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जयपुर: बसों के संचालन में चालक-परिचालकों की कमी, प्रशासन नहीं ले रहा कोई एक्शन

ऑफिस में 20 परिचालकों की ड्यूटी है. इनमें से 6 परिचालक 5 साल से काम कर रहे हैं. वहीं रोडवेज मुख्यालय में 8 परिचालक ऑफिस में काम कर रहे हैं.

जयपुर: बसों के संचालन में चालक-परिचालकों की कमी, प्रशासन नहीं ले रहा कोई एक्शन
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर/ दीपक गोयल: एक तरफ जयपुर की जनता लो फ्लोर बसों का इंतजार करके प्राइवेट वाहनों से सफर करने को मजबूर है. वहीं JCTSL के ड्राइवर-कंडेक्टर अधिकारियों की कृपा के बाद ऑफिस में एसी का आनंद ले रहे हैं. इससे भी बड़ी बात है कि इनमें 25 फीसदी चालक-परिचालक ऐसे हैं जिन्होंने पिछले 5 साल से बसों को देखा तक नहीं है. 

शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ढर्रा बिगड़ हुआ है. ऐसे में लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है. समय पर बस उपलब्ध कराने के लिए तीनों ही डिपो में परिचालकों को डबल ड्यूटी देनी पड़ रही है. इसके बाद भी JCTSL प्रबंधन अपने चहेतों की सेवा में लगा है.

टोडी डिपो में कुल 191 परिचालक हैं. जिनमें से 20 परिचालक ऑफिस में और रोडवेज मुख्यालय में 2 परिचालक तैनात हैं और इनमे से 5 परिचालक पिछले 5 साल से जमे हुए है. ऐसे ही सांगानेर डिपो में कुल परिचालक 134 हैं. जहां ऑफिस में 27 परिचालक तैनात हैं. इनमे से 7 परिचालत पिछले पांच साल से तैनात है. वहीं विद्याधर नगर डिपो में 240 परिचालक हैं. 

ऑफिस में 20 परिचालकों की ड्यूटी है. इनमें से 6 परिचालक 5 साल से काम कर रहे हैं. वहीं रोडवेज मुख्यालय में 8 परिचालक ऑफिस में काम कर रहे हैं. जेसीटीएसएल में कुल 270 चालक हैं. इनमें से 18 चालक ऑफिस में काम कर रहे हैं और 10 चालक पेट्रोल पॉइन्ट्स पर तैनात किए गए हैं. डिपो में बसों की स्थिति की बात करें तो टोडी डिपो में 101 में से 91 शेड्यूल. विद्याधर नगर में 102 में से 90 शेड्यूल और सांगानेर में 136 में से 30 शिड्यूल चल रहे हैं.

JCTSL प्रबंधन के ऐसे रवैये के चलते अन्य कर्मचारियों को ओवरटाइम करना पड़ रहा है. साथ ही उन्हें वीकली ऑफ तक नसीब नहीं हो रहा है. कई परिचालकों के तो 100 रेस्ट तक बकाया हैं. अब देखना होगा कि JCTSL प्रबंधन की अपने चहेतों पर मनमानी आखिर कब तक चलती है.