दिल्ली-NCR: प्रदूषण फैलाने वालों की अब खैर नहीं, लग सकता है 1 करोड़ का जुर्माना

दिल्ली-NCR में प्रदूषण फैलाने की अब भारी कीमत चुकानी होगी. राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार के आयोग गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. आयोग के पास दोषियों पर एक करोड़ तक का जुर्माना लगाने का भी अधिकार होगा.  

दिल्ली-NCR: प्रदूषण फैलाने वालों की अब खैर नहीं, लग सकता है 1 करोड़ का जुर्माना
फाइल फोटो

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर और इससे सटे राज्यों में गंभीर होते वायु प्रदूषण (Air Pollution) से निपटने के लिए आयोग के गठन को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने मंजूरी दे दी है. यह आयोग केंद्र सरकार की देखरेख में काम करेगा और इसमें कुल 17 सदस्य होंगे.  

पांच साल की सजा का प्रावधान
पर्यावरण संरक्षण के लिए आयोग द्वारा बनाए गए नियम-कानूनों को 30 दिन के अदर या तुरंत संसद में प्रस्तुत किया जाएगा. संसद के पास आयोग द्वारा बनाए गए नियमों में बदलाव का अधिकार होगा. इस आयोग के पास दोषियों को 5 साल तक सजा देने और 1 करोड़ तक जुर्माना लगाने जैसे अधिकार होंगे. आयोग के आदेशों को सिर्फ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ही चुनौती दी जा सकेगी.  

EPCA की लेगा जगह
आयोग में अध्यक्ष के साथ-साथ केंद्र सरकार, एनसीआर के राज्यों के प्रतिनिधि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और इसरो के भी प्रतिनिधि शामिल होंगे. यह आयोग पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण एवं संरक्षण प्राधिकरण (EPCA) की जगह लेगा. मालूम हो कि ईपीसीए का गठन सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदूषण के मामलों में सर्वोच्च निगरानी निकाय के रूप में किया गया था.

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क्या होंगे अधिकार?
आयोग के पास प्रदूषण संकट समाप्त करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने, शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करने और बिजली आपूर्ति रोकने का अधिकार होगा. इसके अलावा, आयोग के कार्य में बाधा पहुंचाने और उसके  नियमों का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. दोषियों को 5 साल तक के कारावास और 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना लगाने का अधिकार भी आयोग के पास होगा.

क्या होगा फायदा? 
जानकारी के अनुसार, आयोग के अस्तित्व में आने के बाद EPCA सहित तमाम समितियों और टास्क फोर्स को समाप्त कर दिया जाएगा. अक्सर वायु प्रदूषण को लेकर गठित अलग-अलग समितियों में समन्वय नहीं बन पाता, जिसका खामियाजा पर्यावरण को उठाना पड़ता है. चूंकि आयोग के आने के बाद इन सभी को खत्म कर दिया जाएगा, उम्मीद की जा रही है कि समन्वय के अभाव की समस्या भी खत्म हो जाएगी.  

तीन साल का कार्यकाल
आयोग का अध्यक्ष केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा और उसका कार्यकाल तीन साल का होगा. यदि अध्यक्ष का नाम भ्रष्टाचार से जुड़ता है या वह अपने पद का दुरुपयोग करते पाया जाता है, तो उसे हटाने का अधिकार भी केंद्र के पास होगा. आयोग का मुख्यालय दिल्ली में होगा. इसमें दिल्ली, हरियाणा, यूपी, पंजाब और राजस्थान के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.