हैं और अपने ही खर्चे पर अस्पताल तक ले जा रहे हैं.

सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी लगाई
प्रशासन ने सभी व्यवस्थाओं को मजबूती देने के लिए शहर के सभी प्रशासनिक अमले के साथ तहसीलदार पटवारी और शासकीय शिक्षकों की ड्यूटी भी कोविड केयर में लगाई है. इनके कंधों पर हॉस्पिटल मैं बेड की उपलब्धता, इंजेक्शन का स्टेटस, मरीजों से अधिक बिल की वसूली पर नियंत्रण जैसी तमाम व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी दी गई है. जिसका हर घंटे का स्टेटस कलेक्टर जबलपुर को दिया जा रहा है.

हकीकत
होम आइसोलेशन में भर्ती मरीजों पर निगरानी रखने के लिए जिन जिम्मेदारों को नियुक्त किया गया है, वह खुद में ही मशगूल नजर आए हैं. यही वजह है कि होम आइसोलेशन में जिन नियमों का कड़ाई से पालन किया जाना है, वह नहीं किया जा रहा और संक्रमण की रफ्तार तेज हो रही है.

रेमेडिसिविर इंजेक्शन मंगवाएं
जबलपुर में कुछ दिन पहले तक रेमेडिसिविर इंजेक्शन की मारामारी देखी जा रही थी. जिसके बाद बीती 15 अप्रैल को 1872 इंजेक्शन तो वहीं रविवार 18 अप्रैल को 813 इंजेक्शन हवाई जहाज के जरिए सीधे इंदौर से पहुंचाए गए, ताकि कोरोना संक्रमित मरीजों को इस इंजेक्शन का लाभ मिल सके.

हकीकत
वर्तमान में यदि बात रेमेडिसिविर इंजेक्शन कि की जाएं तो जिले के 50 से ज्यादा अस्पतालों में कोविड संक्रमित मरीजों का इलाज किया जा रहा है. ऐसे में जितनी डिमांड इंजेक्शन की की जा रही है उतनी डिमांड पूरी नहीं हो पा रही है. प्रशासन ने इंजेक्शन वितरण के लिए नोडल अधिकारी तक नियुक्त कर दिए हैं लेकिन उसके बावजूद भी इंजेक्शन वितरण की व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ी हुई है. जिले में इंजेक्शन उपलब्ध ही नहीं हो पा रहे हैं. अस्पताल प्रबंधन मरीज के परिजनों को इंजेक्शन लाने के लिए दबाव डालता है जबकि इंजेक्शन की उपलब्धता की जानकारी देने के लिए जो नंबर और अधिकारी नियुक्त किए गए हैं वह फोन ही नहीं उठाते हैं या अपना नंबर बंद रखते हैं.

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जबलपुर में कोरोना के कुछ आंकडें

जिले द्वारा अभी तक भेजे गए कुल सैंपल 400900
कुल संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 28282
डिस्चार्ज किए गए व्यक्तियों की संख्या 22945
रिकवरी रेट 81.12%
कुल मौत 338
बचे हुए एक्टिव केस 5820
होम आइसोलेशन में पॉजिटिव मरीजों की संख्या 3492
सस्पेक्टेड व्यक्तियों की संख्या 1970
कुल कंटेनमेंट 34

दावा
जिला प्रशासन ने आम लोगों की सुविधा के लिए 3 कोविड-19 कंट्रोल रूम भी तैयार किए गए हैं जिन पर संपर्क करके करुणा के महामारी के दौर में हर तरह की मदद ली जा सकती है

कोरोना कंट्रोल एंड कमांड सेंटर
0761 2637500
0761 2637505

जिला चिकित्सालय विक्टोरिया
0761 2620020
0761 2621 650

मेडिकल कॉलेज
0761 267 9007
0761 2679 008
मोबाइल नंबर 8103707025

हकीकत
प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं लेकिन उन्हें कोई रिसीव नहीं करता है. कभी मोबाइल स्विच ऑफ तो कभी लगता ही नहीं है. लोग जानकारी जुटाने या मरीज की जानकारी लेने के लिए दर-दर भटकते नजर आते हैं.

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