लोकसभा चुनाव 2019: चित्तौड़गढ़ सीट पर क्या लगातार दूसरी बार जीत पाएगी BJP?

राजस्थान की चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट की बात करें तो यहां से मौजूदा सांसद बीजेपी के चंद्र प्रकाश जोशी उर्फ सीपी जोशी हैं.

लोकसभा चुनाव 2019: चित्तौड़गढ़ सीट पर क्या लगातार दूसरी बार जीत पाएगी BJP?
आठ विधानसभा सीटों को समेटे हुए चित्तौड़गढ़ संसदीय क्षेत्र में पहला आम चुनाव 1952 में हुआ था

चित्तौड़गढ़: देशभर में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर 2019 की शुरुआत से ही सभी सियासी दल चुनावी मोड में आ गए हैं. और राजस्थान की बात करें तो हाल ही में यहां विधानसभा चुनाव खत्म हुए हैं और इस वजह से राज्य में चुनावी सरगर्मी लोकसभा चुनाव तक जारी रहेगी. एक तरफ राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत के बाद पार्टी के हौसले बुलंद हैं तो वहीं मामुली मत प्रतिशत से पिछड़ने के कारण बीजेपी भी बाजी पलटने की फिराक में है. 

दिसंबर 2018 में राजस्थान में हुए विधानसभा चुनावों में 200 सीटों में से 99 सीटों के साथ कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की. वहीं बीजेपी 73 सीटों के साथ विपक्ष में है. वैसे तो सूबे में इस तरह का ट्रेंड रहा है कि जिस पार्टी की सरकार विधानसभा में बनती है, लोकसभा में भी उसी दल का दबदबा रहता है. यही कारण है कि 2013 के विधानसभा चुनाव में बहुमत से जीती बीजेपी ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 25 सीटों पर कब्जा जमा लिया लेकिन बाद में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने अलवर और अजमेर सीट पर वापसी कर ली.

इसी बीच राजस्थान की चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट की बात करें तो यहां से मौजूदा सांसद बीजेपी के चंद्र प्रकाश जोशी उर्फ सीपी जोशी हैं. उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सीनियर और लोकप्रिय नेता डॉ. गिरीजा व्यास को 3,16,857 वोटों से हराया था. इस सीट पर कांग्रेस नंबर दो और कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) तीसरे नंबर पर थी. चित्तौड़गढ़ की 91 प्रतिशत आबादी हिंदू धर्म में भरोसा करती है जबकि 6 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म में विश्वास रखते हैं. 

आठ विधानसभा सीटों को समेटे हुए चित्तौड़गढ़ संसदीय क्षेत्र में पहला आम चुनाव 1952 में हुआ था, जिसे भारतीय जन संघ ने जीता था. इसके बाद 1957 से लेकर 1967 तक यहां पर कांग्रेस का राज रहा.  1989 में यहां पहली बार कमल खिला और महेंद्र सिंह मेवाड़ यहां से एमपी चुने गए. 1991 के चुनाव में यहां से बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह विजयी हुए और वो 1996 के चुनाव में भी यहां एमपी की कुर्सी पर विराजमान रहे, साल 1998 के चुनाव में यहां कांग्रेस की वापसी हुई लेकिन इसके एक साल बाद ही हुए चुनाव में ये सीट वापस बीजेपी के पास चली गई और श्रीचंद कृपलानी यहां से सांसद बने, वो साल 2004 के चुनाव में भी यहां से विजयी हुए लेकिन साल 2009 का चुनाव यहां पर कांग्रेस ने जीता और डॉ. गिरीजा व्यास यहां से सांसद चुनी गईं. हालांकि, साल 2014 के चुनाव में उन्हें बीजेपी के नए चेहरे चंद्र प्रकाश जोशी से शिकस्त झेलनी पड़ी.