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जोधपुर: भूजल स्तर बना शहर के लिए खतरा, भूकंप आया तो हो सकती है बड़ी जनहानी

 भूजल को लेकर शोध करने वाले वैज्ञानिकों का मानना तो यह जलस्तर कायलाना में पानी के रिसाव से हो रहा है.

जोधपुर: भूजल स्तर बना शहर के लिए खतरा, भूकंप आया तो हो सकती है बड़ी जनहानी
महज तीन से चार फिट पर जलस्तर होने से लोगों को भारी परेशानी हो रही है.

अरुण हर्ष/जोधपुर: एक और जहां पूरा प्रदेश लगातार गिरते भूजल स्तर को लेकर भी चिंतित है तो वहीं दूसरी ओर जोधपुर शहर का भीतरी क्षेत्र ऐसा है जहां लगातार भूजल स्तर बढ़ने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है. हालात यह है कि जोधपुर का यह इलाका भूजल स्तर बढ़ने से शहर पानी पर तैर रहा है. विशेषज्ञों की मानें तो यदि कभी कोई बड़ा भूकंप का झटका आता है तो यहां बड़ी जनहानि हो सकती है.

प्रदेश भर में लगातार भूजल के दोहन से भूजल का स्तर लगातार कम होता जा रहा है. जहां कई इलाकों में 500 से 600 फ़ीट तक भूजल स्तर पहुंच चुका है, लेकिन जोधपुर के लोग इस भूजल स्तर के गिरने से नहीं बल्कि पिछले 10 सालों से लगातार बढ़ते भूजल स्तर से परेशान हैं. भीतरी जोधपुर शहर में पिछले एक दशक से लगातार भूजल स्तर बढ़ रहा है. हालात ये हैं कि महज तीन से चार फिट पर जलस्तर होने से लोगों को भारी परेशानी हो रही है. 

कई इलाकों में बने अंडर ग्राउंड में 5 से 6 फीट पानी भर जाता है ओर इस पानी को बाहर निकालने के लिए लोगों को लगातार पानी की मोटर लगाकर पानी को बाहर निकालना पड़ रहा है. 24 घंटे मोटर चलाने से लोगों को आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है वही इस भूजल स्तर के कारण इन इलाकों की मकानों की नीवें काफी कमजोर हो चुकी है. यदि वैज्ञानिकों का माना जाए तो कभी भूकंप का झटका आने पर यह बड़ी जनहानि हो सकती है. लोगों का कहना है कि इसको लेकर कई बार राज्य सरकार को अवगत कराया गया लेकिन अभी तक इसका कोई हल नहीं निकला है. इससे आमजन को काफी परेशानी हो रही है और हमेशा खौफ के साए में जी रहे हैं.

यह बढ़ता भूजल स्तर आम लोगों के लिए ही नहीं बल्कि भूजल वैज्ञानिकों के लिए भी परेशानी का सबब बना हुआ है. भूजल को लेकर शोध करने वाले वैज्ञानिकों का मानना तो यह जलस्तर कायलाना में पानी के रिसाव से हो रहा है. कई वैज्ञानिकों का कहना है कि ड्रेनेज और सीवरेज सिस्टम सही नहीं होने से जोधपुर शहर का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. 

वहीं 2009 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार में करोड़ों रुपए की योजना बनाकर इस समस्या के समाधान का प्रयास किया था. इसके लिए आईआईटी रुड़की से एक टीम भी आई थी. विदेश से विशेषज्ञ दल को यहां बुलाया गया था जिसने अध्ययन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार के समक्ष प्रस्तुत की थी. इस समस्या के समाधान के लिए 33 करोड़ रुपए राज्य सरकार ने स्वीकृत किये है. साथ में वर्तमान में 104 भू जल स्रोत है जिनका पानी काम में लिया जा रहा है उसके अलावा भविष्य में 69 जल स्रोत का पानी काकानी स्थित रीको इंडस्ट्रियल एरिया में भेजने का प्लान है जिसके बाद जोधपुर में भूजल की समस्या का समाधान होता दिखाई देता है.