सिरोही के इस गांव में आधी आबादी के बराबर भी नहीं पुरुषों की संख्या

करीब 20 से 25 घर ऐसे हैं, जिसमें पुरुष युवावस्था में ही जान गंवा चुके हैं. इस गांव में अब पुरुषों से अधिक विधवाएं हैं. यह त्रासदी सिरोही जिले के पिंडवाड़ा तहसील अंतर्गत कोजरा ग्राम पंचायत के राणीधरा गांव की है. 

सिरोही के इस गांव में आधी आबादी के बराबर भी नहीं पुरुषों की संख्या
इस गांव में समय-समय पर चिकित्सकों की टीमें आ रही हैं और सिलिकोसिस का उपचार कर रही हैं.

साकेत गोयल, सिरोही: जिले में एक गांव ऐसा भी है, जहां घर करीब 40 से 50 और आबादी करीब 150 से 200 है. गांव में मात्र आठ पुरुष बचे हैं बाकी महिलाएं और बच्चे. 

करीब 20 से 25 घर ऐसे हैं, जिसमें पुरुष युवावस्था में ही जान गंवा चुके हैं. इस गांव में अब पुरुषों से अधिक विधवाएं हैं. यह त्रासदी सिरोही जिले के पिंडवाड़ा तहसील अंतर्गत कोजरा ग्राम पंचायत के राणीधरा गांव की है. पिंडवाड़ा उपखंड क्षेत्र में पिछले 3 वर्षों में अब तक सिलिकोसिस से 150 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 1500 से अधिक लोगों सिलिकोसिस की चपेट में हैं. 

जब इस समाचार को जी मीडिया पर करीब एक साल पहले प्रमुखता से चलाया तो इस खबर का बड़ा असर देखने को मिला. पहले इस गांव में न तो बिजली थी और न हीं पेयजल की कोई व्यवस्था. दूर कुओं या हैडंपों से पानी लाने पर विवश थी यहां की महिलाएं. वहीं रात होते ही यह गांव काली स्याह रात में डूब जाता था. बच्चे भी विद्यालय जाने से कतराते थे. हर तरफ इस गांव में अंधेरा था.

राणीधरा गांव की सच्चाई यह थी कि हर घर को जानलेवा बीमारी सिलिकोसिस ने घेर रखा था. युवाओं की 30 की उम्र में ही मौत हो जाती थी. इसके पीछे कारण है उनका रोजगार. अशिक्षित होने के कारण युवा पत्थर घड़ाई करते हैं. जागरूकता की कमी के कारण गिनती के पुरुष बचे थे. महिलाएं सुहाग खो चुकी थीं. 

अब एक साल बाद इस गांव की तस्वीर बदल चुकी है. अब न तो यहां पेयजल की किल्लत है तथा न ही बिजली की. इस गांव में सरकार की ओर से फलोराइड मुक्त पानी की व्यवस्था हो चुकी है. गांव के बीचों-बीच एक यहां पेयजल के लिए व्यवस्था की गई. यहां सरकारी की ओर से पानी की टंकी रखवाई है. जहां पर चौबीसों घंटे पानी की व्यवस्था है. वहीं यहां अब इस गांव में बिजली पंहुच चुकी है. अब हर घर रोशनी से जगमगा रहा हैं. जो परिवार लाइट कनेक्शन के लिए डिमांड राशि भरने में असमर्थ थे, उन परिवारों के लिए भामाशाह आएं तथा डिमाड राशि भरी. 

इतना ही नहीं, स्वयंसेवी संस्थाएं भी यहां आगे आईं और इस गांव में जागरूकता लाने का निश्चय किया. इसके लिए यहां के बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, वहीं गांव के ग्रामीणों को जागरूक किया. इस गांव में समय-समय पर चिकित्सकों की टीमें आ रही हैं और सिलिकोसिस का उपचार कर रही हैं. वहीं पत्थर का कार्य करते समय बरती जाने वाली सावधानियों से अवगत करवा रही है. भामाशाह आगे आकर यहां अपनी सेवांए दे रहे हैं. 

अब यह गांव और गांव के ग्रामीण खुश हैं. जी मीडिया ने अपने सामाजिक सरोकारों को निभाते हुए यहां की समस्याओं पर खबर को प्रमुखता से दिखाया था. जिसके बाद इस गांव में सुखद बदलाव होने लगे. ग्रामीण भी यहां जी मीडिया को धन्यवाद देते हुए नहीं थक रहे हैं.