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कोटा: हॉस्पिटल ने फिर लगाया सरकार को चूना!, फ्यूमिगेशन के नाम पर खरीदे डिसइंफेक्टेंट्स

नर्सिंग इंचार्ज मेडिसिन आईसीयू और प्रभारी अधिकारी सेंट्रल लैब (माइक्रो बायलॉजी) की ओर से फ्यूमिगेशन की डिमांड पर एमबीएस प्रशासन ने स्टेट फंड से दिसम्बर 2018 में वर्क ऑर्डर जारी किए थे.

कोटा: हॉस्पिटल ने फिर लगाया सरकार को चूना!, फ्यूमिगेशन के नाम पर खरीदे डिसइंफेक्टेंट्स

कोटा/ मुकेश सोनी: एमबीएस अस्पताल प्रशासन द्वारा एक बार फिर निजी दवा सप्लायर फर्म से साठ गांठ कर सरकार को राजस्व नुकसान करने का मामला सामने आया है. अस्पताल प्रशासन ने नियमों को ताक में रखकर तय टेंडर रेट से ज्यादा की दर पर डिसइंफेक्टेंट्स (कीटाणुनाशक) खरीदे. अस्पताल प्रशासन ने बिना जरूरत के ही फ्यूमिगेशन के लिए मंहगी दर पर करीब 13 लाख रुपये का स्पॉरीसाईडॉल सोल्यूशन खरीदा है. 

मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन अब इन सोल्यूशन को जबरदस्ती इधर उधर खपाने में लगा है. बिना डिमांड के ही स्वाइन फ्लू वॉर्ड, बर्न वॉर्ड, सहित अन्य जगहों पर भिजवाया जा रहा है. इतना ही नहीं फ्यूमिगेशन के लिए खरीदे गए सोल्यूशन से मोपिंग (पोचे) करवाई जा रही है.

तय दर से ज्यादा में खरीद
नर्सिंग इंचार्ज मेडिसिन आईसीयू और प्रभारी अधिकारी सेंट्रल लैब (माइक्रो बायलॉजी) की ओर से फ्यूमिगेशन की डिमांड पर एमबीएस प्रशासन ने स्टेट फंड से दिसम्बर 2018 में वर्क ऑर्डर जारी किए थे. फर्म ने करीब डेढ़ माह बाद ऑर्डर की सप्लाई भी कर दी थी. अस्पताल प्रशासन द्वारा फ्यूमिगेशन के लिए खरीदे गए डिसइंफेक्टेंट्स 740 (लीटर) बोतल (स्पॉरीसाईडल सोल्यूशन) का भुगतान 1725 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से किया गया जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा ड्रग व मेडिसिन सप्लाई के लिए लोकल स्तर पर पांच फर्मो से रेट कॉन्ट्रेक्ट है. 

सूत्रों की मानें तो टेंडर में डिसइंफेक्टेंट्स की कीमत 1575 रुपये (1 लीटर) कोड (तय) की है. यहां हैरान करने वाली बात यह भी है कि फ्यूमिगेशन के लिए सेंट्रल लैब (माइक्रो बायलॉजी), और मेडिसिन आईसीयू दोनों डिपार्टमेंट के एचओडी की ओर से डिमांड नहीं की गई. मेडिकल कॉलेज के सरकारी ड्रग वेयर हाउस (एमसीडब्ल्यू) में डिसइंफेक्टेंट्स फॉर्मेलिन के नाम से स्टॉक पड़ा है. एमबीएस प्रशासन ने लोकल खरीद के लिए एमसीडब्ल्यू से एनएसी भी नहीं ली.

क्या है फ्यूमिगेशन
फ्यूमिगेशन एक रासायनिक पद्धति है जो कीट-पतंगों और वायरल को खत्म करने के लिए प्रयोग की जाती है. खासकर ऑपरेशन थियटर में फ्यूमिगेशन का इस्तेमाल किया जाता है ताकि इंफेक्शन नहीं फैले. फ्यूमिगेशन से किसी भी तरह के किटाणु नहीं बचते हैं. एमबीएस प्रशासन द्वारा खरीदा गया सोल्यूशन क्रिटीकल एरिया में फॉगिंग, सर्जिकल व एस्थेटिक इंटुसमेन्ट के बैक्टीरिया (कीटाणु) खत्म करने के काम मे आता है. 

अस्पताल अधीक्षक डॉ. नवीन सक्सेना ने एक बार तो फ्यूमिगेशन खरीदे जाने की बात से इनकार कर दिया था. फिर उन्होंने बताया कि आईसीयू व सेंट्रल लैब की इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी द्वारा डिमांड पर इसकी खरीद हुई है. स्पोरीसाइडल सोल्यूशन फ्यूमिगेशन के ही काम नही आता है. इसका बहुउपयोग है जिन वार्डों में रेगुलर पेशेंट रहते हैं. वहां तुरन्त मोपिंग के लिए भी काम में ले सकते हैं. 
स्वाइन फ्लू वार्ड, बर्न वार्ड में अब इससे ही मोपिंग (पोचा) की जाएगी. पहले केवल फिनाइल से लगाते थे. अधीक्षक डॉक्टर नवीन सक्सेना का कहना है कि अस्पताल की इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी ने जस्टिफिकेशन दिया है कि इसकी खपत हो जाएगी उसके बाद ही खरीद हुई है. मेडिसिन आईसीयू व सेंट्रल लेब में फ्यूमिगेशन नहीं करते, इनको खाली करवाना पड़ता है. आईसीयू इतने नहीं हैं कि एक को खाली करवाके उधर शिफ्ट कर दें और फ्यूमिगेशन करें. मोपिंग, सरफेस, स्टूमेंट धोना इससे भी फ्यूमिगेशन कंट्रोल कर पाते हैं.