राजस्थान विश्वविधालय कैम्पस में छात्राओं को मिलेेंगे सैनिटरी नैपकीन, लगी मशीनें

फिलहाल राविवि के दो छात्रावासों में सैनिटरी नैपकीन मशीन और डिस्ट्रॉयर मशीन भी लगाई गई है.

राजस्थान विश्वविधालय कैम्पस में छात्राओं को मिलेेंगे सैनिटरी नैपकीन, लगी मशीनें
राजस्थान विश्वविधालय प्रशासन ने छात्राओं के लिए सैनिटरी नैपकिन मशीन 2 छात्रावासों में लगवाई है.

ललित कुमार, जयपुर: राजस्थान विश्वविधालय में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए विश्वविधालय प्रशासन ने कैम्पस के अंदर सैनिटरी नैपकीन मशीन लगाकर महिला स्वच्छता को सुनिश्चित करने का प्रयास किया है. राजस्थान विश्वविद्यालय के 7 महिला छात्रावासों में रहने वाली हजारों छात्राओं को विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए साल में नई सौगात देने जा रही है. फिलहाल राविवि के दो छात्रावासों में सैनिटरी नैपकीन मशीन और डिस्ट्रॉयर मशीन भी लगाई गई है. जिससे अब विश्वविधालय की छात्राओं को सैनिटरी पैड खरीदने के लिए यूनिवर्सिटी से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

आपको बता दें कि, राजस्थान यूनिवर्सिटी प्रदेश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी है. फिलहाल यूनिवर्सिटी कैम्पस में स्थित 7 छात्रावासों में करीब 1 हजार से ज्यादा छात्राएं रहती हैं. विश्वविधालय प्रशासन के इस पहल का छात्राओं और छात्र संगठन ने भी स्वागत किया है. छात्राओं को कहना है कि छात्रावास यूनिवर्सिटी के बिल्कुल अंतिम छोर पर हैं और ऐसे में पैड लेने के लिए करीब 2 किलोमीटर तक पैदल चलकर जाना पड़ता रहा है. ऐसे में कई बार ज्यादा समस्या होने पर बहुत परेशानी होती थी, लेकिन अब ये मशीन लगने से छात्राओं को बहुत बड़ी राहत मिली है. अब छात्राओं को सिर्फ 5 रुपये की कीमत पर सैनिटरी पैड इस मशीन के माध्यम से मिल पाएगा. 

फिलहाल राविवि कैम्पस के दो छात्रावास माही और सरस्वती में सैनिटरी नैपकीन मशीन लगाई गई है. इन मशीनों के साथ ही नैपकीन ड्रिस्ट्रॉयर मशीन भी लगी हुई है. जिसकी क्षमता 120 सैनेट्री नैपकीन की है. बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य छात्रावासों में भी यह मशीन लगाई जाएगी.  

राविवि कुलपति आरके कोठारी के प्रयास लाया रंग

सैनेट्री नैपकीन मशीन लगवाने में महत्वपूर्ण योगदान निभाने वाले राजस्थान यूनिवर्सिटी कुलपति आरके कोठारी ने बताया कि छात्राओं की समस्या को देखते हुए ये निर्णय लिया गया था. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के तहत इन मशीनों को लगाने का निर्णय लिया. अभी दो छात्रावासों में मशीन स्थापित की गई हैं जल्द ही अन्य छात्रावासों में भी ये मशीनें लगाई जाएगी. 

माना जा रहा है कि महिला सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए विश्वविधालय प्रशासन ने इस तरह की पहल की है.