MP: दुबई में अकाउंटेंट की नौकरी छोड़ वापस आए भारत और करने लगे रामलीलाओं का मंचन

रतलाम में इन दिनों हर साल की तरह धर्मिक स्थल त्रिवेणी पर मेले का आयोजन हो रहा है. इस 11 दिवसीय मेले में रोज नगर निगम के मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं.

MP: दुबई में अकाउंटेंट की नौकरी छोड़ वापस आए भारत और करने लगे रामलीलाओं का मंचन

चन्द्रशेखर सोलंकी/रतलाम: मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों में डॉल्बी डिजिटल साउंड के साथ फिल्में देखने के इस दौर मे नाट्यमंच पर रामलीला देखना शायद ही कोई इस बारे में सोचता होगा. लेकिन, इस तकनीकी दौर में भी भारत की प्राचीन नाट्यमंच परंपरा को संजोए रखने के लिए न सिर्फ कोशिशें की जा रही हैं. बल्कि, कुछ भारतीय विदेश की चकाचौंध को छोड़कर वापस भारत आकर मेले में रामलीला का नाट्यमंचन कर रहे हैं. आइए आपको मिलाते हैं चतुर्वेदी परिवार से, जो 4 पीढ़ियों से इस रामलीला का नाट्यमंचन कर इस प्राचीन संस्कृति को संजोए रखने की हर कवायद कर रहे हैं.

रतलाम में इन दिनों हर साल की तरह धर्मिक स्थल त्रिवेणी पर मेले का आयोजन हो रहा है. इस 11 दिवसीय मेले में रोज नगर निगम के मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं. इसी कड़ी में त्रिवेणी मेले में निगम के मंच पर रामलीला का भी आयोजन हुआ. रंगबिरंगी चमचमाती ड्रेस में ज्वेलरी के साथ अलग-अलग पात्रों के रूप में ढले लोग जोर-जोर से अपने डायलॉग बोलते हुए नजर आये. मथुरा से रतलाम में आई रामलीला की इस टीम में चतुर्वेदी परिवार 4 पीढ़ियों से रामलीला का नाट्यमंचन कर रहा है. मथुरा के पंडित विनोद बिहारी का परिवार 4 पीढ़ियों से रामलीला नाट्यमंचन कर रहा है. विनोद बिहारी चतुर्वेदी के पुत्र विवेक चतुर्वेदी भी विदेश में अपनी नौकरी छोड़कर वापस भारत आ गए और पिता के साथ रामलीला में लग गए.

विवेक चतुर्वेदी दुबई में एक कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर कार्य करते थे. लेकिन, जब उन्हें जानकारी लगी कि पिता अकेले अपनी श्री राजाधिराज कला रामलीला मंडली को संभाल पाने में असमर्थ हैं तो, विवेक पिता की मदद कर रामलीला मंडली को व्यवस्थित चलाने के लिए दुबई में नौकरी छोड़ वापस मथुरा आ गए. इसके बाद पिता के साथ रामलीला में लग गए.

विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि 4 पीढ़ी से उनके परिवार के लोग रामलीला नाट्यमंच करते आ रहे हैं. होश संभालते ही 35 साल के विवेक चतुर्वेदी भी इस कार्य से जुड़ गए. लेकिन, पिता पंडित विनोद ने उन्हें उच्च शिक्षित कर दुबई में एक कम्पनी में अकाउंटेंट के पद पर नौकरी भी दिलवाई. लेकिन, खानदानी कार्य रामलीला को अकेले पिता के द्वारा नही संभालने के कारण बंद होते देख विवेक ने दुबई से वापस भारत लौट आए. इसके बाद रामलीला नाट्यमंचन को सुचारू चलाने का फैसला लिया. 

3 साल पहले विवेक वापस दुबई से भारत लौट आए और पिता के साथ रामलीला को दोबारा गति दी. विवेक ने बताया कि समय के साथ अब लोगों का इससे रुझान कम होने लगा है. लेकिन, हाल ही में अयोध्या राम मंदिर फैसला आने के बाद रामलीला नाट्यमंचन  की डिमांड वापस बढ़ी है. वहीं, महंगाई के बढ़ते इस कार्य मे ज्यादा इनकम नहीं होने से अन्य लोग इस काम को बंद कर अपने अलग-अलग व्यवसाय में लग गए हैं. इस कारण अब इस रामलीला मंडली को चलाने के लिए उनके परिवार के सदस्य ही इसमें शामिल हैं.
 
(संपादन - लोकेंद्र त्यागी)