नागौर: जानिए लाडनूं कैसे बना जैन धर्म के दिगंबर और श्वेताम्बर पंथों के लिए तीर्थस्थल

सावन और भादवा दो ऐसे महिने हैं जिनको भारतीय संस्कृति के लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है.

नागौर: जानिए लाडनूं कैसे बना जैन धर्म के दिगंबर और श्वेताम्बर पंथों के लिए तीर्थस्थल
नागौर जिले का लाडनूं कस्बा जैन धर्म के दिगंबर और श्वेताम्बर दोनों पंथों के लिए तीर्थस्थल माना जाता है.

हनुमान तंवर, नागौर: सावन और भादवा दो ऐसे महिने हैं जिनको भारतीय संस्कृति के लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. जैन धर्म मे भी इन दो महीनों के अपने आप में विशेष महत्व है. नागौर जिले का लाडनूं कस्बा जैन धर्म के दिगंबर और श्वेताम्बर दोनों पंथों के लिए तीर्थस्थल माना जाता है.

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जैन अतिषय क्षेत्र लाडनूं में सावन और भादो इन दो महीनों में आम दिनों में जहां दूर दूर से जैन धर्मावलम्बी पहुंचते हैं. वहीं, इस बार इन मंदिरों में सन्नाटा पसरा हुआ है. यहां श्रद्धा के प्रमुख केंद्रों में से एक बड़ा जैन मंदिर है जिसकी पहचान पूरे भारत में है. आजादी से पूर्व तकरीबन 150 वर्ष पूर्व जैन समाज के लोगों ने एक जगह पर जैन मंदिर निर्माण करने का मानस बनाया. यहां खुदाई के दौरान मंदिर के अवशेष मिलने पर सावधानी पूर्वक खुदाई करने पर इस खुदाई में एक पूरा जैन मंदिर ही निकल गया. जिसमें भगवान शांतिनाथ और अजितनाथ की मूर्तियों के साथ सभी तीर्थंकरों की मूर्तियां यहां खुदाई में मिली थी.

बेजोड़ शिल्पकला से बना यह मंदिर अपने आप में बेजोड़ धरोहर है. यहां खुदाई में एक जैन सरस्वती की सुंदर प्रतिमा भी प्राप्त हुई जो अपने आप में अद्वितीय मानी गई है. इस मूर्ति की खूबसूरती को देखते हुए तात्कालिक ब्रिटिश सरकार ने इसकी 2 करोड़ कीमत आंकी थी ताकि इसे ब्रिटेन संग्रहालय में रखा जा सके, लेकिन जैन धर्मावलंबियों ने यह मूर्ति अंग्रेजों को बेचने से मना कर दिया और इस स्थान पर पुराने मंदिर के साथ ही एक भव्य मंदिर का भी निर्माण करवाया गया. यहां खुदाई में कई प्राचीन पूजा पात्र भी प्राप्त हुए.

इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर तकरीबन 1100 साल पुराना है और संभवतया विदेशी आक्रांताओं से बचाने के लिए ही इस मंदिर को जमींदोज किया गया था. यही वजह रही कि मंदिर खुदाई में पूरी तरह से सुरक्षित ही बाहर निकला. हर साल भाद्रपद मास में यहां श्रद्धालुओं का तांता रहता है और जैन संतों का आवागमन भी लगातार रहता है, लेकिन इस बार लोक डाउन का असर यहां भी देखने को मिला है.

लाडनूं में जैन धर्म के कई धार्मिक स्थल हैं. श्वेताम्बर और दिगम्बर दोनों पंथों के लिए यह आस्था का केंद्र है और अतिषय क्षेत्र भी है. जैन विश्व भारती जैसे बड़े संस्थानों की यहां मौजूदगी के कारण स्थानीय लोग इसे तीर्थस्थल घोषित करने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं.

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