राजस्थान: केंद्र सरकार की योजनाएं तोड़ रही है दम, कागज में सिमटकर रह गए दांवे

सूत्रों के अनुसार, अब तक एक भी साल का टारर्गेंट पूरा नहीं हो पाया है. 

राजस्थान: केंद्र सरकार की योजनाएं तोड़ रही है दम, कागज में सिमटकर रह गए दांवे
केंद्र सरकार से मिलने वाली आवंटित राशि पूरी तरह खर्च नहीं हो पाई. (प्रतीकात्मक फोटो)

जयपुर: केंद्र सरकार की चार राष्ट्रीय निगमों की योजनाएं राजस्थान में दम तोड रही है. पिछले चार साल की बात करे तो आंकड़े हैरान करने वाले है. चार वर्ष में एक भी साल राष्ट्रीय निगमों की योजनाएं पात्र व्यक्तियों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई. जिस कारण दिव्यांगों, सफाई कर्मचारियों और विकलांगों को संबल बनाने की बात कागजों तक ही सिमटकर रह गई. 

अब तक नहीं पूरा हो सका है टार्गेट

सूत्रों के अनुसार, अब तक एक भी साल का टारर्गेंट राष्ट्रीय निगम पूरा नहीं कर पाया है. जिस कारण जरूरतमंद लोगों को योजनाओं का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाया है. इन योजनाओं के लिए आवंटित राशि पूरी तरह खर्च नहीं हो सकी है.

योजनाओं का हो रहा है बंटाधार

राष्ट्रीय अनूसूचित जाति वित्त विकास निगम,अनूसचित जनजाति,विकलांग और सफाई कर्मचारी वित्त विभाग निगम की बात करे तो प्रदेश में इनकी उपलब्धि कम और विफलताएं ज्यादा नजर आ रही है. साल दर साल राष्ट्रीय निगम की योजनाओं का बंटाधार होता जा रहा है. लक्ष्यों से लगातार निगम पिछड़ते जा रहे है. एक साल भी ऐसा नहीं है जब निगमों ने अपना टारगेट पूरा किया हो.

7 हजार पात्र रह गए योजना के लाभ से वंचित

पिछले चार साल में चार निगमों की बात करे तो 22466 लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए ऋण दिया जाना था,लेकिन पिछली वसुंधरा सरकार में महज 15 हजार ही लोगों को राष्ट्रीय निगमों की योजनाएं उनके घर तक पहुंची.बाकी 7 हजार से ज्यादा पात्र अभ्यर्थी इन योजनाओं से वंचित रह गए.

जानिए राष्ट्रीय निगम की बिगड़ती स्थिति के आकंडे

निगम का नाम     लक्ष्य        उपलब्धि          ऋण राशि लाख में

एससी विकास निगम  10028       8223            3698
एसटी विकास निगम   7675       4539            3785
कर्मचारी विकास निगम 3267       1492             985
विकलांग विकास निगम 1496       843              1986
कुल                          22466     15097            10454

 

मंत्री का दावा सिस्टम सुधारने पर ध्यान दिया जाएगा

निगम की योजनाओं की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए मंत्री मास्टर भवंरलाल मेघवाल ने कहा, ''आने वाले दिनों में सिस्टम को सुधारने का काम किया जाएगा, जिसके लिए राज्य सरकार ने प्रयास शुरू कर दिया है. ताकि योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक पहुंच सके. 

उन्होंने यह भी कहा, ''पिछली सरकार में इन योजनाओं के प्रचार-प्रसार में कमी रही, जिसका नतीजा ये रहा कि ना तो आवंटित बजट पूरी तरह खर्च हो पाया और ना ही जरूरतमंद लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिल पाया. अब कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई है. आम लोगों को इन योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा.''

आंकड़े बता रहे हैं निगमों की कार्यप्रणाली का तरीका

लेकिन आंकड़े देखकर यह साफ पता चलता है कि निगम के अधिकारियों को काम में दिलचस्पी नहीं है. ऐसे में निगम के अच्छे दिन कब आएंगे ये तो वक्त ही बताएगा