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दवाओं की खरीद में गड़बड़ी, कोटा मेडिकल कॉलेज प्रशासन कर रहा मामले की लीपापोती!

स्थानीय स्तर पर हुए टेंडर के आधार पर दवा सप्लायर ने कम गुणवत्ता की करीब 45 हजार दर्द निवारक 'जेल ऑइंटमेंट' की आपूर्ति कर दी.

दवाओं की खरीद में गड़बड़ी, कोटा मेडिकल कॉलेज प्रशासन कर रहा मामले की लीपापोती!
कोटा के सरकारी अस्पतालों में कम गुणवत्ता के दर्द निवारक की आपूर्ति के मामले की जांच की बात मेडिकल प्रशासन कर रहा है. (फाइल फोटो)

मुकेश सोनी, कोटा: कोटा मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत आने वाले एमबीएस व नए अस्पताल में दर्द निवारक (जेल) दवा की आपूर्ति के दौरान गड़बड़झाला का मामला सामने आया है. स्थानीय स्तर पर हुए टेंडर के आधार पर दवा सप्लायर ने कम गुणवत्ता की करीब 45 हजार दर्द निवारक 'जेल ऑइंटमेंट' की आपूर्ति कर दी. जिसका पता मेडिकल कॉलेज प्रशासन को नहीं चल पाया. अब मामला सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन जांच की बात कहकर पूरे प्रकरण की लीपापोती में लगा है. 

क्या है मामला

मार्च 2018 में मेडिकल कॉलेज, कोटा के अंतर्गत आने वाले तीन बड़े अस्पतालों के लिए स्थानीय स्तर पर दवा खरीद के लिए 11 करोड़ की निविदा जारी की थी. इस निविदा में दर्द निवारक 'जेल डाइक्लोफिनेक' का भी रेट कांटेक्ट किया था. इस दौरान जयपुर के अग्रवाल डिस्ट्रीब्यूटर को इस दर्द निवारक ऑइंटमेंट आपूर्ति करने का मिला था. फर्म को दिए वर्क ऑडर के अनुसार, इसमें डाइक्लोफिनेक 1.16 और मेंथॉल 5 फ़ीसदी था. लेकिन फर्म की ओर से ऑइंटमेंट सप्लाई किया गया, उसमें 1 फीसदी डाइक्लोफिनेक और 0.5 फीसदी मेंथोल था. 

कम गुणवत्ता वाली 45 हजार जेल मरीजों तक पहुंची

कोटा के नए अस्पताल में 24 अप्रैल 2018 को सम्बंधित फर्म को वर्क ऑडर जारी किया गया था. जिसमें डाइक्लोफिनेक जेल के अलावा 3 अन्य दवाओं के आपूर्ति की मांग की गई थी. इस वर्क ऑडर के मुताबिक अस्पताल प्रशासन ने ड्रग-मेडिसन बजट हैड (कोटे) से 30 हजार डाइक्लोफिनेक जेल की आपूर्ति मांगी गई थी. लेकिन फर्म ने 2 जून को 2018 को 4 लाख 15 हजार 800 रुपये की लागत वाली 30 हजार जेल की आपूर्ति की. सूत्रों की माने तो इसी तरह एमबीएस अस्पताल में भी मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना व भामाशाह के तहत मई व जून में दो बार मे करीब 15 हजार जेल की सप्लाई हुई थी. लेकिन फर्म के द्वारा उपलब्ध कराए गए ऑइंटमेंट में पूरा साल्ट नहीं था.

मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही आई सामने 

आपको बता दें कि, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सप्लाई के समय फर्म द्वारा दी गई बैच रिपोर्ट तक चेक नहीं की. इसका नतीजा यह हुआ कि कम गुणवत्ता वाली जेल मरीजों तक पहुंच गई. जानकारों की माने तो कम गुणवत्ता वाली जेल के उपयोग से मरीजों को कोई लाभ नहीं हुआ.  

इन मदों में भी दवाओं की होती है खरीद

मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में जो दवा उपलब्ध ना हो उन दवाओं की सप्लाई के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन लोकल स्तर पर टेंडर करता है. टेंडर में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना(MNDY), भामाशाह(BSBY), बीपीएल (BPL), ड्रग-मेडिसिन (DM) सहित कई विभिन मदों(कोटे) में दवा की खरीद होती है. सूत्रों की माने तो नए अस्पताल में ड्रग-मेडिसिन कोटे के अलावा भी दूसरे अन्य मद से भी दर्द निवारक डाइक्लोफिनेक जेल की खरीद हुई है.

मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर उठ रहा है सवाल 

विभागीय सूत्रों के अनुसार दवा की आपूर्ति के समय दवा की टेस्ट रिपोर्ट (बैच रिपोर्ट) साथ आती है. वह टेस्ट रिपोर्ट बिल के साथ लगती है. जो वेरिफाई करने वाले डॉक्टर से लेकर अकाउंटेंट, डबल एओ(AAO) और अस्पताल अधीक्षक से होकर गुजरती है. अधीक्षक के साइन करने के बाद ही फर्म का पेमेंट रिलीज होता है. ऐसे में सवाल उठता है कि इन जिम्मेदार अधिकारियों ने एक बार भी दवा की टेस्ट रिपोर्ट को क्यों चेक नहीं किया.

इस संबंध में सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र गर्ग ने बताया कि दवाओं की सैम्पल आने से पहले इसकी आपूर्ति हो चुकी थी. वहीं, नए अस्पताल के अधीक्षक डॉ. देवेंद्र विजयवर्गीय का कहना है कि मामला सामने आने से पहले तक दवा का वितरण मरीजों के बीच  हो चुका था. उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में विभागीय जांच की प्रक्रिया भी जारी है. दवा की आपूर्ति करने वाले फर्म पर वित्तीय पेनल्टी लगाना या ब्लैक लिस्ट करने का निर्णय मेडिकल कॉलेज प्रशासन जांच पूरी होने के बाद करेगा.