श्रीगंगानगर: जब 8 महीने बाद मिली गायब लड़की, पता चला 'शेल्टर होम' का पूरा सच

जिले के सूरतगढ़ में स्थित गुरु भरोसा सेवा संस्था के द्वारा संचालित शेल्टर होम में रहने वाले लोगों ने एनजीओ प्रशासन पर मारपीट करने और नशीली गोलियां खिलाने का आरोप लगाया है.

श्रीगंगानगर: जब 8 महीने बाद मिली गायब लड़की, पता चला 'शेल्टर होम' का पूरा सच
पुलिस के हस्तक्षेप से लड़की को यहां से बाहर निकाला जा सका.

श्रीगंगानगर/हरनेक सिंह: जिले के सूरतगढ़ में स्थित गुरु भरोसा सेवा संस्था के द्वारा संचालित शेल्टर होम में रहने वाले लोगों ने एनजीओ प्रशासन पर मारपीट करने और नशीली गोलियां खिलाने का आरोप लगाया है.

मामले का खुलासा तब हुआ जब आठ माह पूर्व बालोतरा से गायब लड़की के पिता पुरुषोत्तमदास सिंधी ने अपनी लड़की को वापस लाने की गुहार एसपी से लगाई. जिसे भेजने के लिए आश्रम प्रशासन तैयार नहीं हो रहा था. उसकी बरामदगी के बाद लड़की के पिता और वहां रहने वाले कई लोगों ने एनजीओ प्रशासन पर इस तरह का आरोप लगाया है.

पुलिस हस्तक्षेप के बाद लड़की को परिजनों को सौंपा 

आठ माह पहले घर से नाराज होकर गलती से सूरतगढ़ पहुंची लापता लड़की को सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन से लाकर एनजीओ के लोगों ने उसे वहां रख लिया था. लेकिन लड़की के घर का पता बताने के बावजूद उन्होंने उसे वापस नहीं भेजा. अपनी लापता लड़की की खोजबीन में निकले उसके पिता ने संचालक से उसे वापस भेजने की गुहार लगाई. लेकिन एनजीओ संचालक उसे वापस भेजने को तैयार नहीं हो रहे थे. जिसके बाद एसपी हेमंत शर्मा के हस्तक्षेप के बाद उसे वापस परिजनों को सौंपा जा सका.

वहीं, सूरतगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद भाम्भू ने बताया कि बालोतरा की इस युवती को यहां रखा गया था. जिसकी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने युवती के पिता पुरुषोत्तमदास सिंधी को बुलाकर उनकी लड़की से मिलवाने का प्रयास कर रहा था. एनजीओ प्रशासन के अड़ियल रवैये के बाद पुलिस ने इस मामले में दखल दी. जिसके बाद लड़की को उसके पिता को सौंपा गया. 


  

शारीरिक शोषण और प्रताड़ना के लगे गंभीर आरोप

इस शेल्टर होम में शारीरिक रूप से स्वस्थ स्त्री-पुरूषों को बंधक बनाकर रखने और नशीली दवाएं देने का अकल्पनीय सच सामने आया है. वहां बंद कई महिलाओं ने शारीरिक शोषण और प्रताडऩा के भी आरोप लगाए है. माना जा रहा है कि इस तरह के आरोप लगाने वाली कई महिलाओं को एनजीओ संचालक सिकन्दर सिंह ने गुपचुप रूप से आश्रम से वापस भेज दिया है. बताया जा रहा है कि इस शेल्टर होम का संचालक सिकंदर सिंह सरकारी कर्मचारी है. वहीं इसकी देखरेख करने वाली संस्था की अध्यक्ष उसकी पत्नी है. वैसे यहां पर देश के कई भागों के रहने वाले मंदबुद्धि, असहाय, निर्धन निसहाय लोगों को रखने की बात कही जा रही है. 

खाने में दिया जा रहा था नशे की गोली का डबल डोज

मामला सामने आने के बाद वहां रहने वाली एक अन्य पीड़िता कुसुम ने मीडिया में एनजीओ प्रशासन पर सब्जी में नशे की दवाई मिलाकर देने का आरोप लगाया है. इसके अलावा यहां के कर्मचारी जयसिंह ने बताया है कि संचालक सिंकदर सिंह के कहने पर ही सबको खाने में नशे की दवाई मिलाकर दी जाती थी. उसने यह भी बताया कि कुछ दिन पूर्व नशे की गोली की ‘डबल डोज’ देने का निर्देश भी दिया गया था. 

आश्रम प्रशासन पर उठ रहा सवाल

आश्रम में बंद सभी लोगों को ‘माइण्ड फ्रेश’ करने के नाम पर सब्जी में नशे की गोलियां मिलाकर देने पीछे इसके संचालकों की मंशा पर संदेह प्रकट हो रहा है.