दौसा: दुर्गति का शिकार हो रहा 'मिनी पुष्कर', मछलियों की मौत वातावरण को कर रही प्रदूषित

हैरानी की बात यह है कि शहर से सटे इस बांध में सिंगाड़े की खेती भी का जा रही है, जो कही ना कहीं मछलियों की मौत का कारण भी हो सकती है.  

दौसा: दुर्गति का शिकार हो रहा 'मिनी पुष्कर', मछलियों की मौत वातावरण को कर रही प्रदूषित
प्रशासन गेटोलाव बांध के रखरखाव को लेकर पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है.
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लक्ष्मी अवतार शर्मा/दौसा: प्रदेश में मिनी पुष्कर के नाम से विख्यात संत सुन्दरदास की तपोस्थली गेटोलाव धाम इन दिनों दुर्गति का शिकार हो रहा है. अब की बार ठीक-ठाक बारिश (Rain) होने से गेटोलाव धाम पर बने बांध में पानी की आवक भी अच्छी हुई है, जिसके चलते लोग इस स्थान को देखने और प्रकृति की तरोताजा हवा का लुत्फ लेने पहुंचते हैं. लेकिन बांध में मछलियों की असामयिक मौत पूरे वातावरण को प्रदूषित कर रही है.

वहीं, प्रशासन गेटोलाव बांध के रखरखाव को लेकर पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है. हैरानी की बात यह है कि शहर से सटे इस बांध में सिंगाड़े की खेती भी का जा रही है, जो कही ना कहीं मछलियों की मौत का कारण भी हो सकती है. सिंगाड़े की खेती में केमिकल का छिड़काव किया जाता है, हो सकता है उस केमिकल की वजह से मछलियां काल का ग्रास बन रही हो. वहीं, मछलियों की मौत के चलते इतनी बदबू हो रही है कि वहां खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा है.
 
दरअसल, दौसा जिला मुख्यालय पर स्थित राष्ट्रीय संत सुंदर दास की दीक्षा और तपोस्थली प्रशासन की नाक के नीचे दुर्गति का शिकार हो रही है. प्रशासन जानकर भी इस दुर्गति से अनजान बना हुआ है. धार्मिक के साथ यह स्थल रमणीक भी है, जिसके चलते यहां बड़ी तादाद में लोगों की आवाजाही रहती है.

यहां बने बांध में इस बार बारिश ठीक-ठाक होने से पानी की आवक अच्छी हुई है, जो लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. छोटे बच्चे दिन भर पानी में कलरव करते हैं और आनंद लेते हैं. लेकिन इस बार मछलियों की असामयिक मौत लोगों को परेशान कर रही है.

मछलियों की मौत के चलते यहां इतनी दुर्गंध हो रही है कि खड़ा रहना भी दुर्लभ हो रहा है. वहीं, स्थानीय लोगों की मानें तो बांध में सिंघाड़े की खेती भी की जा रही है, जिस पर दवा का छिड़काव किया जाता है. लोगों का कहना है कि हो सकता है उस केमिकल से मछलियां काल का ग्रास बन रही हो.

गेटोलाव बांध की दुर्गति और असामयिक मछलियों की मौत को लेकर दौसा एसडीएम पुष्कर मित्तल ने यह स्वीकार किया कि हां बांध में मछलियां मर रही हैं. लेकिन क्यों मर रही है क्या इसकी वजह, यह अभी तक उन्हें भी नहीं पता है. एसडीएम द्वारा दौसा नगर परिषद के आयुक्त और पशुपालन विभाग के डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वह मछलियों की मौत का कारण पता करें. साथ ही बांध की साफ सफाई भी करें जिससे वहां का वातावरण दूषित ना हो.

प्रदेश में मिनी पुष्कर के नाम से विख्यात और हजारों लोगों की आस्था का केंद्र संत सुंदरदास की दीक्षा और तपोस्थली गेटोलाव बांध के जीर्णोद्धार के लिए तत्कालीन विधायक शंकर शर्मा ने करोड़ों रुपए लगाकर यहां विकास करवाया था. इस परिसर को एक सुंदर मूर्त रुप दिया था. साथ ही यहां बांध में पानी होने से बड़ी तादाद में विदेशी पक्षी भी आया करते थे, जिसके चलते यहां बर्ड मेला भी लगा गया था. लेकिन उनके चुनाव हारने के बाद दौसा जिला प्रशासन ने गेटोलाव धाम के रखरखाव को लेकर मुंह फेर लिया. जिसके चलते फिर से धीरे-धीरे यहां की सुंदरता बिगड़ने लगी है और असामाजिक तत्वों का अभी यहां जमावड़ा होने लगा है.