देहरादून में पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन, लोस अध्यक्ष ओम बिरला ने किया उद्घाटन

देश के सभी विधानसभा और विधानपरिषदों के पीठासीन अधिकारियों का दो दिवसीय सम्मेलन देहरादून में शुरू हुआ.

देहरादून में पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन, लोस अध्यक्ष ओम बिरला ने किया उद्घाटन
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला

जयपुर: देश के सभी विधानसभा और विधानपरिषदों के पीठासीन अधिकारियों का दो दिवसीय सम्मेलन देहरादून में शुरू हुआ. लोकसभा स्पीकर ने बुधवार को 79वें सम्मेलन का उद्घाटन किया. इस सम्मेलन में खासकर दो मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें दलबदल कानून को और मजबूत करने और शून्यकाल को विस्तार देने को लेकर तमाम पहलुओं पर चर्चा होगी. 

उद्घाटन अवसर पर स्पीकर ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि 1921 से लेकर अब तक का 79वां सम्मेलन है. पीठीसीन अधिकारियों के सम्मेलन में जिन विषयों पर चर्चाओं होती है उससे लोकतंत्र को मजबूती मिलती है. बिड़ला ने कहा कि स्वस्थ और निष्पक्ष लोकतंत्र के लिए उत्तम लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का होना जरूरी है. बिरला ने उत्तराखंड राज्य के निर्माण में वाजपेयी के योगदान को याद करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, सोमनाथ चटर्जी, मनोहर जोशी, अरूण जेटली, सुषमा स्वराज, अनंत हेगड़े जैसी शख्सियतों ने लोकतंत्र को मजबूत किया.

बिरला ने कहा कि बतौर लोकसभा अध्यक्ष सभी दलों कोे साथ लेकर बड़ी चुनौती होती है. अलग अलग दल, भाषा, क्षेत्र, संस्कृति के सांसदों, विधायकों का साथ लेकर सबकी आवाज सुनना होता है. मेरे कार्याकाल के पहले सदन में ऐतिहासिक और सुचारु कार्यवाही चली. जनता के भरोसे को बनाये रखने के लिए हम जवाबदेही के साथ पहले सत्र में 125% और दूसरे सत्र में भी 115% प्रोडेक्टिविटी रही.

बिरला ने कहा कि पहले हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बाधित होती थी, जिससे संसद के प्रति जनता का भरोसा कम हुआ था. हमने इस परंपरा को ठीक किया और सदन की प्रोडेक्टिविटी बढ़ाई.  मेरा प्रयास रहता है कि पहली बार चुनकर आए सांसदों को अपने विषय सदन रखने का मौका मिले इसलिए सांसदों को शून्यकाल या प्रश्नकाल के तहत अपने सवाल रखने का अधिक से अधिक मौका दिया.

बिरला ने कहा कि सदन की कार्यप्रणाली को सुचारु रूप से चलाने के लिए हमने 3 कमेटियां बनाई है. इन कमेटियों के सुझावों पर अगले सम्मेलन में चर्चा होगी. वहीं ई विधान के तहत विधानसभाओं को डिजिटल करने के काम को आगे बढ़ाया जाएगा. बिरला ने कहा कि जनता की उम्मीद और आकांक्षाओं के अनुरूप काम होने से मतदाताओं की लगातार संसद और लोकतंत्र में आस्था बढ़ी है.