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बारां: बड़े पैमाने पर हो रहा अवैध बजरी खनन, माइनिंग विभाग और पुलिस नदारद

अवैध खनन को लेकर माइनिंग विभाग और मांगरोल पुलिस पर मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं लेकिन अपनी छवि को सुधारने का प्रयास दोनों विभाग द्वारा नहीं किया गया है. 

बारां: बड़े पैमाने पर हो रहा अवैध बजरी खनन, माइनिंग विभाग और पुलिस नदारद
प्रतीकात्मक तस्वीर

बारां: समूचे राजस्थान में ही नहीं बल्कि गोपालनमंत्री प्रमोद जैन के विधानसभा क्षेत्र अंता- मांगरोल में भी अवैध बजरी खनन का खेल बड़े पैमाने पर खेला जा रहा है. जहां माइनिंग विभाग और पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है. सुप्रीम कोर्ट की रोक होने के बावजूद क्षेत्र में होकर निकल रही पार्वती नदी और बनास में से लंबे समय से अवैध खनन का खेल बदस्तूर चल रहा है. जहां नदी से बड़ी मात्रा में अवैध बजरी और पत्थर निकाल कर लाए जा रहे हैं. जगह-जगह सड़कों के किनारे लगे काली बजरी के बड़े बड़े ढ़ेर इसके पुख्ता सबूत हैं. सत्ता परिवर्तन के बाद मध्यप्रदेश सीमा पार से भी बनास के ट्रकों की एंट्री राजस्थान सीमा में शुरू हो गई है. जिनसे भारी भरकम राशि एमपी बॉर्डर पर ही लिए जाने के समाचार हैं. इससे सरकार को राजस्व की हानि तो हो ही रही है, साथ ही इसका बोझ आमजन पर भी भारी पड़ रहा है. 

देर रात 12 बजे के बाद रोजाना सुबह 9 बजे तक दर्जनों बनास की बजरी से भरे ट्रक एसडीएम कार्यलय और थाने के आमने सामने होकर बारां-सीसवाली की ओर निकलते हैं, जिन्हें कोई रोक-टोक नहीं रहा है. इटावा की ओर जाने वाले बनास की बजरी से भरे ट्रक वैकल्पिक मार्ग झोपड़ियां, भगवानपुरा बस्ती से होकर निकल रहे हैं. भारी भरकम वाहनों के कारण नगर पालिका की नवनिर्मित सड़के भी टूट चुकी हैं, जिसकी परवाह नगर पालिका को भी नहीं है. अवैध खनन को लेकर माइनिंग विभाग और मांगरोल पुलिस पर मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं लेकिन अपनी छवि को सुधारने का प्रयास दोनों विभाग द्वारा नहीं किया गया है. 

खान व गोपालनमंत्री प्रमोद जैन के विधानसभा क्षेत्र में भी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं. जहां बारां जिले में तैनात कलेक्टर और एसपी भी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना नहीं करवा पा रहा हैं. कहनें को तो एक दिन पहलें पुलिस, प्रशासन ओर खनन विभाग ने जिलें के अधिकारीयों की बैठक लेकर कड़् निर्देश दिए लेकिन बैठक और निर्देश ढाक के तीन पात नजर आ रहें है
जब खान मंत्री की विधानसभा के ही यह हाल है तो राजस्थान के तो और बुरे हाल होंगे.

अवैध बजरी और पत्थर पर हो रही वसूली आमजन पर ही भारी पड़ रही है. कभी 800 से 1000 रुपये में डाली जाने वाली बजरी 2500 से 3000 व 1000 से 1200 में डाली जाने पत्थर से भरी ट्रॉली 2000 से 2500 में तथा बनास का ट्रक 50 हजार रूपयें में डाली जा रही है. जिसका सीधा असर आमजन पर पड़ रहा है.