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राजस्थान: लाखों किसानों को कर्ज देने पर रोक, खरीफ और रबी के लिए नहीं ले पाएंगे लोन

किसानों को ऋण वितरण की रोक के बाद में अब सहकारिता विभाग ये दावा कर रहा है कि जिस तरह से ऋणमाफी योजना के लिए आनलाइन पोर्टल बनाया गया था

राजस्थान: लाखों किसानों को कर्ज देने पर रोक, खरीफ और रबी के लिए नहीं ले पाएंगे लोन
किसानों को ऋण बांटने का काम तो 1 अप्रैल से शुरू होना था.

जयपुर: राजस्थान के लाखों किसानों को बडा झटका लगा है. सहकारी बैंको ने किसानों को कर्ज देने पर रोक लगा दी है. खरीफ और रबी के लिए सहकारिता विभाग ने 16 हजार करोड का ऋण वितरण का लक्ष्य था और यह योजना भी 1 अप्रैल से शुरू होनी थी, लेकिन 22 दिन में ना तो किसानों को कर्ज मिला और ना ही ऋण देने की प्रक्रिया शुरू हुई.ऐसे में राजस्थान के अन्नदाताओं को बडा झटका लगा है.

राजस्थान में लोकसभा चुनाव से पहले किसानों की उम्मीदें टूट गई है क्योंकि चुनाव से पहले या चुनाव के दौरान लाखों किसानो को मिलने वाला कर्ज अब नहीं मिल पाएगा. सहकारी बैंकों ने किसानों को कर्ज देने पर रोक लगा दी है. जिससे लाखों किसानों को बडा झटका लगा है. कॉआपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक ने अपने आदेश में ये भी स्पष्ट नहीं किया है कि कब से ऋण वितरण की प्रक्रिया शुरू होगी और कब से किसानों को कर्ज बांटा जाएगा.

किसानों को ऋण वितरण की रोक के बाद में अब सहकारिता विभाग ये दावा कर रहा है कि जिस तरह से ऋणमाफी योजना के लिए आनलाइन पोर्टल बनाया गया था, उसी तरह से ऋण वितरण के लिए भी ऑनलाइन पोर्टल बनाया जा रहा है. लेकिन सबसे बडी बात ये है कि समय से ऋण नहीं मिलने से लाखों किसानों की मुश्किले बढ़ गई है. किसानों को ऋण बांटने का काम तो 1 अप्रैल से शुरू होना था.

जब से किसान इस बात का इतंजार कर रहे थे कि जल्द उन्हे कर्ज मिल पाएगा, लेकिन अब किसानों की उम्मीदे टूट चुकी है. सहकारी बैंक ने ये स्पष्ट किया था कि कर्ज वितरण सहकारी बैंक अपने संसाधनों के आधार पर ही करें. लेकिन अब पूरी तरह से अंतिम आदेश तक रोक लगा दी है. माना यह भी जा रहा है कि वित्तिय संसाधनों की कमी के चलते बैंक ने ऋण वितरण पर रोक लगाई है.

अल्पकालीन फसली ऋण के जरिए मिलना है कर्ज
राजस्थान में अल्पकालीन फसली ऋण योजना के जरिए हर साल 1 अप्रैल से कॉपरेटिव बैंकों से जुडे किसानों को रबी और खरीफ के लिए ऋण वितरित किया जाता है. इसके अंतगर्त 1.50 लाख तक का ऋण किसानों को अल्पकालीन फसली ऋण के अंतगर्त दिया जाता है. अब ऋण नहीं मिलने से किसानों की दिक्कते और बढ जाएगी. मोटे तौर देखा जाए तो करीब 28 लाख किसान कॉपरेटिव बैंको से जुड़े है, जबकि 10 लाख नए किसानों को जोडने का लक्ष्य बैंको ने किया था.