'बाबा का ढाबा' को मिला 'मैनेजर', जानें कितने बदल गए कांता प्रसाद के दिन

वीडियो वायरल होने के 20 दिन बाद ही बाबा का ढाबा से भीड़ गायब हो गई है. अब इक्का-दुक्का लोग ही यहां खाना खाने आते हैं. कुछ यहां सेल्फी लेने चले आते हैं. 

पूजा मक्कड़ | Oct 23, 2020, 20:05 PM IST

नई दिल्ली: मालवीय नगर वाला 'बाबा का ढाबा' तो आपको याद ही होगा. नारंगी टीशर्ट में खाने का एक स्टॉल चलाते 80 वर्षीय कांता प्रसाद बुजुर्ग की तस्वीरें 8 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं. रोते हुए बाबा ने बताया था कि लॉकडाउन में उनका गुजारा भी मुश्किल हो गया है.

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रातों रात फेमस हुआ बाबा का ढाबा

वीडियो वायरल होते ही दिल्ली की दरियादिली भी उमड़ पड़ी. बाबा के ढाबे का मटर पनीर, चावल और रोटी पूरी दिल्ली के ढाबों पर भारी पड़ गई. कुछ खाने वाले, कुछ फोटो खिंचाने वाले और कुछ दया और दान के नाम पर अपनी छवि चमकाने वाले, कुल मिलाकर कई लोगों ने मालवीय नगर के फुटपाथ पर बने इस छोटे से स्टॉल पर भीड़ लगा दी.

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कुछ ही दिन बाद भीड़ गायब

लेकिन अब हालात वैसे नहीं हैं. भीड़ गायब हो चुकी है. अभी अक्टूबर का महीना खत्म नहीं हुआ है, लेकिन 20 दिन बाद ही बाबा का ढाबा से भीड़ गायब हो गई है. अब इक्का-दुक्का लोग यहां खाना खाने आते हैं. कुछ यहां सेल्फी लेने चले आते हैं. 

 

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कम हुआ कांता प्रसाद का स्टार्डम

सोशल मीडिया स्टार बन चुके 80 वर्ष के कांता प्रसाद और उनकी पत्नी बादामी देवी का स्टारडम अभी थोड़ा कम हुआ है लेकिन फिर भी काम चलाऊ काम कर रहा है. अब वहां खाना खाने वाले कम और वीडियो और सेल्फी के शौकीन ज्यादा नजर आते हैं.

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मदद का आश्वासन दे गायब हुए लोग

बॉलीवुड, खेल और राजनीति से जुड़े कई लोगों ने ट्विटर पर बाबा की मदद करने की बात की. हालांकि लगभग 20 दिन बीतने के बाद जब हमने बाबा से बात की तो उनका कहना है कि अब हालात पहले जैसे ही हो गए हैं. 

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कंपनियों ने भी खींचा हाथ

यहां तक कि कई ऑनलाइन फूड सप्लाई ऐप और कुछ कंपनियों ने उनके ढाबे पर अपने बोर्ड लगाए, लेकिन अब वो भी अब हटा दिए गए हैं.

 

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किसी को हमदर्दी नहीं

बाबा का कहना है कि किसी कंपनी को उनसे हमदर्दी नहीं थी, सभी को अपने ब्रांड को चमकाने का लालच था. हालांकि पहली बार वीडियो बनाकर उसे वायरल करने वाले ब्लॉगर का शुक्रिया करते हैं.

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मदद के लिए आगे आया शख्स

इस बीच बॉलीवुड की कुछ हस्तियों का पब्लिक रिलेशंस देखने वाले एक युवा ने खुद को उनका मैनेजर बना लिया है. बाबा को डिजीटल दुनिया में बने रहने के लिए मदद की जरुरत थी और इस काम में अब एक नौजवान उनकी मदद कर रहा है.

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बाबा का ढाबा को मिला 'मैनेजर'

बाबा के मैनेजर तुशात अदलखा का कहना है कि ये काम वो मदद के मकसद से ही कर रहा है. इसके बदले में उसे कुछ नहीं चाहिए. 

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बाबा को नहीं मिली कोई मदद

वैसे बाबा ये भी कहते हैं कि सोशल मीडिया पर उन्हें लाखों की मदद का दावा करने वाले तमाम लोग सिर्फ बातें करके गायब हो गए. उन्हें असल में कोई विशेष मदद नहीं मिली है.