झमाझम बारिश के बाद खिले Dholpur के किसानों के चेहरे, बोले- पानी नहीं, अमृत बरसा है

बता दें कि पिछले लंबे समय से बारिश नहीं होने से आमजन के साथ जिले का किसान भारी परेशानी में दिख रहा था.

झमाझम बारिश के बाद खिले Dholpur के किसानों के चेहरे, बोले- पानी नहीं, अमृत बरसा है
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Dholpur: जिले में पिछले लंबे समय बाद हुई मूसलाधार बारिश (Rain) से आमजन को उमस भरी गर्मी से राहत के साथ खरीफ फसल के लिए लाभकारी माना जा रहा है. जिन किसानों की खरीफ फसल की बुवाई छूट गई थी, वह अब बुबाई को अंजाम देंगे. वहीं, जिन किसानों की खड़ी फसल खेतों में उगकर खड़ी है, उनके लिए बारिश का होना अमृत के समान माना जा रहा है.    

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बता दें कि पिछले लंबे समय से बारिश नहीं होने से आमजन के साथ जिले का किसान भारी परेशानी में दिख रहा था. तालाब बांध और पोखरों में पानी नहीं होने से लोग काफी परेशान थे और उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया था. आमजन के साथ पशु-पक्षियों पर भी भारी असर देखा जा रहा था. 

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बारिश किसानों की दृष्टि से लाभकारी मानी जा रही है. 15 जून से 15 जुलाई तक बरसाती फसल का सीजन रहता है. पूर्व में हुई बारिश से जिले के कुछ इलाकों में खरीफ फसल की बुवाई हो चुकी थी लेकिन बाड़ी, सरमथुरा, बसेड़ी एवं सैंपऊ उपखंड के कुछ क्षेत्रों के काश्तकार बारिश नहीं होने के कारण बुवाई से वंचित रह गए थे. ऐसे में जो किसान खरीफ फसल बुवाई से बंचित रह गए थे, उनके लिए बारिश का होना भारी लाभकारी माना जा रहा है. उसके साथ ही पूर्व में बुवाई कर चुके किसानों की फसल खेतों में खड़ी हुई थी. 

क्या कहना है किसानों का
तेज धूप से बाजरा, दलहन, तिलहन, ग्वार, ज्वार की फसल सूखने के कगार पर पहुंच रही थी. जिसे लेकर किसान भारी परेशानी में दिख रहा था लेकिन हुई बारिश किसानों के लिए अमृत बनकर बरसी है. बरसाती फसल के लिए बारिश का होना भारी लाभकारी माना जा रहा है. मुरझाई हुई फसल के पौधों में बारिश से जान लौट आएगी हालांकि किसानों ने बताया फसल की दृष्टि से अभी बारिश काफी कम है. खरीफ फसल की बुवाई का सीजन अंतिम दौर में चल रहा है. खरीफ फसल को पका तक पहुंचाने के लिए काफी लंबा समय लगेगा. ऐसे में अच्छी बारिश होगी तभी फसल पकाव के मुकाम तक पहुंच सकेगी. 

Reporter- Bhanu Sharma