2008 जयपुर सीरियल ब्लास्ट केस में हैवानों का हुआ हिसाब, चारों दोषियों को सजा-ए-मौत

जयपुर के हैवानों का हिसाब हो गया है. चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है.

2008 जयपुर सीरियल ब्लास्ट केस में हैवानों का हुआ हिसाब, चारों दोषियों को सजा-ए-मौत
चारों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के हैवानों का हिसाब हो गया है. चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है. विशेष अदालत ने आरोपी सरवर आजमी, मोहम्मद सैफ, सैफ उर्फ सेफुर्रहमान और सलमान को फांसी की सजा सुनाई है. स्पेशल कोर्ट के जज अजय कुमार शर्मा द्वारा सजा सुनाये जाने के बाद सभी वकीलों ने कोर्ट रूम में तालियां बजाई. इससे पहले आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बिच कोर्ट लाया गया था. कोर्ट रूम के बाहर भी भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया गया था. गुलाबी नगरी जयपुर में 11 साल पहले हुए 8 सीरियल बम ब्लास्ट(Serial Bomb Blast) मामले में विशेष अदालत ने चार आरोपियों को बुधवार को दोषी करार दिया था. इन चारों आरोपियों को आज सजा सुनाई गई. गुरुवार को इनकी सजा पर कोर्ट में बहस पूरी हो गई थी.

किन धाराओं के तहत हुई सजा
आईपीसी की धारा 120 B, 302, 307, 326, 324, 427, 121A, 124 A, 153 A में आरोपियों को दोषी करार दिया गया. विस्फोटक पदार्थ निवारण अधिनियम की धारा 3, विधि विरुद्ध क्रियाकलाप अधिनियम की धारा 13, 16, 16(1) A और धारा 18 में सभी चारों आरोपी दोषी करार दिए गए. इन धाराओं में आजीवन उम्रकैद से फांजी की सजा तक का प्रावधान है. 

एक को मिला संदेह का लाभ
जानकारी के अनुसार, विशेष अदालत ने आरोपी सरवर आजमी, मोहम्मद सैफ, सैफ उर्फ सेफुर्रहमान और सलमान को दोषी करार दिया. बता दें कि कोर्ट ने ढाई हजार पन्नों में फैसला दिया है. वहीं, शाहबाज हुसैन को संदेह का लाभ देते हुए आरोप मुक्त कर दिया है.  

बता दें कि, विशेष न्यायालय ने आईपीसी, विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, विस्फोटक अधिनियम और पीडीपीपी एक्ट के तहत आरोपियों को दोषी करार दिया है. कोर्ट में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने दोषियों के वकीलों की तमाम दलीलों के खिलाफ ज़ोरदार पैरवी की और दोषियों के पुराने क्रिमिनल बैकग्राउंड का हवाला दिया. 

अभियोजक पक्ष ने की थी फांसी की मांग
विशेष लोक अभियोजक ने कहा था कि जयपुर सीरियल ब्लास्ट एक वीभत्स घटना थी. लिहाज़ा दोषियों को फांसी की सजा दी जाए. उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष द्वारा दोषियों के आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने के दावे में दम नहीं है. इससे सज़ा पर कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि आरोपी वाराणसी, सूरत जैसे कई धमाकों में वांछित हैं. इन्हें फांसी की सज़ा मिलनी ही चाहिए.

 
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की डेथ पेनाल्टी की मांग पर बचाप पक्ष बैकफुट पर आ गया था. उसने सैफ के खिलाफ साबरमती में केस पेंडिंग होने का हवाला दिया था. बचाव पक्ष की दलील में कोई दम नहीं होने का हवाला देकर पब्लिक प्रॉसीक्यूटर ने दोषियों के पुराने आपराधिक बैकग्राउंड नहीं होने के एक्सक्यूज़ को खारिज करने की मांग की थी और यहां तक कह दिया कि स्पेशल कोर्ट दोषियों को फांसी दे दे.