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राजस्थान विधानसभा में उठा बीएससी एग्रीकल्चर छात्रों के दाखिले से जुड़ा मामला

पुनिया ने कहा कि सरकार को स्थिति साफ करनी चाहिए कि प्राइवेट यूनिवर्सिटियों से बीएससी एग्रीकल्चर करने वाले विद्यार्थियों का क्या होगा. 

राजस्थान विधानसभा में उठा बीएससी एग्रीकल्चर छात्रों के दाखिले से जुड़ा मामला
284 पीजी की सीटों पर काउंसिल चल रही है.

मुकेश सोनी/कोटा: कृषि विश्वविद्यालयो में छात्रों को पीजी में एडमिशन देते समय आईसीएआर यानि भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् की गाइड लाइन की पालना नहीं की जा रही हैं आईसीएआर से एग्रिटेड नही होने के बाद भी राजस्थान के 16 प्राइवेट विश्वविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चर में पास आउट विद्यार्थियों को पीजी में एडमिशन दिया जा रहा हैं अब सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि जब ICAR ने खुद ने  पोस्ट ग्रेजुएशन में दाख़िले के लिए निजी विश्वविद्यालय (जो की ICAR से मान्यता प्राप्त नहीं है)  के विद्यार्थियों को अपात्र घोषित किया है तो राज्य सरकार कैसे यहाँ से पास आउट विधार्थियो को संस्थानों में पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए दाखिला दे सकती है?

विधानसभा में गूंजा मामला
प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों से बीएससी एग्रीकल्चर में डिग्री करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य पर तलवार लटकने की खबर जी मीडिया पर प्रसारित होने के बाद आमेर से बीजेपी विधायक सतीश पुनिया ने विधानसभा में मुद्दा उठाया. पुनिया ने कहा कि सरकार को स्थिति साफ करनी चाहिए कि प्राइवेट यूनिवर्सिटियों से बीएससी एग्रीकल्चर करने वाले विद्यार्थियों का क्या होगा. साथ ही पीजी में एडमिशन देते वक्त आईसीएआर की गाइड लाइन की पालना क्यों नहीं की जा रही. 

284 पीजी सीटों एडमिशन
प्रदेश में कृषि में पीजी की 284 सीटें है. इनमे एडमिशन के लिए 2000 विद्यार्थियों ने एग्जाम दिया था. जेट कोर्डिनेटर डॉ मूलचंद जैन ने बताया कि एग्जाम में प्राइवेट यूनिवर्सिटी से बीएससी एग्रीकल्चर में स्नातक की डिग्री लेने वाले विद्यार्थी भी शामिल है. एग्जाम के 6.5 ओजीपी (लगभग 65 प्रतिशत)की पात्रता रखी गई थी. आईसीएआर ने तो प्राइवेट यूनिवर्सिटी से बीएससी एग्रीकल्चर करने वाले विद्यार्थियों को एडमिशन के अपात्र माना है. लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से इस बारे में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है. मजबूर हमे तो एडमिशन देने पड़ रहे है. 284 पीजी की सीटों पर काउंसिल चल रही है.

गाइड लाइन की अवहेलना
इसी साल जनवरी हुई आईसीएआर की मीटिंग में देशभर की यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलरों को गाइड लाइन जारी की गई थी. मानव संसाधन मंत्रालय ने सभी कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर और एडिशनल डायरेक्टर जनरल को निर्देशित किया था कि निजी विश्वविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चर के विद्यार्थियों के दाखिले के समय गुजरात हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनुपालना की जाएगी. उक्त नियम हिमाचल प्रदेश और गुजरात में लागू हो चुका है. फिलहाल राजस्थान में यह लागू नहीं हुआ है.

मानदंडों पर खरे नही प्राइवेट विवि
जानकारी के मुताबिक प्राइवेट यूनिवर्सिटी आईसीएआर के मानदंडों को पूरा नही कर पा रहे. आईसीआर के गाइडलाइन के अनुसार यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट-टीचर रेशों और हाईली क्वालिफाइड टीचर, मशीनरी इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट होने चाहिए. जो प्राइवेट यूनिवर्सिटियों में नहीं होते. प्रदेश सरकार जेट एग्जाम के तहत बीएससी एग्रीकल्चर में दाखिले के लिए 120-120 सीट आवंटित है. पर प्राइवेट यूनिवर्सिटी में आवंटित सीटों से ज्यादा करीब (250-300)विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाता है. क्योंकि प्राइवेट यूनिवर्सिटी किसी को रिपोर्ट नहीं करते. प्राइवेट यूनिवर्सिटीया एडमिशन के नाम से विद्यार्थियों मोटी रकम (ब्लैक मनी ) वसूलती है.

आईसीएआर ले सकता है एक्शन
जानकारों की माने तो गाइड लाइन की अवेहलना की शिकायत मिलने पर आईसीएआर सरकारी विश्वविद्यालयो की ग्रांट रोक सकता है. मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत स्वामी ने आईसीएआर में मेल के जरिये पूरे मामले की शिकायत की है.