बस्तर के नक्सलियों को गांधीवादी रास्ते पर लाने की मुहिम में 2 अक्टूबर से पदयात्रा शुरू

नक्सलियों को गांधीवादी रास्ते पर लाने की मुहिम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150वीं जयंती के मौके पर छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश की सीमा चेट्टी से शुरू होने जा रही है.

बस्तर के नक्सलियों को गांधीवादी रास्ते पर लाने की मुहिम में 2 अक्टूबर से पदयात्रा शुरू
प्रतीकात्मक तस्वीर

रायपुर: भारत के लिए आतंरिक समस्या खड़ी करने वाले नक्सलियों को गांधीवादी रास्ते पर लाने की मुहिम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150वीं जयंती के मौके पर छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश की सीमा चेट्टी से शुरू होने जा रही है. इस दौरान लम्बे समय से हिंसा का रास्ता अख्तियार किये नक्सलियों को महात्मा गांधी के अहिंसा के रास्ते पर लाने लिए गांधीवादियो विचारो के अनुयायी विचार-विमर्श करेंगे . गांधीवादी उसी रास्ते से लाल के गढ़ दंडकारण्य में पदयात्रा की शुरुआत करेंगे जिससे 1980 के दशक में नक्सलियों ने वहां प्रवेश किया था.

देश के मध्य पूर्व भाग में स्थित हैं दंडकारण्य , फिलवक्त नक्सलियों का इस इलाके  है दबदबा .
गांधीवादी चेट्टी के गांधीवादी आश्रम से होते हुए जगदलपुर तक पदयात्रा करेंगे। 13 अक्टूबर को यात्रा के समापन के दौरान वहां एक सभा को भी सम्बोधित करेंगे.. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इस साल जून के महीने में हुयी एक बैठक के दौरान पदयात्रा की शुरुआत के बाबत निर्णय लिया गया था. गांधीवादियो का कहना है की 20 सालों से जारी नक्सली हिंसा की वजह से हजारों बेगुनाहो को अपनी जान गंवानी पड़ी है.अब देश को अहिंसा के सिंद्धात पर आजादी दिलाने वाले महात्मा गांधी के अनुयायी नक्सलियों के गढ़ में जा कर उन्हें हिंसा छोड़ने की भी अपील करेंगे. 

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फिलवक्त इस इलाके में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच लगातार मुठभेड़ चल रहा हैं. लाल के आतंक का गढ़ बने इस इलाके में इन संघर्षो की वजह से खामियाजा यहां बसें आदिवासी समुदाय को उठाना पड़ रहा है.