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जोधपुर में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना मिट्टी का जेवर, लगातार बढ़ रही डिमांड

यह अभूषण पहनने में बहुत हल्के होते हैं और दिखने में बेहद सुंदर होते हैं. इसे टूटने का कोई खतरा नहीं होता है.

जोधपुर में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना मिट्टी का जेवर, लगातार बढ़ रही डिमांड
आभूषण को बनाने में 1 घंटे से लेकर पूरा दिन लग जाता है.

भूपेश आचार्य/बाड़मेर:अब तक आपने महिलाओं को सोने, चांदी और डायमंड के आभूषण पहने हुए बहुत देखा होगा लेकिन आज हम आपको जिन आभूषण के बारे में बताने जा रहे हैं उसके बारे में शायद ही आपने पहले कभी सुना होगा. बाड़मेर में महिलाओं के सोलह श्रृगार के आभूषण मिट्टी से बनते हैं. जिसमें माला, कानों के झुमके, कंठी सब शामिल हैं. बाड़मेर जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर विशाला गांव का जामीन (कारीगर) का परिवार मिट्टी से महिलाओं के आभूषण पिछले 40-50 वर्षों से बना रहा है.
 
वहीं मिट्टी से गहने बनाने वाले जामीन का परिवार बताता है कि यह कला उन्होंने अपने पूर्वजों से सीखी है. इस कला की कद्र बाड़मेर में तो नहीं है लेकिन राजस्थान के बाद मेट्रो सिटी में इस कला की बेहद कद्र है खासतौर से जो भी विदेशी नागरिक इस आभूषण को देखता है तो उसके जबरदस्त पैसे देता है. इस आभूषण को यह परिवार साल में बनाने के बाद बाहर होने वाले मेलों में जाकर बेचती हैं जिसे महिलाएं और सैलानी जबरदस्त तरीके से खरीदते हैं. 

आभूषण को बनाने का तरीका भी बेहद खास है. हर कोई इस आभूषण को बना नहीं सकता है. यह परिवार कहता है कि इस आभूषण को बनाने में 1 घंटे से लेकर पूरा दिन लग जाता है. यह आभूषण 10 रुपए से शुरू होकर 500 रुपए तक के बीच में बिकता है. वहीं इसे बनाने वाले परिवार को साल के 40 से 50000 रुपए मिल जाते हैं. आभूषण बेहद हल्के होते हैं. 

आभूषण बनाने वाली महिलाओं का कहना है कि यह परंपरा हमारे पूर्वजों ने सिखाई थी. यह आभूषण पहनने में बहुत हल्के होते हैं और दिखने में बेहद सुंदर होते हैं. इसे टूटने का कोई खतरा नहीं होता है क्योंकि इसे मिट्टी में पूरी तरीके से पकाया जाता है.

जहां सोने और चांदी के भाव बढ़ते जा रहे है वहीं इस तरीके आभूषण बहुत ही आकर्षक होते है. बाड़मेर जिले से बाहर मेट्रो सिटी में मिट्टी से बने आभूषण की बहुत डिमांड है. पर्यटन स्थलों पर देश के अलग अलग कोने से आने वाली महिलाएं इन आभूषणों की डिमांड कर रही है. वहीं यह परिवार भी सरकार से मांग कर रहा है की सरकार हमें कोई सहायता दे जिससे इनकी कला देश-विदेश तक जा सके.