राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल में पूरक प्रश्नों को लेकर बीजेपी का विरोध जारी
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राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल में पूरक प्रश्नों को लेकर बीजेपी का विरोध जारी

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा है कि पूरक प्रश्नों को लेकर अध्यक्ष की व्यवस्था के खिलाफ आगे भी भाजपा सदस्य प्रश्नकाल में वॉकआउट जारी रखेगी. 

राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल में पूरक प्रश्नों को लेकर बीजेपी का विरोध जारी

जयपुर: प्रश्नकाल में पूरक प्रश्नों को लेकर अध्यक्ष की व्यवस्था को लेकर राजस्थान विधानसभा में शनिवार भी भाजपा वकआउट जारी रखा. भाजपा के वॉक आउट पर मंत्री सुभाष गर्ग ने निशाना साधा है और कहा है कि विपक्ष के कई सीनियर लीडर प्रश्नकाल में बहस को तूल देते हैं ताकि वह अपनी विशेषज्ञता साबित कर सकें. मंत्री सुभाष गर्ग ने कहा कि बहस के लिए प्रश्नकाल के अलावा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, 295 और पर्ची के माध्यम से मामलों को उठाया जा सकता है. लेकिन विपक्ष की ओर से बेवजह प्रश्नकाल में बहस को मुद्दा बनाया जाता है.

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा है कि पूरक प्रश्नों को लेकर अध्यक्ष की व्यवस्था के खिलाफ आगे भी भाजपा सदस्य प्रश्नकाल में वॉकआउट जारी रखेगी. उन्होंने कहा कि सदन में प्रश्न लगने के बाद वह सदन की प्रॉपर्टी हो जाता है लेकिन जिस तरह से अध्यक्ष ने व्यवस्था दी है उससे तो प्रश्नों के जवाब नहीं मिल पाएंगे. मैंने 40 साल में ऐसी व्यवस्था पहली बार देखी है. जब तक इस व्यवस्था का कोई हल नहीं निकल जाता तब तक भाजपा प्रश्नकाल में नहीं जाएगी चाहे यह सत्र ऐसे ही चला जाए. इसके साथ ही सतीश पूनिया ने भी कहां है कि लोकसभा में ऐसी व्यवस्था नहीं है यहां भी प्रश्न पूछने की अनुमति होनी चाहिए. इसके साथ ही ना पक्ष लॉबी में बीजेपी विधायक मुंह पर पट्टी बांधकर रखेंगे.

उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी ने व्यवस्था को लेकर कहा है कि जब बीएसी की मीटिंग हुई थी. तब विपक्ष भी वहां मौजूद था और उन्होंने कि इसका समर्थन किया था. 2 दिन आराम से सदन भी चला है और इसके बाद इस तरह का विरोध करना ठीक नहीं है. हम चाहते हैं कि वह सदन में बैठे और सदन चलाने में सहयोग करें. 

मंत्री सुभाष गर्ग ने कहा है कि प्रश्नकाल में सदस्य प्रश्न लगाकर सूचनाएं चाहते हैं लेकिन उसमें बहस होने से सूचना ही नहीं मिल पाती. अध्यक्ष की व्यवस्था होने से इस बार प्रश्नकाल में 15 प्रश्न तक जवाब मिल पा रहे हैं. पहले यह संख्या 4 -5 तक हो पाती थी.

(शशि मोहन शर्मा,भरत राज)

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