'वसुंधरा जन रसोई' में पक रही BJP की सियासी खिचड़ी, तड़का लगा रहे इन नेताओं के बयान
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'वसुंधरा जन रसोई' में पक रही BJP की सियासी खिचड़ी, तड़का लगा रहे इन नेताओं के बयान

बीजेपी में कार्यकर्ता और नेता वसुंधरा रसोई को लेकर आपस में तो चर्चा कर रहे हैं, लेकिन खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है. ऐसी ही स्थिति वसुंधरा रसोई के तहत खाना बांटने वाले नेताओं की दिख रही है.

'वसुंधरा जन रसोई' में पक रही BJP की सियासी खिचड़ी, तड़का लगा रहे इन नेताओं के बयान

Jaipur: भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) की रसोई में नई खिचड़ी पक रही है. एक तरफ तो बीजेपी का संगठन अपने सेवा कार्यों के जरिए 'सेवा ही संगठन' अभियान को आगे बढ़ा रहा है. इसके तहत लोगों तक दवा, इलाज और खाना तक पहुंचाया जा रहा है.

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वहीं, इस अभियान में 'वसुंधरा जन रसोई' के तड़के ने बीजेपी (BJP) की खिचड़ी में नया रंग ला दिया है. पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच ही आपस में चर्चा चलने लगी है कि क्या वसुंधरा जन रसोई के जरिए पार्टी के ही कुछ कार्यकर्ता अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं?

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कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर ने पूरे देश को हिला दिया. इस लहर में राज्य और केंद्र सरकार के आपसी संबंध हिचकोले खाते दिखे. दोनों ही तरफ से नेताओं ने एक-दूसरे के पाले में गेंद डालने में कोई कसर नहीं रखी.
इन सबके बीच लंबे समय से शांत पानी की तरह दिखने वाली राजस्थान बीजेपी (Rajasthan BJP) में एक बार फिर हलचल सी दिख रही है. सीधे तौर पर देखा जाए तो यह हलचल कोरोना की दूसरी लहर के कारण नहीं है, लेकिन इसका प्रमुख कारण कोरोना ही बना है.

सेवा कार्यों के दौरान राजस्थान बीजेपी में दो ध्रुव दिखाई दिए
दरअसल, बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने 'सेवा ही संगठन अभियान' के तहत सभी राज्य इकाइयों को जनता के बीच सेवा कार्य करने के लिए कहा. राजस्थान बीजेपी भी इससे अछूती नहीं थी लेकिन कोरोना के समय में भी सेवा कार्यों के दौरान राजस्थान बीजेपी में दो ध्रुव दिखाई दिए.

एक मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष पूनिया का था तो दूसरा मोर्चा पूर्व मुख्यमंत्री राजे का
कोरोना के इस दौर में के लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा था. ऐसे में लोगों तक भोजन पहुंचाना बड़ी जिम्मेदारी थी और वसुंधरा समर्थक बीजेपी नेताओं ने इस जरूरत को समझते हुए अपना काम शुरू कर दिया. वसुंधरा जन रसोई के नाम से अपना अभियान शुरू किया गया. इस अभियान में बीजेपी के आम कार्यकर्ता के साथ ही सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक भी सक्रिय दिखे. लोगों तक हर विधानसभा क्षेत्र में खाना पहुंचाने की इस मुहिम में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम शामिल होने के साथ ही बीजेपी के संगठन में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं भी होने लगी.

क्या कहना है बीजेपी के प्रदेश महामंत्री मदन दिलावर का
इन चर्चाओं के बीच बीजेपी के प्रदेश महामंत्री मदन दिलावर (Madan Dilawar) कहते हैं कि पार्टी ने केंद्र में मोदी सरकार के 7 साल पूरे होने पर सेवा कार्य चलाने का संकल्प लिया था. इसमें सेवा ही संगठन के तहत काम पार्टी और केंद्रीय नेताओं के बैनर तले हुए, लेकिन कुछ कार्यकर्ता ऐसे भी हैं, जो बिना पार्टी के बैनर के काम कर रहे हैं.

'वसुंधरा रसोई का नाम लिए बिना दिलावर कहते हैं कि अगर पार्टी का कोई कार्यकर्ता किसी और बैनर पर काम करता है, जिसमें पार्टी का चुनाव चिन्ह या पार्टी के केंद्रीय नेताओं की फोटो नहीं लगाई जाती, तो यह ठीक बात नहीं है.

क्या कहना है प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का
उधर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) इस पूरे मामले पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं. पूनिया ने 'वसुंधरा रसोई' के सवाल पर सिर्फ इतना ही कहा कि इसका जवाब तो वही दे सकते हैं, जिन लोगों ने इस रसोई को शुरू किया है. सतीश पूनिया कहते हैं कि केंद्र ने सेवा ही संगठन के तहत जो काम करने का जिम्मा दिया उसको पार्टी के सभी कार्यकर्ता मानते हैं, केंद्रीय नेताओं को फॉलो करते हैं. पूनिया ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व से जो निर्देश मिले हैं उनको संगठन की तरफ से क्रियान्वित भी किया जा रहा है.

खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं कोई
बीजेपी में कार्यकर्ता और नेता वसुंधरा रसोई को लेकर आपस में तो चर्चा कर रहे हैं, लेकिन खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है. ऐसी ही स्थिति वसुंधरा रसोई के तहत खाना बांटने वाले नेताओं की दिख रही है. हालांकि वह भी सिर्फ यही कहते हैं कि पार्टी के किसी नेता की तरफ से अगर जरूरतमंदों को खाना पहुंचाने का काम किया जाता है तो, ना इसमें कोई गलत बात है और ना ही किसी को ऐतराज हो सकता है.

 

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