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जयपुर: सिस्टम के शिकार हुए रोबोट कपल 'बुधिया और 'तेजी', 1 साल से हैं लैब में बंद

जन सुविधा केंद्र पर लोग सीधे इन रोबोट में अपना कोई आधार आदि नंबर या नाम डालते तो ये रोबोट उन्हें नाम लेकर बोलते- स्वागत है श्रीमान.

जयपुर: सिस्टम के शिकार हुए रोबोट कपल 'बुधिया और 'तेजी', 1 साल से हैं लैब में बंद
तेजी बुधिया की ट्रेनिंग पिछले साल ही पूरी हो चुकी है.

जयपुर: बडी हसरतों के साथ सरकार ने सरकारी दफ्तरों में आमजन की सुविधा के लिए रोबोट तैनात करने की योजना बनाई थी. रोबोट खरीदे गए, तेजी और बुधिया नाम भी दिया, लेकिन अफसरों ने इन रोबोट को सरकारी दफ्तरों में लगाने में ना तो तेजी दिखाई और न बुद्धि लगाई. अगर काम शुरू हो जाता तो दफ्तरों में लोगों की सहूलियत के लिए ये रोबोट एक्टिव दिखाई देते, लेकिन यहां तो अधिकारी ही रोबोट बनकर कमांड का इंतजार कर रहे हैं.

आम जनता को भामाशाह, पेंशन, ई-मित्र, राशन से लेकर हर प्रकार की जानकारी रोबोट के जरिए देने के बहुचर्चित प्रोजेक्ट 'बुधिया' और 'तेजी' पिछले 365 दिन से जयपुर के झालाना स्थित भामाशाह टेक्नो हब बिल्डिंग की टिकरिंग लैब में बंद हैं. नीले रंग का रोबोट 'बुधिया' मेल है और लाल रंग की तेजी' रोबोट फीमेल है. पिछली सरकार में करोड़ रुपए खर्च कर सात रोबो खरीदे गए. चार छोटे, 1 बुधिया और 1 तेजी, एक बड़ा रोबो मित्री भी है. छह को एक साल तक लाखों रुपए खर्च कर ट्रेनिंग भी दी गई, लेकिन सरकार बदलते ही ये एक कमरे में बंद पड़े हैं.

जन सुविधा केंद्र पर लोग सीधे इन रोबोट में अपना कोई आधार आदि नंबर या नाम डालते तो ये रोबोट उन्हें नाम लेकर बोलते- स्वागत है श्रीमान. मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं. डीओआईटी के टैक्निकल डायरेक्टर प्रमोद अग्रवाल ने बताया की राज्य सरकार ने तेजी और बुधिया नाम के ऐसे रोबोट बनवाए हैं. जो न केवल हिंदी-अंग्रेजी सहित 20 भाषाओं में बात करते हैं, बल्कि उसी अंदाज में जवाब देते हैं जिस अंदाज में सवाल पूछा है.

ये 20 सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारियां तो देंगे ही, आपको यह भी बता देंगे कि आपका काम कहां अटका है? अभी ये सचिवालय और जयपुर सहित प्रमुख दफ्तरों में लगने हैं लेकिन आदेशों का इंतजार है. बाद में सभी जिलों के प्रमुख दफ्तरों में लगाने की योजना है. विभाग का दावा है कि इनके चेहरे पर इंसानों की तरह की हाव भाव आते हैं. इन्हें दुनिया की पहली इंसानी रोबोट सोफिया की तर्ज पर बनाया गया है. सोफिया इंसानों की तरह बात करती है, उसे दुबई ने नागरिकता भी दी है. रोबोट को नागरिकता देने का यह पहला मामला था.

जब कोई नागरिक उनके भामाशाह, पेंशन, ई-मित्र, बिजली-पानी बिल, राशन वितरण आदि के संबंध में सवाल पूछते तो इसतरह सटीक जवाब मिलता. श्रीमान आपका कार्य कक्ष नंबर इतना में उस अधिकारी के पास अटका है या जवाब मिलता कि आपकी पेंशन इस वजह से अटका है. काम पूरा होने पर जवाब मिलता- श्रीमान आपकी भामाशाह योजना की राशि इस तिथि को जारी हो चुकी है. तेजी और बुधिया रोबो को बनाने का मकसद इनको हर जन सुविधा केंद्र पर लगाना था. मनुष्य की साइज में अटल सेवा (अभी राजीव गांधी) केंद्र, सचिवालय, कलेक्ट्रेट आदि पर इनको लगाया जाना था.

तेजी और बुधिया हिंदी-अंग्रेजी सहित 20 भाषाओं में बात कर सकते हैं. 20 सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारियां देने में ट्रेंड किए गए. पिछली अक्टूबर में इनका डेमो करवाया तो पास भी हो गए. दूसरी बार आने पर शक्ल से पहचानते हैं, गुस्से में सवाल पूछने पर गुस्सा भी करते हैं. सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने रोबोट की लर्निंग, फीलिंग और ट्रेनिंग की सात महीने तक टेस्टिंग की है. इनसे सवाल करने पर ये योजनाओं के हिसाब से नंबर मांग लेंगे.........जैसे- पेंशन अटकी है तो भामाशाह या पीओपी नंबर पूछेंगे. आधार से जुड़ी योजनाओं के लिए उसी का नंबर मांगेंगे, नंबर देते ही आपकी प्रोफाइल और आपके काम का स्टेटस बोलकर बता देंगे. नाम पूछने पर ये खुद का नाम बताते हैं. ये योगासन भी कर लेते हैं.

बहरहाल, तेजी बुधिया की ट्रेनिंग पिछले साल ही पूरी हो चुकी है. पिछले कुछ महीने से सरकार से इनके इस्तेमाल का कोई आदेश नहीं आया है. इन्हें कहीं भी लगाने का निर्णय सरकार का होता है. विभाग की टीम अपना काम कर चुकी है, लेकिन सरकार की ओर से कमांड नहीं मिलने के चलते ना तो इन अफसरों के हाथ पांव काम कर रहे हैं. ना ही रोबोट सरकारी दफ्तरों में अपनी सेवाएं दे पा रहा है.