close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

ICAR की नई गाइडलाइन जारी, बीएससी एग्रीकल्चर के छात्रों के भविष्य पर लटकी तलवार

भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् (ICAR), भारत सरकार का विभाग है जो पुरे देश में कृषि पर होने वाले अनुसन्धान, पढ़ाई, कृषि के लिए पालिसी एवं दिशा निर्देश आदि बनता है.

ICAR की नई गाइडलाइन जारी, बीएससी एग्रीकल्चर के छात्रों के भविष्य पर लटकी तलवार

कोटा/ मुकेश सोनी: प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों से बीएससी एग्रीकल्चर में डिग्री करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य पर तलवार लटक गई है. भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् (ICAR) ने निजी विश्वविद्यालय जो ICAR से एफिलेटेड नहीं है उन संस्थानों से बीएससी एग्रीकल्चर में डिग्री करने वाले विद्यार्थियों को सरकारी कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिले के लिए मना किया है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के विभाग द्वारा बीएससी एग्रीकल्चरल पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में दाखिले के लिए करवाए जाने आल इंडिया एंट्रेंस एग्जाम फॉर एडमिशन-2019(AIEEA-2019) में बैठने के लिए जरुरी शर्तो में बताया है कि कई निजी विश्वविद्यालय और कॉलेज ICAR के मापदंडों पर खरे नहीं है. निजी विश्वविद्यालय या कॉलेज से बीएससी एग्रीकल्चरल का कोर्स करने वाले विद्यार्थी इस एग्जाम में बैठने के पात्र नहीं है. AIEEE-2019 एग्जाम पुरे भारत में 1 जुलाई को हुआ था जिसका परिणाम 17 जुलाई को जारी किया जाएगा. 

धर्म संकट हुआ खड़ा
भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् (ICAR), भारत सरकार का विभाग है जो पुरे देश में कृषि पर होने वाले अनुसन्धान, पढ़ाई, कृषि के लिए पालिसी एवं दिशा निर्देश आदि बनता है. कृषि विश्वविद्यालयों को ICAR से राज्य कृषि अनुसन्धान को फण्ड मिलता है जबकि विश्वविद्यालय, राज्य सरकार के अधीन है. ऐसे में विश्वविद्यालयों के सामने में भी धर्म संकट खड़ा हो गया है कि किस की बात माने. जब इस बारे में अतिरिक्त महानिदेशक शिक्षा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारत सरकार नई दिल्ली एनएस राठौर से फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश जारी किए है उनको हमने एग्जाम में लागू किया है. अगर नॉन एग्रिकेट यूनिवर्सिटी व कॉलेज से किसी विद्यार्थी ने बीएससी एग्रीकल्चर में डिग्री की है तो उसे आईसीएआर से एग्रिकेटेट संस्थानों में पीजी में एडमिशन नहीं मिलेगा.

विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़!
ICAR के इस निर्णय से उन हजारों विद्यार्थीयों के भविष्य के ऊपर तलवार लटक गई जिन्होंने निजी विश्वविद्यालय या कॉलेज से चार साल तक लाखों रुपये की फीस देकर कृषि में बीएससी किया और अब सरकारी संस्थानों में आगे की पढ़ाई के लिए दाखिला लेना चाहते हैं.  

कोटा कृषि विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. केशवा ने बताया कि 30-31 जनवरी को दिल्ली में पूरे देश के कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर की मीटिंग और कॉन्फ्रेंस हुई थी. जिसमें आईसीआर ने बताया था, प्राइवेट यूनिवर्सिटी, कॉलेज के विद्यार्थियों को एडमिशन देते समय सुप्रीम कोर्ट, गुजरात हाई कोर्ट के नियमों को ध्यान में रखा जाए.

डॉक्टर विधि शर्मा वित्त नियंत्रक एवं रजिस्ट्रार कृषि विश्वविद्यालय कोटा ने बताया कि हाल ही में ICAR ने सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत गाइड लाइन जारी की है. जिसमे बताया गया है कि जो संस्थान आईसीआर से एग्रिकेटेड नहीं है. वहां से बीएससी एग्रीकल्चर में डिग्री किए हुए बच्चों को पीजी कोर्स के लिए अपात्र माना है. उक्त नियम हिमाचल प्रदेश और गुजरात में लागू हो चुका है. फिलहाल राजस्थान में यह लागू नहीं हुआ है लेकिन यह बहुत बड़ा सवाल है कि निजी विश्वविद्यालय व कॉलेज से पास आउट हुए बच्चे किसी अच्छे केंद्रीय संस्थान से पोस्ट ग्रेजुएशन या पीएचडी करना चाहे तो वह इसके पात्र नहीं हो पाएंगे.

इस बार कोटा कृषि विश्वविद्यालय कोटा द्वारा जेट का एग्जाम करवा गया है. जिसके तहत पूरे राज्य के सरकारी और निजी संस्थानों में बीएससी एग्रीकल्चर ग्रेजुएशन से संबंधित कोर्स मैं दाखिला मिलेगा.

निर्देशक कृषि अनुसन्धान कोटा ,डॉ मूलचंद जैन जो जेट के कोऑर्डिनेटर है. उन्होंने बताया कि आईसीएआर ने जो गाइडलाइन निकाली है वह पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स के लिए निकाली है जबकि राज्य सरकार के द्वारा करवाए जाने वाला जेट का एग्जाम ग्रेजुएशन में भर्ती के लिए है जो 12वीं पास बच्चे देते हैं.जेट का फॉर्म 28000 बच्चों ने भरा है जो बीएससी एग्रीकल्चर में ग्रेजुएशन करना चाहते हैं. जेट एग्जाम के तहत 5150 विद्यार्थियों को राज्य के सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में ग्रेजुएशन के लिए एडमिशन मिलेगा जब यही छात्र ग्रेजुएट होने के बाद अच्छे संस्थानों से पोस्ट ग्रेजुएशन या पीएचडी करना चाहेंगे तो आईसीएआर के अनुसार उनको केंद्रीय संस्थानों में या आईसीएआर से रिलेटेड संस्थानों में दाखिला नहीं मिलेगा. क्योंकि गाइड लाइन के मुताबिक उसके लिए अपात्र माने जाएंगे.

विद्यार्थियों के जंग लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत स्वामी ने बताया की निजी विश्वविद्यालय में ICAR के मापदंडो का ध्यान नहीं रखा जाता, इसी के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट और गुजरात हाई कोर्ट में याचिका लगायी गयी थी जिसमें बताया गया था कि निजी विश्वविद्यालय में छात्र-टीचर अनुपात, योग्य प्रोयगशाला, योग्य टीचर, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि नहीं होते है. जिसके फलस्वरूप विद्यार्थियों की गुणवत्ता में काफी गिरावट आती है, इसके बावजूद निजी विश्वविद्यालय में खुद के द्वारा ही विद्यार्थियों को डिग्री दी जाती है. फलस्वरूप अधिक अंकों के साथ निजी विश्वविद्यालयों के छात्रों को पोस्ट ग्रेजुएशन में दाखिला मिल जाता है. सुजीत ने कहा कि ICAR की गाइड लाइन, राजस्थान के विश्वविद्यालयों में भी लागू करने के लिए जल्द ही हाईकोर्ट में याचिका लगाएंगे.