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जयपुर: कोर्ट ने सरकार को दिए स्वीकृत चालानी गार्ड की संख्या बढ़ाने के निर्देश

राजस्थान की जेलों में 21 हजार से अधिक सजायाफ्ता, विचाराधीन और महिला कैदी बंद हैं. इन कैदियों को समय-समय पर कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया जाता है.

जयपुर: कोर्ट ने सरकार को दिए स्वीकृत चालानी गार्ड की संख्या बढ़ाने के निर्देश
बंदी गृह में कैदियों की मौजूदगी देखते हुए चालानी गार्ड की संख्या 2467 तय की गई.

विष्णु शर्मा/जयपुर: राजस्थान में क्षमता से अधिक बंदियों की मार झेल रही जेलों में चालानी गार्ड की कमी कोढ़ में खाज का काम कर रही है. कोर्ट ने स्वप्रेरित संज्ञान लेते हुए सरकार को स्वीकृत चालानी गार्ड की संख्या बढ़ाने के निर्देश दे दिए. इधर वित्तीय संकट से जूझ रही सरकार के लिए कोर्ट का यह आदेश गल की फांस बन गया है.

बता दें कि राजस्थान की जेलों में 21 हजार से अधिक सजायाफ्ता, विचाराधीन और महिला कैदी बंद हैं. इन कैदियों को समय-समय पर कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया जाता है. कैदियों को कोर्ट में पेशी पर लाने-ले जाने के लिए चालानी गार्ड तैनात होती है. इसके विपरीत राज्य में स्वीकृत चालानी गार्ड की तुलना में पद काफी कम है. चालानी गार्ड की कमी के कारण कई बार कैदियों को समय पर कोर्ट में पेशी पर नहीं ले जा पाते इससे केसों के निस्तारण में भी देरी होती है. 

ऐसे में हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने 15 मई को स्वप्रेरित याचिका में राज्य सरकार को चालानी गार्ड के पद बढ़ाने के निर्देश दिए. इसके बाद सभी जिलों में चालानी गार्ड की संख्या, प्रतिदिन पेश किए जाने वाले बंदियों की संख्या, नव सृजित कोर्ट में बंदी गृह की मौजूदगी देखते हुए चालानी गार्ड की संख्या 2467 तय की गई. इसके बाद जेल डीजी ने भी नियम के अनुसार चालानी गार्ड को दोगुना करने के प्रस्ताव राज्य सरकार को भिजवा दिया और यही सरकार के गले की फांस बन गया. 

राज्य एवं राज्य के बाहर के विभिन्न कोर्ट में आतंकवादी घटनाओं एवं गंभीर अपराधों से जुड़े बंदियों की पेशी होती है. इन्हें उंचे मापदंडों के अनुसार चालानी गार्ड उपलब्ध कराई जाती है. राज्य के बाहर भेजे जाने वाली चालानी गार्ड को एक दिन पहले लगाया जाता है और पेशी के एक दिन बाद उनकी वापसी होती है. ऐसे में बाहर की पेशी में कम से कम 3 दिन का समय लगता है.  

इधर वहीं कोर्ट में कैदियों की समय पर पेशी नहीं होने से केसों के अम्बार लग रहे हैं. राजस्थान पुलिस नियम 1948 के अनुसार सभी जिलों में चालानी गार्ड की आवश्यकता इस प्रकार बताई गई है. पुलिस कमिश्नरेट जयपुर व जोधपुर  में 7 इंस्पेक्टर 49 एसआई, 62 हैडकांस्टेबल, 391 कांस्टेबल सहित 509 पद तथा राज्य के अन्य जिलों के लिए 313 हैड कांस्टेबल व 1645 कांस्टेबल के पद मांगे गए हैं. 
  
वर्तमान में राज्य सरकार की आर्थिक हालत खराब है. ऐसे में वित्त विभाग ने एक साथ 2467 पद स्वीकृत करने के बजाय चरणों में मंजूर करने का सुझाव देते हुए मामला लौटा दिया. इसके बाद पुलिस मुख्यालय की ओर से चार चरणों में पदों का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा. पुलिस मुख्यालय ने पहले चरण में 894 पद सृजित करने की मांग की है. इसे देखते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त निरंजन आर्य ने 28 अगस्त को बैठक बुलाई है. बैठक में डीजीपी डॉ भूपेंद्र सिंह, डीजी जेल एनआरके रेड्डी सहित गृह विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों को बुलाया है. बैठक में इस बात पर विचार किया जाएगा कि कितने पद सृजित किए जाएं, जिससे कोर्ट के आदेश की पालना भी हो जाए और सरकार पर भार नहीं पड़े तथा कैदियों की पेशी भी सुचारू चल सके.