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कोटा मेडिकल कॉलेज में सर्जिकल व सूचर्स आइटम के टेंडर में हुआ गड़बड़झाला!

माना जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन की इस कारगुजारी से राज्य सरकार को लाखों का फटका लगा है. 

कोटा मेडिकल कॉलेज में सर्जिकल व सूचर्स आइटम के टेंडर में हुआ गड़बड़झाला!
सर्जिकल व सूचर्स आइटम का टेंडर नहीं होने के कारण बाहर से खरीद हो रही है.

कोटा/मुकेश सोनी: कोटा मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है. अब तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन सर्जिकल व सूचर्स आइटम का टेंडर नहीं कर पाया है. माना जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन की इस कारगुजारी से राज्य सरकार को लाखों का फ़टका लगा है. 

उठ रहा है मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य पर सवाल 

मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में लोकल स्तर पर दवाओं के टेंडर में गड़बड़झाले के बाद अब सर्जिकल व सूचर्स आइटम के टेंडर को लेकर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ गिरीश वर्मा सवालों के घेरे में है. बताया जा रहा है कि 22 महिनें बीत जाने के बाद भी कॉलेज के प्रशासक डॉ गिरीश वर्मा सर्जिकल व सूचर्स आइटम का टेंडर नही करवा सके हैं. समय पर टेंडर होने पर ये सर्जिकल व सूचर्स हॉस्पिटल को सस्ते दरों पर मिलते.

मेडिकल कॉलेज महंगे दर पर कर रहा है खरीद

सर्जिकल व सूचर्स आइटम के टेंडर नही होने से मजबूरन अस्पतालों को अपने स्तर पर इनकी खरीद करनी पड़ रही है. जो टेंडर रेट से महंगे पड़ रहे है. ऐसे में सरकार को लाखों का चूना लग चुका है. 

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने आरोप को किया खारिज

इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ गिरीश वर्मा ने बताया कि इसके लिए गठित तकनीकी समिति में एक राय नही बन पाई थी. दूबारा प्रक्रिया शुरू करने पर मंत्रालयिक कर्मचारियों की हड़ताल हो गई. जिसके बाद राज्य में आचार संहिता भी लग गई. वर्मा ने किसी फर्म विशेष को लाभ पहुंचाने के आरोप को सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा, ''सर्जिकल व सूचर्स की खरीद सरकार के निर्देश के अनुरूप की जा रही है.''

मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत होती है खरीद

मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत आरएमसी से 147 तरह के सर्जिकल व 77 तरह के सूचर्स की सप्लाई आती है. एमबीएस अस्पताल स्थित एमसीडब्ल्यू स्टोर से इन आइटमों को एमबीएस, नए अस्पताल ,जेके लोन व अन्य जगह सप्लाई की जाती है. सप्लाई में कमी के कारण मेडिकल कॉलेज प्रशासन लोकल स्तर पर टेंडर करता है. जिससे भामाशाह लाभार्थियों को इलाज में आसानी हो. 

सूत्रों ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में सालाना करीब 21 हजार ऑपरेशन होते है. जिनमें सर्जरी,ऑर्थोपीडिक,ईएनटी,आई(आंख) व यूरोलॉजी शामिल है. इनमें से लगभग 20 प्रतिशत भामाशाह लाभार्थी है.

बताया जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मार्च 2017 में तीनों अस्पतालों के लिए लोकल स्तर पर दवा खरीद व सर्जिकल आइटम की टेंडर अवधि खत्म होने के बाद भी नए टेंडर नहीं कर सका था. उस स्थिति में मेडिकल कॉलेज प्रशासन टेंडर की अवधि बढ़ाता गया. मार्च 2018 में कॉलेज स्तर पर लोकल स्तर पर दवा खरीद के लिए 11 करोड़ व सर्जिकल व सूचर्स के लिए करीब 5 करोड़ का टेंडर जारी किया था. इस दौरान एक ही परिवार की तीन फर्मो को दवा सप्लाई का टेंडर जारी हुआ था. लेकिन सर्जिकल व सूचर्स आइटम का टेंडर नही हो पाया. 

टेंडर नहीं होने से बाहर से हो रही है खरीद

सर्जिकल व सूचर्स आइटम का टेंडर नहीं होने से एमबीएस अस्पताल एमआरपी से 37 प्रतिशत डिस्काउंट वाली दुकान से इनकी खरीद रहा है. वहीं, नए अस्पताल में इन आइटमों को एमआरपी मूल्य पर उपभोक्ता भंडार के जरिये खरीद कर मरीजों को उपलब्ध कराया जा रहा है. इसी तरह जेके लोन अस्पताल में भी आरसी की दर्ज पर इन आइटमों की खरीद की जा रही है.