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वीरान पहाड़ आज है जल संरक्षण का नायाब नमूना, छिपी है संघर्ष की कहानी

जोधपुर की प्राकृतिक सौंदर्य के बीच हरी-भरी पहाड़ियां आकर्षण का केंद्र रहती है. लेकिन बंजर पहाड़ियों से हरी-भरी पहाड़ियां बनने के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी जुड़ी है.

वीरान पहाड़ आज है जल संरक्षण का नायाब नमूना, छिपी है संघर्ष की कहानी
इसे जल संग्रहण का नायाह उदाहरण भी माना जाता है.

जोधपुर: जोधपुर में स्थित सिद्धनाथ की पहाड़ियों के बीच स्थित शिव मंदिर हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है. प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बसे इस शिव मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हरी-भरी पहाड़ियां आकर्षण का केंद्र होती है. लेकिन बंजर पहाड़ियों से हरी-भरी पहाड़ियां बनने के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी जुड़ी है.

लंबे समय तक बारिश के दिनों में इन पहाड़ियों से गिरने वाला पानी व्यर्थ बहता रहा. यहां आने वाले श्रद्धालुओं ने इस अमृत रूपी पानी के संग्रहण करने का विचार किया. 

बनाए गए तीन एनीकट
लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार उन्हें कुछ आशा की किरण नजर आई. काजरी के वैज्ञानिक एल एन हर्ष के सुझाव को अमलीजामा पहनाते हुए यहां कठिन परिश्रम से तीन एनीकट बनाए गए. 


 वैज्ञानिक एल एन हर्ष

पहली बारिश में भर गया पानी
भगवान इंद्र देव ने भी श्रद्धालुओं का पूरा साथ दिया और पहले ही मानसून में यह तीनों एनीकट भर गए. जानकारी देते हुए हर्ष ने बताया कि एनीकट में इतना पानी एकत्रित हो जाता है कि पूरे वर्ष भर यहां लगभग 5000 पौधों को पानी की आपूर्ति की जा सकती है. साथ ही आसपास की पहाड़ियों में रहने वाले पशुओं के लिए भी यहां पर्याप्त पानी उपलब्ध होता है. 

सिंचाई में भी आता है काम
मानसून सीजन में एनीकट में काफी पानी एकत्रित हो जाता था और उसके बाद इस पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया जाने लगा. कुछ ही वर्षों में सिद्धनाथ कि यह पहाड़ियां हरी भरी नजर आने लगी. अब यहां पक्षियों की कलरव भी सुनाई देती है.

भक्तों ने दिया इस मुहिम में साथ
इस कार्य में कृषि वैज्ञानिक एलएन हर्ष का कई श्रद्धालुओं ने साथ दिया. मीडिया से बातचीत में श्रद्धालु नटवर हर्ष ने बताया कि इस कार्य की शुरुआत में उन्हें कई तरह के मुश्किलों का सामना करना पड़ा. जिस किसी के सामने पहाड़ी पर जल संग्रहण की बात की जाती थी तो वह इस बात को असंभव बताते थे. लेकिन सभी श्रद्धालुओं की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि यहां आज 3 एनीकट बने हैं जहां पूरे वर्ष भर बारिश का पानी एकत्रित होता है. इस पानी का उपयोग पीने के रूप में भी किया जा सकता है. साथ ही पहाड़ियों को हरा भरा बनाने के लिए लगाए गए पौधों को यहीं से पानी पिलाया जा रहा है.

वर्षा जल संग्रहण का नायाब उदाहरण
निश्चित रूप से सिद्धनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने पहाड़ का सीना चीर कर एनीकट बनाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्कृष्ट कार्य किया है. आज देशभर में वर्षा जल संग्रहण की दिशा में गंभीरतापूर्वक विचार करने की मांग उठ रही है. लेकिन यहां के श्रद्धालुओं ने जोधपुर वासियों के समक्ष वर्षा जल संग्रहण का नायब उदाहरण प्रस्तुत किया है.