राजस्थान: संस्कृत शिक्षा को लेकर आ रही समस्याओं पर बोले राज्यपाल, कहा...

राजस्थान संस्कृत विश्व विद्यालय(Rajasthan Sanskrit University) का सोमवार को तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया

राजस्थान: संस्कृत शिक्षा को लेकर आ रही समस्याओं पर बोले राज्यपाल, कहा...
राज्यपाल कलराज मिश्र

ललित कुमार/जयपुर: राजस्थान संस्कृत विश्व विद्यालय(Rajasthan Sanskrit University) का सोमवार को तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें राज्यपाल कलराज मिश्र(Governor Kalraj Mishra) ने 21 हजार 535 विद्यार्थियों को डिग्रियों का वितरण किया. वहीं 30 मेधावी छात्रों को गोल्ड मैडल भी दिए गए.
 
राजस्थान संस्कृत विश्व विद्यालय(Rajasthan Sanskrit University) के तीसरा दीक्षांत समारोह में संस्कृत विश्व विद्यालय की ओर से पहली बार 4 विद्वानों को डी.लिट की मानद उपाधि से भी नवाजा गया. कार्यक्रम में संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग और संस्कृत यूनिवर्सिटी कुलपति डॉ. अनुला मौर्य भी मौजूद रहीं.

वहीं, विश्वविद्यालय ने पहली बार वाचस्पति (डी.लिट) की उपाधि भी चार विद्वानों को दी गई. इनमें विद्वान एवं राजनेता डॉ. कर्ण सिंह, जाने-माने संस्कृत विद्वान देवर्षि कलानाथ शास्त्री, वरिष्ठ पत्रकार तथा वेद-विज्ञानी डॉ. गुलाब कोठारी और प्रसिद्ध प्रवचनकर्ता अनुराग कृष्ण पाठक को डी.लिट की मानद उपाधि से राज्यपाल कलराज मिश्र ने नवाजा.

समारोह में राज्यपाल कलराज मिश्र(Governor Kalraj Mishra) ने  21 हजार 535 डिग्रियों का वितरण एवं 30 स्वर्ण पदक प्रदान किए. शैक्षणिक सत्र 2017 की 12167 एवं 2018 की 9368 डिग्रियों का वितरण किया गया. वहीं शैक्षणिक सत्र 2017 के 16 एवं 2018 के 14 स्वर्ण पदक भी विद्यार्थियों को प्रदान किए गए. संस्कृत यूनिवर्सिटी कुलपति डॉ. अनुला मौर्य ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए संस्कृत यूनिवर्सिटी के इतिहास को साझा किया. साथ ही संस्कृत शिक्षा के सामने आ रही समस्या को भी मंत्री और राज्यपाल के सामने रखा.

समारोह को संबोधित करते हुए संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने कहा कि सरकार के सत्ता में आने के साथ ही संस्कृत को बढ़ाने पर जोर दिया गया और बजट घोषणा में वैदिक संस्कार बोर्ड के गठन की भी घोषणा की गई. साथ ही संस्कृत शिक्षा के रुके हुए सभी कार्यों को भी आगे बढ़ाने के लिए सरकार बड़े कदम उठाने जा रही है. इसके साथ ही संस्कृत यूनिवर्सिटी जो पिछले कई सालों से नामाकंन घटने की समस्या से गुजर रही है. भविष्य में इसके नामांकन को बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा.

राज्यपाल कलराज मिश्र(Governor Kalraj Mishra) ने डिग्रियां और गोल्ड मैडल प्राप्त विद्यार्थियों को शुभकमानाएं देते हुए कहा की संस्कृत को आगे बढ़ाने के लिए केन्द्र और राज्य स्तर पर कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं. इसका नतीजा है की संस्कृत यूनिवर्सिटी में महज 16 साल के अंदर ही तीन दीक्षांत समारोह आयोजित हो गए. साथ ही, एक साथ आज 21 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को उपाधियों का वितरण किया गया.

इसके साथ ही राज्यपाल कलराज मिश्र ने वैद ज्ञान को लेकर कहा की सिर्फ वैदों का ज्ञान होने से ही कोई विद्वान नहीं होता है. अपने कर्म और आचरण से भी लोग विद्वान बनते हैं. मनुस्मृति युग के अनुरुप संशोधित भी हुई है. पहले भ्रांतियां थी की अगर कोई शुद्र मनुस्मृति के वेद सुन लेता था तो कान पिरो दिए जाते थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं था. वहीं ब्राह्मण भी अपने कर्म से ही ब्राह्मण होता है. यदि कोई ब्राह्मण चांडाल जैसा आचरण करता है तो उसको ब्राह्मण नहीं कहा जाता है उसे चांडाल ही कहा जाता है. इसके साथ ही राज्यपाल कलराज मिश्र ने विद्यार्थियों से अपील करते हुए अच्छा नागरिक बनते हुए समाज की सेवा करने का आह्वान किया.