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राजस्थान विधानसभा में हंगामें की भेट चढ़ा प्रश्नकाल, धरने पर बैठे विधायक

प्रश्नकाल में सोमवार को 25 सवाल लिस्टेड थे लेकिन प्रश्नकाल में 8 सवालों के ही जवाब आये जबकि 17 सवाल तो विधायकों न पूछे ही नहीं. 

राजस्थान विधानसभा में हंगामें की भेट चढ़ा प्रश्नकाल, धरने पर बैठे विधायक
दूसरे ही सवाल के जवाब के दौरान मंत्री विश्वेंद्र सिंह के रवैया पर विपक्ष उखड़ गया.

जयपुर: विधानसभा में 2 दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को कार्यवाही एक बार फिर से शुरू हुई लेकिन प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया. प्रश्नकाल में सोमवार को 25 सवाल लिस्टेड थे लेकिन प्रश्नकाल में 8 सवालों के ही जवाब आये जबकि 17 सवाल तो विधायकों न पूछे ही नहीं. दूसरे ही सवाल के जवाब के दौरान मंत्री विश्वेंद्र सिंह के रवैया पर विपक्ष उखड़ गया.

दरअसल सवाल पूर्व मंत्री और बीजेपी के विधायक कालीचरण सराफ ने लगाया था. सराफ ने पर्यटन विभाग की होटेल्स को रखरखाव के लिए निजी हाथों में देने के साथ ही गढ़ और किलों को पीपीपी मोड पर संचालित करने को लेकर सवाल पूछा था. विश्वेंद्र सिंह ने इसका जवाब देते हुए कहा कि अभी सरकार निजी हाथों में देने या पीपीपी मोड पर चलाने की कोई मंशा नहीं रखती है. 

इस पर सराफ ने पूरक प्रश्न पूछते हुए 29 अप्रैल 2019 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस संदर्भ की मीटिंग का जिक्र किया तो पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने साफ किया कि पर्यटन विभाग की अलग-अलग इकाइयों को निजी हाथों में या पीपीपी मोड पर संचालित करने की योजना पूर्वर्ती बीजेपी सरकार की थी. विश्वेन्द्र सिंह ने कहा कि जून 2015 में बीजेपी सरकार ने इस पर काम शुरू किया था. इसके साथ ही विश्वेंद्र सिंह ने कालीचरण सराफ पर चुटकी लेते हुए कहा कि वे यह भी जानना चाहते हैं कि इस सवाल को पूछने के पीछे आखिर कालीचरण सराफ की मंशा क्या है?

मंशा की बात विश्वेंद्र सिंह ने चुटकी भरे अंदाज में कही और इसको लेकर सदन में कालीचरण सराफ के साथ ही नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने नाराजगी जताई. इस दौरान बीजेपी सदस्य ने एतराज जताया लेकिन स्पीकर ने प्रश्न का जवाब पूरा आया हुआ मानकर अगले सवाल के लिए विधायक छगन सिंह का नाम पुकार लिया. इस पर नेता प्रतिपक्ष ने पूरे मामले में दखल देना चाहा लेकिन स्पीकर ने अगले सवाल का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष को इजाजत नहीं दी. मंत्री की तरफ से सवाल के पीछे की मंशा और उसके बाद स्पीकर के रवैये को लेकर विपक्ष उखड़ गया और सदन के वेल में आकर नारेबाजी करने लगे.

हंगामे और नारेबाजी के बीच ही मंत्री अगले सवालों के जवाब देते रहे. इस दौरान उत्तर पूरा होने पर स्पीकर ने अगले प्रश्नकर्ता का नाम पुकारा. इस बीच बीजेपी के कुछ विधायकों ने वेल में नारेबाजी के दौरान ही अपना प्रश्न बोला, लेकिन स्पीकर ने वेल से सवाल पूछने की इजाजत नहीं दी. उन्होंने कहा कि अगर किसी विधायक को सवाल पूछना है तो वह अपनी सीट पर जाकर ही सवाल पूछ सकता है. इस दौरान पूरे प्रश्नकाल में बीजेपी के विधायकों ने हंगामे के बाद एक भी सवाल नहीं पूछा. 

उधर इस पूरे मामले पर विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष की मंशा में खोट था और विपक्ष खुद प्रश्नकाल नहीं चलाना चाहता था, इसलिए हंगामा किया गया. पर्यटन मंत्री ने कहा कि सवाल के जवाब को लेकर कालीचरण सराफ ने उन पर सदन को गुमराह करने के आरोप लगाए थे. इसी को लेकर उन्होंने सराफ से अपने आरोपों के पीछे की मंशा पूछी थी. विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि उनकी बात को विपक्ष ने गलत तरीके से लिया और अपने मतलब के लिए हंगामा किया.

15 वी विधानसभा में यह पहला मौका था जब प्रश्नकाल पूरे 1 घंटे भी नहीं चला.  34 मिनट तक चले प्रश्नकाल में 8 सवालों के जवाब आए जबकि 17 सवाल विधायकों ने मौजूद रहने के बावजूद पूछे ही नहीं. ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सिर्फ मूंछ की लड़ाई की खातिर प्रश्नकाल को हंगामे की भेंट चढ़ा दिया गया? सवाल यह भी कि क्या सरकार और विपक्ष प्रश्नकाल के बाकी रहे 26 मिनट में इस मसले को सुलझाकर जनहित के कुछ और सवालों पर चर्चा नहीं कर सकते थे?

(इनपुट- भरतराज, शशि मोहन)