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जोधपुर: पूर्व रेसलर ने बनाई कुश्ती एकेडमी, कर रहे पहलवानों के दंगल में उतारने की तैयारी

करीब डेढ़ साल पहले स्थापित हुई इस एकेडमी के पहलवानों ने अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किया है. 

जोधपुर: पूर्व रेसलर ने बनाई कुश्ती एकेडमी, कर रहे पहलवानों के दंगल में उतारने की तैयारी
यह कुश्ती एकेडमी जोधपुर के बरकतुल्लाह खान स्टेडियम में चल रही है.

जोधपुर/अरुण हर्ष: राजस्थान के पहलवान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए पूर्व कुश्ती प्लेयर ने अपने मित्रों के सहयोग के साथ जोधपुर में कुश्ती एकेडमी बनाई है. साथ ही यहां पहलवानों को दंगल में उतरने के लिए तैयार किया जा रहा है.

खबर के मुताबिक यह कुश्ती एकेडमी जोधपुर के बरकतुल्लाह खान स्टेडियम में चल रही है. करीब डेढ़ साल पहले स्थापित हुई इस एकेडमी के पहलवानों ने अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किया है. कुश्ती खिलाड़ी दाउलाल ने बताया कि उन्होंने 1977 में अंतर्राष्ट्रीय खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था. स्पोर्ट्स कोटे से उन्हें रेलवे में सटीआई पद पर काम करने का अवसर मिला. सेवानिवृति के बाद जब उन्होंने देखा कि राजस्थान के पहलवानों के लिए अभी भी कोई ट्रेनिंग सेंटर नहीं है तो उन्होंने जोधपुर में कुश्ती एकेडमी खोलने का निर्णय लिया. 

दाऊलाल ने अपने सहयोगी साथी महेश शर्मा और के साथ सलाह मशवरा कर इस कुश्ती एकेडमी की स्थापना की. वर्तमान में पहलवानों को तैयार करने के लिए ऐसे आत्यधुनिक उपकरण मौजूद है जो शायद राजस्थान के किसी भी कुश्ती एकेडमी में नहीं है. भूतपूर्व खिलाड़ी दाऊलाल ने कहा कि उनका एक ही ध्येय है कि एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय पहलवानों का दबदबा कायम हो और भारतीय पहलवान अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीतकर आए.  हालांकि उन्हें किसी प्रकार का कोई सरकारी सहयोग नहीं मिल पा रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी उसके हौसले बुलंद है. उन्हें विश्वास है कि जल्द ही उनकी एकेडमी के पहलवान अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं  में अपना परचम फहराएंगे.

कोच दाऊलाल ने बताया कि यहां आने वाले पहलवानों को कुश्ती का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है. साथ ही उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बादाम सहित अन्य पोस्टिक आहार भी दिया जाता है. दाऊलाल के सहयोगी रिटायर्ड तकनीकी अधिकारी महेश शर्मा ने बताया कि वह खुद अंतरराष्ट्रीय स्तर के धावक रहे हैं. दाऊलाल से उनकी पहली मुलाकात एक कोचिंग कैंप के दौरान हुई थी. 

महेश शर्मा ने बताया कि उन्हें भी कुश्ती का शौक था और जब दाऊलाल ने कुश्ती एकेडमी खोलने की योजना बताई तो उन्हें यह योजना पसंद आई और पहलवानों को ट्रेनिंग देने के लिए यहाँ हम कुश्ती एकेडमी संचालित कर रहे है. कुश्ती एकेडमी में ट्रेनिंग ले रहे खिलाड़ी रामनिवास ने बताया कि वह कोच दाऊलाल के सानिध्य में कोचिंग ले रहे हैं और एक दिन वह देश के लिए गोल्ड मेडल हासिल कर अपने गुरु और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे.

सेवानिवृत्ति के बाद भी खेल के प्रति दाऊलाल का यह जज्बा निश्चित रूप से अनुकरणीय है. जिस मेहनत और लगन के साथ दाऊलाल एकेडमी में पहलवानों को ट्रेनिंग दे रहे हैं उम्मीद की जानी चाहिए जल्द ही यह पहलवान देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर आएंगे.